छह साल की बच्ची की रोबोटिक थायरॉयड सर्जरी, एसजीपीजीआई ने रचा इतिहास
देश में पहली बार इतनी कम उम्र की बच्ची का रोबोटिक ऑपरेशन, गर्दन पर नहीं रहेगा निशान, दोबारा बीमारी होने की संभावना भी बेहद कम
भारत में पहली बार छह वर्षीय बच्ची की सफल रोबोटिक थायरॉयड सर्जरी।
दा विंची Xi रोबोटिक सिस्टम से किया गया ऑपरेशन।
गर्दन पर नहीं रहेगा कोई निशान, रिकवरी भी होगी तेज।
ऑपरेशन वाली तरफ बीमारी दोबारा होने की संभावना लगभग नगण्य।
करीब ₹95 हजार में हुआ ऑपरेशन, वयस्कों में इसी सर्जरी पर सामान्यतः ₹3 से ₹4 लाख तक खर्च।
लखनऊ।
संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के एंडोक्राइन एवं ब्रेस्ट सर्जरी विभाग ने छह वर्ष की बच्ची की सफल रोबोटिक थायरॉयड सर्जरी कर चिकित्सा क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। संस्थान के अनुसार भारत में पहली बार इतनी कम उम्र के बच्चे के थायरॉयड ट्यूमर का सफल ऑपरेशन दा विंची Xi रोबोटिक सिस्टम की मदद से किया गया है। विश्व स्तर पर इससे कम उम्र की केवल दक्षिण कोरिया की पांच वर्षीय बच्ची की रोबोटिक थायरॉयड सर्जरी का रिकॉर्ड दर्ज है।
बच्ची के थायरॉयड में गांठ थी। सामान्य सर्जरी में गर्दन पर चीरा लगाना पड़ता है, लेकिन इस बार बगल (ट्रांस-एक्सिलरी) के रास्ते रोबोटिक तकनीक से ट्यूमर निकाला गया। इससे गर्दन पर कोई निशान नहीं रहेगा। रोबोटिक तकनीक से सर्जन को शरीर के अंदर का हिस्सा अधिक स्पष्ट दिखाई देता है, जिससे ऑपरेशन अधिक सटीक और सुरक्षित ढंग से किया जा सका। बच्ची तेजी से स्वस्थ हो रही है।
एंडोक्राइन एवं ब्रेस्ट सर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) ज्ञान चंद ने बताया कि छह वर्ष की बच्ची में इस तरह की सर्जरी करना चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि छोटे बच्चों में विशेष योजना और तकनीकी बदलावों की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि रोबोटिक सर्जरी में स्वर को नियंत्रित करने वाली नसों और पैराथायरॉयड ग्रंथियों को सुरक्षित रखने की संभावना अधिक रहती है। साथ ही जिस तरफ ऑपरेशन किया गया है, उस तरफ भविष्य में बीमारी दोबारा होने की संभावना लगभग नगण्य रहती है।
उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन पर लगभग ₹95 हजार का खर्च आया, जबकि वयस्क मरीजों में इसी तरह की रोबोटिक थायरॉयड सर्जरी पर सामान्यतः ₹3 से ₹4 लाख तक खर्च आता है। दा विंची Xi रोबोटिक सिस्टम एसजीपीजीआई के अलावा डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (आरएमएल) और किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में भी उपलब्ध है, लेकिन इतनी कम उम्र के बच्चे में इस तकनीक का सफल उपयोग पहली बार हुआ है।
इस सर्जरी का नेतृत्व प्रो. (डॉ.) ज्ञान चंद ने किया। टीम में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रिनेल मैस्करेनहास और डॉ. प्राची कृष्णात्रेय, सीनियर रेजिडेंट डॉ. मिथलेश वांचू एवं डॉ. अजरा तस्नीम शामिल रहे। एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. सुजीत गौतम ने किया। नर्सिंग टीम के मनोज, वंदना, लिजी, नीलम तथा ऑपरेशन थिएटर की पूरी टीम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो. (डॉ.) आर. के. धीमन तथा एंडोक्राइन एवं ब्रेस्ट सर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) गौरव अग्रवाल ने पूरी टीम को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता देश में उन्नत रोबोटिक एवं बाल शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में बढ़ती विशेषज्ञता का प्रमाण है और भविष्य में कम उम्र के बच्चों के इलाज के नए रास्ते खोलेगी।



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