गुरुवार, 23 जुलाई 2026

सौ रूपए में पता लगता है पैराथायरायड हारमोन असंतुलल का पता

 

पैराथायरॉयड जागरूकता माह: समय पर जांच से हड्डियों और किडनी को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है


सौ रूपए में पता लगता है पैराथायरायड हारमोन असंतुलल का पता



पैराथायरॉयड शरीर की चार छोटी ग्रंथियां होती हैं, जो पैराथायरॉयड हार्मोन (पीटीएच) बनाकर शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस का संतुलन बनाए रखती हैं। इन ग्रंथियों में गड़बड़ी होने पर हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, बार-बार किडनी में पथरी बन सकती है, मांसपेशियों में दर्द, अत्यधिक थकान, याददाश्त में कमी और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं। यह बीमारी लगभग 1 से 7 प्रति 1,000 वयस्कों में पाई जाती है। स 90 फीसदी मरीजों की पहचान तब होती है, जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। विश्व पैराथायरायड जागरूकता माह के मौके पर संजय गांधी पीजीआई के इंडो सर्जरी विभाग के  प्रो. ज्ञान चंद के मुताबिक किसी व्यक्ति को लंबे समय तक हड्डियों में दर्द, बार-बार फ्रैक्चर, बार-बार किडनी स्टोन, लगातार कमजोरी है तो   रक्त में कैल्शियम की जांच करानी चाहिए जो सौ रूपए में कही भी हो ताजी है।  स्तर बढ़ा या घटा है तो ले तो पैराथायरॉयड हरमोन की जांच अवश्य करानी चाहिए। समय पर पहचान होने पर अधिकांश मरीजों का सफल इलाज दवा या आवश्यकता पड़ने पर सर्जरी से किया जा सकता है।


 


एंडोक्राइन सर्जरी विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर प्रो. एम. सब्बारत्नम ने कहा कि समय पर उपचार से हड्डियों, किडनी और हृदय पर पड़ने वाले गंभीर दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है। आधुनिक मिनिमली इनवेसिव पैराथायरॉयड सर्जरी के माध्यम से अधिकांश मरीज तेजी से स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौट सकते हैं।


 


विशेषज्ञों ने लोगों से संतुलित आहार, पर्याप्त विटामिन-डी, नियमित स्वास्थ्य जांच तथा चिकित्सकीय सलाह के अनुसार कैल्शियम की निगरानी कराने की अपील की। उनका कहना है कि पैराथायरॉयड जागरूकता माह का उद्देश्य लोगों को इस कम चर्चित लेकिन गंभीर बीमारी के लक्षणों, जांच और उपचार के बारे में जागरूक बनाना है, ताकि समय पर इलाज से जटिलताओं को रोका जा सके।




कितना होना चाहिए कैल्शियम





 


 रक्त में कुल कैल्शियम


 


8.5 से 10.5 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर होना चाहिए। यदि कुल कैल्शियम 10.5  से अधिक हो, तो इसे हाइपरकैल्सीमिया माना जाता है और ऐसे मामलों में पैराथायरॉयड हार्मोन  सहित अन्य जांच की सलाह दी जा सकती है। कम है तो हाइपो कैल्सीमिय  की परेशानी हो सकती है। 


 


आयनाइज्ड कैल्शियम :


 


4.5–5.3 एमजी प्रति डेली  के बीच होना चाहिए

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