पहले ऑपरेशन में नहीं निकली 6.5 किलो की गांठ, एसजीपीजीआई में सफल सर्जरी
लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के विशेषज्ञों ने 48 वर्षीय पोस्टमेनोपॉज़ल महिला के पेट से 6.5 किलोग्राम का विशाल एब्डोमिनो-पेल्विक मास सफलतापूर्वक निकाल लिया। एक माह के भीतर संस्थान में इस तरह की यह लगातार तीसरी सफल सर्जरी है। करीब दो वर्ष पहले दूसरे केंद्र पर महिला की सर्जरी का एक बार प्रयास किया गया था, लेकिन पेट खोलने के बाद भी मास को निकालना संभव नहीं हो सका था।
विशाल मास के कारण महिला को चलने, बैठने और सांस लेने में गंभीर कठिनाई हो रही थी। इसके दबाव से उनकी दाहिनी किडनी भी प्रभावित हो रही थी। विस्तृत जांच और सावधानीपूर्वक सर्जिकल प्लानिंग के बाद एसजीपीजीआई में ऑपरेशन किया गया। सर्जरी के दौरान ठोस और सिस्टिक दोनों हिस्सों से बना 6.5 किलोग्राम का विशाल मास मिला। यह गर्भाशय और दोनों अंडाशयों को व्यापक रूप से घेरे हुए था। इन संरचनाओं की पहचान कर उन्हें सुरक्षित रखना बेहद चुनौतीपूर्ण था।
विशेषज्ञ टीम ने अत्यंत सावधानी और सूक्ष्म डिसेक्शन के जरिए गर्भाशय और दोनों अंडाशयों की पहचान की और उन्हें सुरक्षित रखते हुए मास को सफलतापूर्वक निकाल दिया। मरीज ने ऑपरेशन को अच्छी तरह सहन किया और उनका स्वास्थ्य लाभ संतोषजनक रहा।
सर्जरी का नेतृत्व डॉ. अंजू रानी ने किया। सर्जिकल टीम में डॉ. निधि सिंह, डॉ. सरिता, डॉ. शिखा, डॉ. शिवानी, डॉ. रितेश एवं डॉ. निर्मायंक शामिल रहे। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. अरुणा भारती एवं डॉ. निधि रहीं। नर्सिंग एवं सपोर्ट स्टाफ में सिस्टर ज्योति, दिव्या, मोनिका, वंदना एवं वीरभान शामिल रहे।
यह सफलता जटिल एवं विशाल एब्डोमिनो-पेल्विक मास के उपचार में एसजीपीजीआई की विशेषज्ञता और टीमवर्क को दर्शाती है।

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