गुरुवार, 6 अगस्त 2026

सिजेरियन के तुरंत बाद गर्भवती महिला के दिल के दो वाल्व बदले, मां और नवजात की बची जान





सिजेरियन के तुरंत बाद गर्भवती महिला के दिल के दो वाल्व बदले, मां और नवजात की बची जान


पीजीआई में उत्तर प्रदेश का पहला और देश का चौथा ऐसा सफल ऑपरेशन, कई विभागों के डॉक्टरों ने मिलकर किया इलाज


लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई के डाक्टरों ने एक 26 वर्षीय गर्भवती महिला और उसकी नवजात बच्ची की जान बचाकर चिकित्सा क्षेत्र में नई उपलब्धि हासिल की है।  उत्तर प्रदेश में पहली बार सिजेरियन ऑपरेशन के तुरंत बाद महिला के दिल के दो खराब वाल्व बदलने की जटिल सर्जरी की गई । संस्थान के मुताबिक, यह देश का चौथा ऐसा मामला है।

महिला पहली बार मां बनने वाली थी। गर्भावस्था के 32वें सप्ताह में उसे सांस फूलने और दिल की धड़कन तेज होने की शिकायत पर लाया गया। जांच में पता चला कि उसके दिल के एओर्टिक और माइट्रल वाल्व गंभीर रूप से खराब हैं।  सबसे बड़ी चुनौती मां और गर्भ में पल रहे बच्चे, दोनों की जान बचाना था।   गर्भावस्था आगे बढ़ती या सामान्य प्रसव कराया जाता तो दोनों की जान को खतरा हो सकता था। मैटरनल एंड रिप्रोडक्टिव हेल्थ, कार्डियोलॉजी, सीवीटीएस, कार्डियक एनेस्थिसियोलॉजी और नियोनेटोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने संयुक्त योजना बनाई। 21 जुलाई को पहले सिजेरियन कर 2.1 किलोग्राम वजन की स्वस्थ बच्ची का जन्म कराया गया। इसके तुरंत बाद ओपन हार्ट सर्जरी कर महिला के दिल के दोनों खराब वाल्व बदल दिए गए।

मैटरनल एंड रिप्रोडक्टिव हेल्थ विभाग की प्रो. नीता सिंह ने बताया कि यह बेहद जोखिम भरा मामला था। मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी विभागों के विशेषज्ञों ने पहले से विस्तृत योजना बनाई। सही समय पर सिजेरियन और तुरंत बाद हार्ट सर्जरी करने से मां और नवजात, दोनों को सुरक्षित बचाया जा सका। सिजेरियन ऑपरेशन हुआ था इसलिए पेट के जरिए और  गर्भाशय के जरिए रक्तस्राव की आशंका रहती है क्योंकि खून पतला करने की दवाएं चलाई जाती हैं रक्तस्राव को रोकने के लिए विशेष तकनीक अपनाई गईं। 

सर्जरी के बाद महिला की हालत तेजी से सुधरी। कुछ ही घंटों में उसे वेंटिलेटर से हटा दिया गया और आईसीयू में उसे खून चढ़ाने की जरूरत भी नहीं पड़ी। संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर.के. धीमन ने पूरी टीम को इस सफलता के लिए बधाई दी।

बॉक्स : ऑपरेशन करने वाली विशेषज्ञ टीम

मैटरनल एंड रिप्रोडक्टिव हेल्थ (एमआरएच)

प्रो. नीता सिंह, डा. मोनाली वी. खेरगाडे,  प्रो. मंदाकिनी प्रधान।

सीनियर रेजिडेंट : डा. अपराजिता, डा. प्रज्ञा और डा. साहिती।

कार्डियोवैस्कुलर एवं थोरेसिक सर्जरी (सीवीटीएस)

डा. एम. मुंशी, प्रो. शांतनु पांडे, प्रो. एस.के. अग्रवाल।

सीनियर रेजिडेंट : डा. सौरभ त्रिपाठी और डा. विवेक।

कार्डियक एनेस्थिसियोलॉजी

डा. अमित रस्तोगी, डा. लाराब शेख।

सीनियर रेजिडेंट : डा. श्रद्धा गांगेले, डा. सरबानी घोष और डा. शिवेंद्र प्रताप सिंह।

कार्डियोलॉजी

प्रो. सत्येंद्र तिवारी, प्रो. रूपाली खन्ना।

सीनियर रेजिडेंट : डा. हर्षित खरे।

सहयोग: नियोनेटोलॉजी विभाग, नर्सिंग स्टाफ, परफ्यूजनिस्ट और अन्य सपोर्ट स्टाफ ने भी पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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