मिटाएं अंधविश्वास, करें अंगदान;
भारतीय अंगदान दिवस पर हजरतगंज चौराहे से निकली वॉकाथॉन,
लखनऊ
मिटाएं अंधविश्वास, करें अंगदान, जिंदगी के बाद भी, जीवन का विस्तार और अंगदान–जीवनदान, जीवनदान–महादान जैसे संदेशों के साथ भारतीय अंगदान दिवस के अवसर पर रविवार सुबह हजरतगंज चौराहे से अंगदान जागरूकता वॉकाथॉन निकाली गई। उत्तर प्रदेश राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (सोटो-यूपी) और संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के अस्पताल प्रशासन विभाग की ओर से आयोजित वॉकाथॉन हजरतगंज चौराहे से शुरू होकर एलन सॉली स्टोर तक गई और वापस हजरतगंज चौराहे पर संपन्न हुई। करीब 1.6 किलोमीटर लंबी इस वॉकाथॉन में 300 से अधिक लोगों ने भाग लेकर अंगदान के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। वॉकाथॉन को पीजीआइ के कार्यवाहक निदेशक प्रो. शालीन कुमार, चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के विशिष्ट सचिव धीरेंद्र सिंह सचान, चिकित्सा शिक्षा विभाग की अपर निदेशक नीलम , नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. नारायण प्रसाद तथा सोटो-यूपी के संयुक्त निदेशक एवं अस्पताल प्रशासन विभागाध्यक्ष प्रो. आर. हर्षवर्धन ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान प्रतिभागियों ने अंगदान के प्रतीक हरे रिबन की मानव शृंखला बनाई। कार्यक्रम में अंगदान संदेश वाली टी-शर्ट और कैप वितरित की गईं तथा सेल्फी बूथ भी आकर्षण का केंद्र रहा। विशेषज्ञों ने बताया कि वर्ष 2024 में देश में 18,911 अंग प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किए गए, जिनमें 3,403 प्रत्यारोपण मृत अंगदाताओं से प्राप्त अंगों द्वारा हुए। इसके साथ ही भारत कुल अंग प्रत्यारोपण की संख्या के आधार पर विश्व में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। वहीं, नोट्टो पोर्टल पर 4.5 लाख से अधिक नागरिक अंगदान का संकल्प ले चुके हैं। वॉकाथॉन में आलम्बन ट्रस्ट एसोसिएट्स, स्पर्श, स्पष्ट सोच फाउंडेशन, लायंस क्लब, इनर व्हील, स्टेट हेल्थ सिस्टम्स रिसोर्स सेंटर (एसएचएसआरसी), चिकित्सा छात्रों, स्वास्थ्यकर्मियों और आम नागरिकों ने भाग लिया। आयोजन को सफल बनाने में डा. क्रिस अग्रवाल, डा. अभिषेक सिंह, डा. अक्षिता बंसल, डा. दीक्षा दुबे, डा. एकता यादव, डा. अर्पिता तिवारी, नीलिमा दीक्षित और भोलेश्वर पाठक की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके अलावा कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष धर्मेश कुमार, महामंत्री सीमा शुक्ला , मुख्य सेनेटरी इंस्पेक्टर ओम प्रकाश सिंह सहित संस्थान के अनेक अधिकारी और कर्मचारी भी वॉकाथॉन में शामिल हुए। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने अंगदान–जीवन संजीवनी अभियान को जन-जन तक पहुंचाने तथा मृत्यु के बाद अंगदान का संकल्प लेने का आह्वान किया।
बॉक्स-1
ब्रेन डेड मरीजों के सिर्फ 10 प्रतिशत अंगदान से 40 से 50 हजार लोगों की बच सकती है जान : प्रो. नारायण प्रसाद
देश में करीब दो लाख मरीज अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यदि ब्रेन स्टेम डेथ के मामलों में केवल 10 प्रतिशत परिजन भी अंगदान के लिए सहमत हो जाएं तो उत्तर प्रदेश के 40 से 50 हजार मरीजों को नया जीवन मिल सकता है। उन्होंने कहा कि ब्रेन स्टेम डेथ के बाद व्यक्ति दोबारा जीवित नहीं हो सकता, लेकिन उसके अंग कई लोगों की जिंदगी बचा सकते हैं।
बॉक्स-2
हर छह मिनट में एक मरीज गंवा रहा जान, अंगदान ही सबसे बड़ा समाधान : प्रो. आर. हर्षवर्धन
भारत में हर वर्ष करीब पांच लाख लोगों की मौत अंग विफल होने से होती है। उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में ब्रेन स्टेम डेथ के हजारों मामलों में यदि समय पर अंगदान हो जाए तो करीब 32 हजार किडनी और 16 हजार लीवर प्रत्यारोपण के लिए उपलब्ध हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि अंगदान मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व का सबसे बड़ा प्रतीक है तथा लोगों को अपने परिवार के साथ अंगदान की इच्छा साझा करनी चाहिए।
बॉक्स 3
एक व्यक्ति के अंगदान से आठ लोगों को मिल सकता है जीवन एक व्यक्ति के अंगदान से आठ लोगों को नया जीवन मिल सकता है, जबकि ऊतक दान से 75 लोगों के जीवन में उल्लेखनीय सुधार संभव है। इसके बावजूद प्रत्यारोपण के लिए उपलब्ध अंगों की संख्या आवश्यकता की तुलना में काफी कम है। भारत में हर वर्ष लगभग दो लाख मरीज लीवर फेलियर या लीवर कैंसर के कारण जान गंवाते हैं, जबकि केवल करीब 1,500 लीवर प्रत्यारोपण हो पाते हैं। इसी प्रकार 25 से 30 हजार हृदय प्रत्यारोपण की आवश्यकता के मुकाबले हर वर्ष केवल 10 से 15 हृदय प्रत्यारोपण ही किए जा रहा है।




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