एआई तकनीक से स्तन कैंसर का इलाज होगा अधिक सटीक, जागरूकता बढ़ाना जरूरी
संजय गांधी पीजीआई द्वारा आयोजित ब्रेस्ट कोर्स 2026 में स्तन कैंसर के निदान और उपचार में कई तकनीकों पर चर्चा हुई, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की संभावित भूमिका प्रमुख रही। इस विषय पर नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर के डॉक्टर मिकाएल हार्टमैन ने व्याख्यान दिया , बताया कि एआई तकनीक मैमोग्राफी, अल्ट्रासाउंड और एमआरआई की इमेज का सूक्ष्म विश्लेषण कर शुरुआती स्तर पर कैंसर की पहचान करने में मदद करेगी। उन्होंने कहा कि एआई ट्यूमर के आकार, प्रकार और फैलाव का सटीक आकलन करने में सहायक होगा, साथ ही मरीज के अनुसार व्यक्तिगत उपचार योजना बनाने में मदद करेगा। सर्जरी के दौरान भी एआई आधारित तकनीकों से सटीकता बढ़ेगी और मरीजों की रिकवरी बेहतर होगी। विभागाध्यक्ष प्रो गौरव अग्रवाल ने कहा कि स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। यदि स्तन में किसी भी प्रकार की गांठ महसूस हो, तो उसे नजरअंदाज न करें और तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। इंडो सर्जरी विभाग के प्रोफेसर ज्ञानचंद और प्रोफेसर एम. सबारेतनम ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्तन कैंसर के इलाज में अहम भूमिका निभाएगा। संस्थान के निदेशक प्रो आरके धीमान ने बताया कि संस्थान हर स्तर पर स्तन कैंसर के निदान और उपचार के लिए कार्य कर रहा है और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर मरीजों को बेहतर सुविधा दी जा रही है। संस्थान में स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान, सटीक जांच, उन्नत सर्जरी और मरीज के अनुसार व्यक्तिगत उपचार (पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट) पर काम जारी है, जिससे मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज मिल सके। बॉक्स: स्तन कैंसर की स्थिति और लक्षण प्रदेश में हाल के स्क्रीनिंग अभियानों में लगभग 16,500 महिलाओं की जांच की गई, जिसमें करीब 3.9 फीसदी महिलाओं में कैंसर के संभावित लक्षण पाए गए और उन्हें आगे की जांच के लिए भेजा गया। विशेषज्ञों का कहना है कि स्तन में नई गांठ, स्तन के आकार या रूप में बदलाव, निप्पल का अंदर की ओर खिंचना या स्राव, त्वचा पर लालिमा या डिम्पल, बगल में गांठ जैसी शिकायतें शुरुआती संकेत हो सकते हैं। किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज न करना चाहिए और तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना चाहिए।


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