मंगलवार, 14 जुलाई 2026

पीजीआई में दीक्षा समारोह मेधा को मिला सम्मान 279 को मिली डिग्री

 










पीजीआई के 30वें दीक्षांत समारोह में 279 विद्यार्थियों को मिली उपाधि

प्रो. नारायण प्रसाद को मिला गवर्नर मेडल फॉर बेस्ट टीचर अवॉर्ड


संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीआई) के 30वें दीक्षांत समारोह में सोमवार को 279 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कीं। इनमें 43 एमडी/एमएस, 72 डीएम/एमसीएच, 48 पीडीसीसी, 50 बीएससी नर्सिंग, 30 बीएससी क्रिटिकल केयर एंड मेडिकल टेक्नोलॉजी, 15 एमएससी क्रिटिकल केयर एंड मेडिकल टेक्नोलॉजी, सात पीएचडी, छह पीडीएएफ और छह एमएचए शामिल रहे। समारोह में नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. नारायण प्रसाद को गवर्नर मेडल फॉर बेस्ट टीचर अवॉर्ड सहित 12 शिक्षकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह शामिल नहीं हो सके। समारोह में  में मुख्य रूप से कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष धर्मेश कुमार, महामंत्री सीमा शुक्ला सहित तमाम लोग शामिल हुए। इस मौके पर चिकित्सा अधीक्षक प्रो राजेश हर्षवर्धन की पुस्तक का विमोचन हुआ। 

दो सदस्यीय परिवारों को भी मिले आयुष्मान योजना का लाभ

दीक्षांत संबोधन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि आयुष्मान योजना में छह सदस्यीय परिवारों के कार्ड आसानी से बन जाते हैं, लेकिन दो सदस्यीय परिवारों को इसका लाभ नहीं मिल पाता। सरकार को इस दिशा में नीति बनानी चाहिए ताकि पात्र दो सदस्यीय परिवार भी योजना से वंचित न रहें। उन्होंने बताया कि कई जिलाधिकारियों से बात कर ऐसे परिवारों के आयुष्मान कार्ड बनवाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि 300 बच्चों की हार्ट सर्जरी होने की जानकारी दी गई है, लेकिन यह भी आकलन होना चाहिए कि ऑपरेशन के बाद कितने बच्चे लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। शोध और उपचार के परिणामों का नियमित मूल्यांकन होना चाहिए, तभी वास्तविक सुधार संभव होगा।

राज्यपाल ने कहा कि कैंसर की 70 दवाओं पर सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) समाप्त की गई है। अस्पतालों में यह भी प्रदर्शित किया जाना चाहिए कि इनमें से कितनी दवाएं मरीजों को उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि संस्थान ने आईसीएमआर को 100 शोध परियोजनाएं भेजी हैं। सितंबर-अक्टूबर में उनकी समीक्षा की जाएगी कि कितना बजट मिला, कितना शोध हुआ और उसका समाज को क्या लाभ मिला।

उन्होंने जन भवन सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि पीजीआई के कई छात्रावासों में मेस, वाई-फाई और वॉशिंग मशीन जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। पुस्तकालय में लगे 65 कंप्यूटरों की इंटरनेट गति भी धीमी है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है। परिसर के कुछ हिस्सों में गंदगी पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। साथ ही गांव-गांव स्वास्थ्य शिविर लगाकर 30 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं और किशोरियों की नियमित स्वास्थ्य जांच कराने पर जोर दिया।

बॉक्स : बाहर से खाना न आए

राज्यपाल ने कहा कि कुछ छात्रावासों में बाहर से भोजन मंगाया जाता है। ऐसी शिकायतें मिली हैं कि इसके माध्यम से नशीले पदार्थ भी पहुंच सकते हैं। इसलिए छात्रावासों में भोजन की व्यवस्था परिसर के भीतर ही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अक्षय पात्र जैसी संस्थाएं इस दिशा में अच्छा विकल्प हो सकती हैं।

बॉक्स : एक वर्ष में नंबर-1 बनने का लक्ष्य

राज्यपाल ने कहा कि एसजीपीआई देश के शीर्ष तीन चिकित्सा संस्थानों में शामिल है। अब अगले एक वर्ष में देश का नंबर-1 संस्थान बनने का लक्ष्य निर्धारित कर उस दिशा में कार्य करना चाहिए।

कोई भी मरीज बिना इलाज वापस न जाए

उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि कोई भी मरीज बिना इलाज वापस नहीं जाना चाहिए। यदि तत्काल बेड उपलब्ध न हो तो मरीज को एंबुलेंस में भी आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाए।

शोभायात्रा के दौरान रुकवाया राष्ट्रगीत

दीक्षांत समारोह की शोभायात्रा के दौरान राष्ट्रगीत शुरू हो गया। इस पर मंच पर मौजूद राज्यपाल ने संकेत देकर राष्ट्रगान रुकवाया और निर्देश दिया कि पहले शोभायात्रा पूरी होने दी जाए, उसके बाद राष्ट्रगान प्रस्तुत किया जाए।

अक्टूबर तक शुरू होगा एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर

संस्थान के निदेशक प्रो. आर.के. धीमन ने बताया कि अक्टूबर तक एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर का पहला चरण शुरू हो जाएगा। इसमें 12 विभागों की सेवाएं और 293 बेड उपलब्ध होंगे। इसके लिए संसाधन जुटाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि क्वाटरनरी केयर परियोजना (पीजीआई 2.0) पर भी कार्य शुरू हो चुका है। लगभग पांच हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना में 600 बेड और 11 विभाग होंगे। अगले पांच वर्षों में इसे पूरा करने का लक्ष्य है तथा इसमें पेपरलेस व्यवस्था लागू की जाएगी। समारोह में महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. नेहा शर्मा, डीन प्रो. शालीन कुमार, रजिस्ट्रार कर्नल वरुण बाजपेयी सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।

सम्मानित शिक्षक, शोधकर्ता, चिकित्सक एवं विद्यार्थी

पुरस्कार

सम्मानित

गवर्नर मेडल फॉर बेस्ट टीचर

प्रो. नारायण प्रसाद (नेफ्रोलॉजी)

प्रो. एस.आर. नायक अवॉर्ड (आउटस्टैंडिंग रिसर्च इन्वेस्टिगेटर)

डॉ. चिन्मय साहू (माइक्रोबायोलॉजी)

प्रो. एस.आर. नायक अवॉर्ड (आउटस्टैंडिंग रिसर्च इन्वेस्टिगेटर)

डॉ. आलोक कुमार (मॉलिक्यूलर मेडिसिन एवं बायोटेक्नोलॉजी)

प्रो. एस.एस. अग्रवाल अवॉर्ड (रिसर्च एक्सीलेंस)

डॉ. अभिषेक शुक्ला (न्यूरोसर्जरी)

प्रो. एस.एस. अग्रवाल अवॉर्ड (रिसर्च एक्सीलेंस)

खुशी शुक्ला (पीएचडी शोधार्थी, मॉलिक्यूलर मेडिसिन एवं बायोटेक्नोलॉजी)

प्रो. आर.के. शर्मा अवॉर्ड (सर्वश्रेष्ठ डीएम)

डॉ. आदर्शा (मेडिकल जेनेटिक्स)

प्रो. आर.के. शर्मा अवॉर्ड (सर्वश्रेष्ठ एमसीएच)

डॉ. सम्प्रति दरिया (एंडोक्राइन सर्जरी)

पद्मश्री डॉ. एस.एस. सरकार गोल्ड मेडल (एमडी रेडियोडायग्नोसिस)

डॉ. महीम नाज़

सर्वाधिक इंट्राम्यूरल अनुदान

डॉ. एबल लॉरेंस (क्लीनिकल इम्यूनोलॉजी एवं रूमेटोलॉजी)

सर्वाधिक एक्स्ट्राम्यूरल ग्रांट

डॉ. सी.पी. चतुर्वेदी (हीमैटोलॉजी, एससीआरसी)

सर्वाधिक पेटेंट

डॉ. तन्मय घटक (इमरजेंसी मेडिसिन)

करुणाश्री गोल्ड मेडल (एमएससी नर्सिंग)

ललिता यादव

आयुष्य ज्योति गोल्ड मेडल (बीएससी नर्सिंग)

अमृता





एवार्ड पाने वाले पांच लोगों से उनके शोध पर बात चीत

  

देश को दिया  94 गुर्दा रोग विशेषज्ञ - प्रो. नारायण प्रसाद- गवर्नर  मेडल फार बेस्ट टीचर


नेफ्रोलाजी विभाग के प्रमुख  प्रो. नारायण प्रसाद को चिकित्सा शिक्षा, शोध और किडनी प्रत्यारोपण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दिया।  38 वर्षों के चिकित्सा अनुभव है। 370 शोध प्रकाशन प्रकाशित हो चुके हैं।  94 डीएम (गुर्दा रोग विशेषज्ञ) और 5 पीएचडी शोधार्थियों ने अपनी पढ़ाई पूरी की है।  उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों के 15 से अधिक संस्थानों में किडनी प्रत्यारोपण कार्यक्रम शुरू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश के उन सरकारी संस्थानों में भी किडनी प्रत्यारोपण सेवाएं शुरू कराने की योजना पर काम कर रहे हैं, जहां अभी यह सुविधा उपलब्ध नहीं है।




तेज़ ब्लड टेस्ट से गंभीर इन्फेक्शन में जान बचाने की उम्मीद  प्रो. चिन्मय साहू- प्रो.एसआर नायक एवार्ड फार आउट स्टैंडिग रिसर्च


गंभीर रक्त संक्रमण (सेप्सिस) के मरीजों में सही एंटीबायोटिक शुरू करने में होने वाली देरी अब काफी कम हो सकती है। एसजीपीजीआई, लखनऊ के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के शोधकर्ताओं ने 30 मिनट में ब्लड सैंपल से बैक्टीरिया अलग करने की नई तकनीक विकसित की है। इसके बाद माल्डी टॉप मशीन से जर्म की पहचान कर डॉक्टरों को करीब 24 घंटे पहले रिपोर्ट मिल जाती है। 160 नमूनों पर परीक्षण में बैक्टीरिया की पहचान 96% और एंटीबायोटिक परिणामों में 99.8% सटीकता मिली। यह तकनीक प्रति सैंपल लगभग ₹46 की बचत भी करती है, जिससे मरीजों को समय पर सही इलाज मिलने और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस कम करने में मदद मिल सकती है। 175 से अधिक शोध पत्र है। 



 ट्यूमर हटाने के बाद रक्त वाहिकाओं की सेहत में सुधार: डॉ. संप्रति डारिया- प्रो. आरके शर्मा  बेस्ट एमसीएच स्टूडेंट

 

हार्मोन बनाने वाले दुर्लभ ट्यूमर फिओक्रोमोसाइटोमा और पैरागैंग्लियोमा पर डॉ. संप्रति डारिया के शोध में पहली बार फ्लो-मीडिएटेड डाइलेशन (एफएमडी) जैसी आधुनिक, बिना ऑपरेशन वाली जांच तकनीक से रक्त वाहिकाओं की कार्यक्षमता का आकलन किया गया। ट्यूमर हटाने के बाद रक्त वाहिकाओं की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ, जिससे भविष्य में हृदय संबंधी जटिलताओं का खतरा कम हो सकता है।यह शोध मई 2025 में अमेरिका के मिलवॉकी (विस्कॉन्सिन) में आयोजित अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ एंडोक्राइन सर्जन्स सम्मेलन में पोडियम प्रस्तुति के रूप में प्रस्तुत किया। ऐसा करने वाली वह पहली भारतीय छात्रा हैं। उन्हें इस प्रस्तुति के लिए भारत सरकार की एएनआरएफ और आईसीएमआर की ओर से ट्रैवल ग्रांट भी मिला


मरीजों की जान बचाने और इलाज को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद करेंगे दो नए पेटेंट- प्रो. तन्मय घटक आधिकतम पेटेंट एवार्ड


दो नए चिकित्सा उपकरणों के डिजाइन पर पेटेंट मिला हैं। इन उपकरणों से इलाज के दौरान मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी और जानलेवा जटिलताओं का खतरा कम होगा। पहला उपकरण 'गाइडवायर ट्रैप' है, जो गाइडवायर के गलती से शरीर के अंदर पूरी तरह चले जाने जैसी दुर्लभ लेकिन गंभीर दुर्घटना को रोकता है। दूसरा 'मार्क्ड इंट्रोड्यूसर नीडल' है, जिस पर बने विशेष निशान डॉक्टरों को सुई सही गहराई तक डालने में मदद करते हैं। इससे आसपास की नसों और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचने का जोखिम घटता है। 



हिम्मत नहीं हारी मिली सफलता- अमृता  'आयुषा ज्योति गोल्ड मेडल'


अंबेडकर नगर की अमृता ने नीट में प्रवेश के लिए  प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर  हार मानने के बजाय पीजीआई के कॉलेज ऑफ नर्सिंग में बीएससी नर्सिंग के प्रवेश परीक्षा दिया । सफलता मली  अपनी मेहनत और उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के दम पर अब उन्हें शैक्षणिक सत्र 2022–2026 के लिए प्रतिष्ठित 'आयुषा ज्योति गोल्ड मेडल' से सम्मानित किया गया। अमृता ने उत्कृष्ट अंक हासिल किया है।




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