अपने ही वाल्व से बदला जा सकता है खराब एओर्टिक वाल्व
पीजीआइ के सीवीटीएस विभाग के 39वें स्थापना दिवस
जन्मजात या गंभीर एओर्टिक वाल्व रोग से पीड़ित बच्चों और युवाओं के लिए रॉस ऑपरेशन एक प्रभावी हृदय सर्जरी तकनीक है। इसमें मरीज के खराब एओर्टिक वाल्व को हटाकर उसकी जगह उसी का स्वस्थ पल्मोनरी वाल्व लगाया जाता है। इसके बाद पल्मोनरी वाल्व की जगह उपलब्धता के अनुसार मृत अंगदाता से प्राप्त जैविक वाल्व (होमोग्राफ्ट) या जैविक कृत्रिम (बायोप्रोस्थेटिक) वाल्व प्रत्यारोपित किया जाता है। यह तकनीक बच्चों में लंबे समय तक बेहतर परिणाम देती है।
इसी तकनीक समेत एओर्टिक रूट एनलार्जमेंट और एओर्टिक रूट रिप्लेसमेंट जैसी जटिल सर्जरी प्रक्रियाओं पर संजय गांधी पीजीआई के कार्डियोवैस्कुलर एवं थोरेसिक सर्जरी (सीवीटीएस) विभाग के 39वें स्थापना दिवस पर आयोजित वैज्ञानिक संगोष्ठी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने दी । विभागाध्यक्ष प्रो. एस.के. अग्रवाल और प्रो शांतनु पांडे
ने कहा कि इन जटिल सर्जरी के लिए हृदय की संरचना की गहरी समझ और उच्च स्तरीय सर्जिकल कौशल आवश्यक है। प्रशिक्षण कार्यक्रम आधुनिक तकनीकों को मरीजों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण हैं।
डॉ. अतनु साहा (नारायणा हृदयालय, कोलकाता) और डॉ. मोहम्मद इदरीस (सिम्स हॉस्पिटल, चेन्नई) ने कार्यशाला में इन प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया। विशेषज्ञों ने मिनिमली इनवेसिव वाल्व सर्जरी, ट्रांसकैथेटर वाल्व तकनीकों तथा बच्चों में वाल्व रिपेयर पर भी चर्चा की। बताया गया कि छोटे चीरे वाली सर्जरी और कैथेटर आधारित तकनीकों से मरीज जल्दी स्वस्थ होते हैं, जबकि बच्चों में जहां संभव हो, वाल्व बदलने के बजाय उसकी मरम्मत को प्राथमिकता दी जाती है।
प्रो. प्रसन्ना सिम्हा ने प्रो. पी.के. घोष स्मृति व्याख्यान दिया। डॉ. राकेश नायक ने मिनिमली इनवेसिव माइट्रल वाल्व सर्जरी, डॉ. बुद्धादित्य चक्रवर्ती ने असफल टीएवीआई के बाद वाल्व प्रत्यारोपण, डॉ. प्रदीप नारायण ने टीएवीआर के जोखिम तथा डॉ. रविंदर सिंह राव ने ट्रांसकैथेटर माइट्रल वाल्व उपचार पर व्याख्यान दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एम्स नई दिल्ली के सीवीटीएस विभागाध्यक्ष एवं आईएसीटीएस के अध्यक्ष प्रो. वी. देवगुरु रहे। समारोह में विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. पी.के. मित्तल को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड तथा विभाग के पूर्व छात्र डॉ. ललित कपूर को आउटस्टैंडिंग एलुमनाई अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

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