गुरुवार, 9 अप्रैल 2026

रोबोटिक टोटल थायरॉयडेक्टॉमी तकनीक से सफल ऑपरेशन, कम दर्द और तेज़ रिकवरी से युवक पूरी तरह स्वस्थ

 

पीजीआइ 

रोबोटिक टोटल थायरॉयडेक्टॉमी तकनीक से सफल ऑपरेशन, कम दर्द और तेज़ रिकवरी से युवक पूरी तरह स्वस्थ




जटिल थायराइड ग्रंथि की परेशानी से ग्रस्त हरदोई निवासी 25 वर्षीय युवक में जटिल रोबिटक सर्जरी कर परेशानी करने में सफलता संजय गांधी पीजीआइ के इंडोक्राइन सर्जन प्रो.ज्ञान चंद ने हासिल की है। सर्जरी के बाद  गर्दन और छाती में दबाव और सांस लेने और खाना निगलने की परेशानी छुटकारा मिल गया।

 इस जटिल सर्जरी के साथ 200 रोबोटिक एंडोक्राइन सर्जरी सफलतापूर्वक पूर्ण की हैं। प्रो. ज्ञान चंद के मुताबिक इस  25 वर्षीय युवक में पिछले 18 वर्षों से गर्दन के सामने सूजन की समस्या थी, जो धीरे-धीरे बढ़ रही थी। मरीज को हाइपोथायरायडिज्म था और वह नियमित रूप से दवा (थायरोनॉर्म 62.5 माइक्रोग्राम प्रतिदिन) ले रहा थे। इलाज के लिए आए तो  जांच के दौरान थायरॉयड ग्रंथि का व्यापक बढ़ाव पाया गया, जिसकी निचली सीमा स्पर्श से महसूस नहीं हो रही थी, जिससे रेट्रोस्टर्नल विस्तार की संभावना थी। अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन में बड़ा मल्टीनोड्यूलर गॉइटर, रेट्रोस्टर्नल विस्तार तथा लिम्फोसाइटिक थायरॉयडाइटिस की पुष्टि हुई। इस में  स्थिति आमतौर पर रोबोटिक या न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी के लिए चुनौतीपूर्ण मानी जाती है।पूर्ण प्रीऑपरेटिव मूल्यांकन के बाद मरीज का रोबोटिक टोटल थायरॉयडेक्टॉमी  ऑपरेशन के दौरान दोनों लोब बड़े पाए गए, जिसमें दाहिना लोब मेडियास्टिनम तक फैला हुआ था और इस्तमस मोटा था। रिकरेंट लैरिंजियल नर्व और पैराथायरॉयड ग्रंथियों को सुरक्षित रखा गया।निकाले गए थायरॉयड का कुल वजन 149 ग्राम था। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति पूरी तरह स्थिर रही। उसकी आवाज सामान्य रही और कैल्शियम स्तर भी सामान्य पाया गया।इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए संस्थान के निदेशक प्रो आर  के धीमन ने  टीम  को बधाई  दी है। प्रो. ज्ञान चंद ने बताया कि रोबोटिक एंडोक्राइन सर्जरी  सुरक्षित, सटीक और कॉस्मेटिक रूप से बेहतर विकल्प के रूप में साबित हो हो रहा है। सर्जरी के बाद गले पर कोई निशान नहीं पड़ता है।

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