शनिवार, 18 अप्रैल 2026

खराब खानपान, मोटापा और डायबिटीज से लीवर रोग बन रहा ‘साइलेंट महामारी’

 







विश्व लीवर डे विशेष: बदलती जीवनशैली से बढ़ता सिरोसिस संकट, समय रहते पहचान ही बचाव की कुंजी


खराब खानपान, मोटापा और डायबिटीज से लीवर रोग बन रहा ‘साइलेंट महामारी’




 लीवर सिरोसिस अब केवल शराब से जुड़ी बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि बदलती जीवनशैली के कारण यह तेजी से फैलती “साइलेंट महामारी” का रूप ले रही है। 19 अप्रैल – विश्व लिवर डे के मौके पर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि समय रहते पहचान और जीवनशैली में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।


 


संजय गांधी पीजीआई के गैस्ट्रोएंट्रॉलजी विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, यहां इलाज के लिए आने वाले मरीजों के आंकड़े बताते हैं कि 43.2 फीसदी मामलों में शराब लीवर सिरोसिस का सबसे बड़ा कारण है। इसके बाद नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) यानी फैटी लिवर 14.4 फीसदी, हेपेटाइटिस बी वायरस 11.5 फीसदी और हेपेटाइटिस सी 6.2 फीसदी मामलों में जिम्मेदार पाए गए हैं।


 


संस्थान के विशेषज्ञ प्रो. अंशुमान एल्हेंस का कहना है कि यह बदलाव केवल बीमारी का नहीं, बल्कि लोगों की जीवनशैली में आए बड़े परिवर्तन का संकेत है। “यदि समय रहते स्क्रीनिंग, जागरूकता और जीवनशैली में सुधार नहीं किया गया, तो लीवर रोग साइलेंट महामारी बन सकता है। सिरोसिस लाइलाज नहीं है, लेकिन देर से पकड़ में आने पर यह खतरनाक जरूर हो जाता है,” उन्होंने कहा।


 


क्या है सिरोसिस की शुरुआत


 


सिरोसिस अचानक नहीं होता। इसकी शुरुआत फैटी लिवर  से होती है, जिसमें लीवर में चर्बी जमा होती है। इसके बाद हल्की सूजन (फाइब्रोसिस) और धीरे-धीरे लीवर कोशिकाएं खराब होने लगती हैं। शुरुआती चरण में मरीज को थकान, भूख कम लगना, पेट में सूजन या वजन में बदलाव जैसे लक्षण दिखते हैं, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।


 


नई दवाएं और इलाज में प्रगति


 


विशेषज्ञ प्रो. गौरव पाण्डेय के अनुसार, हाल के वर्षों में लीवर रोगों के इलाज में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।हेपेटाइटिस बी के लिए टेनोफोविर और एंटेकाविर जैसी दवाएं वायरस को नियंत्रित कर लीवर को नुकसान से बचाती हैं।हेपेटाइटिस सी में डायरेक्ट-एक्टिंग एंटीवायरल थेरेपी से 90 फीसदी से अधिक मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं।फैटी लिवर डिजीज में अभी सीमित दवाएं हैं, लेकिन विटामिन ई और पियोग्लिटाजोन कुछ मरीजों में लाभकारी पाए गए हैं।


 


सिरोसिस की रफ्तार कैसे करें कम


-शराब का पूर्ण त्याग


-संतुलित आहार (कम वसा और कम चीनी)


-रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम


-वजन और ब्लड शुगर नियंत्रण


-हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण, हेपेटाइटिस सी की जांच


-समय-समय पर लिवर फंक्शन टेस्ट


 


क्यों बढ़ रहा है खतरा


 


विशेषज्ञों के अनुसार, शहरी जीवन शैली, जंक फूड, मोटापा और बढ़ता शराब सेवन इस बीमारी के प्रमुख कारण हैं। चिंताजनक बात यह है कि अब बच्चों में भी फैटी लिवर के मामले बढ़ रहे हैं, जो भविष्य में गंभीर लीवर रोगों का संकेत है।


 


विशेषज्ञों की सलाह:


लीवर से जुड़ी बीमारियां अक्सर देर से सामने आती हैं, इसलिए नियमित जांच, संतुलित जीवन शैली और समय पर इलाज ही इससे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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