मंगलवार, 28 जुलाई 2026

100 गर्भवती महिलाओं में दो हेपेटाइटिस-बी से संक्रमित

 




विश्व हेपेटाइटिस दिवस आज :

 हर 100 गर्भवती महिलाओं में दो हेपेटाइटिस-बी से संक्रमित


 हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के संयुक्त शोध में खुलास


आज विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर वायरल हेपेटाइटिस के प्रति जागरूकता बढ़ाने, समय पर जांच और उपचार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी बीच उत्तर प्रदेश से सामने आए एक महत्वपूर्ण शोध ने गर्भवती महिलाओं में हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी संक्रमण की स्थिति स्पष्ट की है। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), संजय गांधी पीजीआई (एसजीपीजीआई), राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (एनवीएचसीपी) और अन्य संस्थानों के विशेषज्ञों के संयुक्त अध्ययन में पाया गया कि गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच संक्रमण की पहचान और मां से नवजात में बीमारी के प्रसार को रोकने में बेहद महत्वपूर्ण है।

 लखनऊ जिले की सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में प्रसवपूर्व जांच (एएनसी) के लिए आने वाली 2,005 गर्भवती महिलाओं मैं हेपेटाइटिस स्क्रीनिंग की गई तो तो देखा गया कि

अध्ययन में शामिल 2,005 गर्भवती महिलाओं में से 37 महिलाएं हेपेटाइटिस-बी (एचबीवी) से संक्रमित पाई गईं। संक्रमण दर 1.85 प्रतिशत रही। यानी लगभग हर 100 गर्भवती महिलाओं में दो महिलाएं हेपेटाइटिस-बी से संक्रमित मिलीं। शोधकर्ताओं के अनुसार यदि ऐसी महिलाओं की समय पर पहचान हो जाए और नवजात को जन्म के 24 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस-बी का टीका तथा आवश्यकता पड़ने पर हेपेटाइटिस-बी इम्युनोग्लोब्युलिन (एचबीआईजी) दिया जाए तो मां से बच्चे में संक्रमण का खतरा काफी कम किया जा सकता है

शोध में छह महिलाएं हेपेटाइटिस-सी (एचसीवी) से संक्रमित पाई गईं। संक्रमण दर 0.31 प्रतिशत रही। विशेषज्ञों का कहना है कि हेपेटाइटिस-सी का शुरुआती चरण में पता चलने पर प्रभावी इलाज संभव है, इसलिए गर्भावस्था के दौरान स्क्रीनिंग का विशेष महत्व है।

समय पर जांच और टीकाकरण सबसे प्रभावी उपाय

एसजीपीजीआई के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के प्रो. अमित गोयल ने कहा कि हेपेटाइटिस-बी और सी लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में रह सकते हैं। इसलिए समय पर जांच कराना बेहद जरूरी है। गर्भवती महिलाओं की नियमित स्क्रीनिंग से संक्रमण की जल्द पहचान होती है और उचित उपचार के साथ नवजात के समय पर टीकाकरण से मां से बच्चे में संक्रमण को काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस-बी से बचाव के लिए प्रभावी टीका उपलब्ध है, जबकि हेपेटाइटिस-सी का समय पर उपचार संभव है। जागरूकता, नियमित जांच और टीकाकरण ही इस बीमारी पर नियंत्रण की सबसे प्रभावी रणनीति है।

इन्होंने किया शोध 

 "सीरोप्रिवेलेंस एंड डिटरमिनेंट्स ऑफ हेपेटाइटिस-बी वायरस एंड हेपेटाइटिस-सी वायरस इंफेक्शन अमंग प्रेग्नेंट वुमेन इन नॉर्थ इंडिया : ए क्रॉस-सेक्शनल स्टडी" है। इसके प्रमुख लेखकों में डा. अभिषेक यादव, डा. मोनिका अग्रवाल, डा. विकासेंदु अग्रवाल, प्रो अमिता जैन, प्रो. सुमित रुंगटा, प्रो. प्रभाकर मिश्रा और प्रो. अमित गोयल सहित 13 विशेषज्ञ शामिल हैं। शोध को 

 अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल क्यूरियस ने स्वीकार किया है।


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