हेड एवं नेक कैंसर की जांच अब होगी और सटीक, एसजीपीजीआई में अत्याधुनिक एंडोस्कोपी लैब शुरू
विश्व हेड एवं नेक कैंसर दिवस पर उद्घाटन, हर माह 500 से 600 मरीजों को मिलेगा लाभ
विश्व हेड एवं नेक कैंसर दिवस के अवसर पर शनिवार को संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के हेड एवं नेक सर्जरी विभाग में कैंसर मरीजों के लिए प्रदेश के किसी सरकारी चिकित्सा संस्थान की पहली अत्याधुनिक ओपीडी एंडोस्कोपी प्रयोगशाला का उद्घाटन किया गया। संस्थान के डीन प्रो. शालीन कुमार, सीएमएस प्रो. देवेंद्र गुप्ता तथा हेड एवं नेक सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. अमित केशरी ने प्रयोगशाला का शुभारंभ किया।
प्रो. अमित केशरी ने बताया कि प्रयोगशाला में स्ट्रोबोस्कोप, नैरो बैंड इमेजिंग (एनबीआई) और फ्लेक्सिबल लैरिंगोफैरिंगोस्कोपी जैसी आधुनिक तकनीकें उपलब्ध हैं। इनकी मदद से गले, स्वरयंत्र और हेड एवं नेक कैंसर की शुरुआती अवस्था में ही सटीक पहचान हो सकेगी। ओपीडी में ही आधुनिक जांच, आवश्यक एंडोस्कोपिक प्रक्रियाएं और उपचार के बाद नियमित निगरानी की सुविधा मिलने से मरीजों को तेजी से बेहतर इलाज उपलब्ध होगा। उन्होंने बताया कि विभाग की ओपीडी में हर माह 500 से 600 मरीज आते हैं, जबकि प्रतिमाह 35 मेजर और 10 माइनर सर्जरी की जाती हैं।
संस्थान के निदेशक प्रो. आर.के. धीमन ने कहा कि हेड एवं नेक कैंसर में समय पर जांच और बहुविषयक उपचार से बेहतर परिणाम मिलते हैं। कार्यक्रम में प्रो. इंदु शुक्ला ने समय पर जांच और नियमित फॉलोअप के महत्व पर जोर दिया। वहीं प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रो. अंकुर भटनागर ने कैंसर सर्जरी के बाद पुनर्निर्माण (रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी) की भूमिका पर जानकारी दी।
'स्पंदन : कैंसर, उपचार और उससे आगे' विषय पर आयोजित कार्यक्रम में कैंसर को मात दे चुके मरीजों को गुलाब का फूल देकर सम्मानित किया गया। 'वॉयसेज़ ऑफ होप' सत्र में कैंसर विजेताओं ने अपने अनुभव साझा किए। हेड एवं नेक सर्जरी, रेडियोथेरेपी, प्लास्टिक सर्जरी और मनोरोग विभाग के विशेषज्ञों ने समग्र उपचार एवं पुनर्वास पर जानकारी दी। डाइटिशियन ने उपचार के दौरान संतुलित आहार की आवश्यकता बताई और अंत में मरीजों के साथ प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया।


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें