टिनिटस मरीजों के लिए राहत की नई उम्मीद: उम्र के हिसाब से होगा इलाज, कानों की भनभनाहट पर वैज्ञानिकों का बड़ा खुलासा
टिनिटस मरीजों के लिए राहत की नई उम्मीद: उम्र के हिसाब से होगा इलाज, कानों की भनभनाहट पर वैज्ञानिकों का बड़ा खुलासा
अब कानों में लगातार सुनाई देने वाली भनभनाहट, सीटी या घंटी जैसी आवाज से परेशान टिनिटस मरीजों के इलाज में बड़ा बदलाव आने वाला है। वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि टिनिटस केवल कान की समस्या नहीं, बल्कि दिमाग के नेटवर्क से जुड़ी बीमारी है और इसकी प्रकृति उम्र के साथ बदलती है। इस खोज से अब मरीजों को उनकी उम्र और मानसिक स्थिति के अनुसार अधिक सटीक, व्यक्तिगत और प्रभावी इलाज मिल सकेगा। कई लोगों को बिना किसी बाहरी आवाज के कानों में लगातार आवाज सुनाई देती रहती है। यह स्थिति टिनिटस कहलाती है, जो नींद, ध्यान, कामकाज और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालती है। अब तक इसका इलाज सामान्य तौर पर एक जैसी पद्धति से किया जाता रहा, लेकिन नए शोध ने साबित किया है कि हर उम्र के मरीज में यह बीमारी अलग तरह से असर करती है। हाल ही में प्रकाशित इस अध्ययन में 120 लोगों को शामिल किया गया, जिनमें 60 टिनिटस मरीज और 60 स्वस्थ व्यक्ति थे। इन्हें दो आयु वर्गों—19 से 35 वर्ष और 45 से 65 वर्ष—में बांटा गया। वैज्ञानिकों ने फंक्शनल एमआरआई और डीटीआई जैसी आधुनिक ब्रेन स्कैन तकनीकों से दिमाग की गतिविधियों और आपसी कनेक्टिविटी का विश्लेषण किया। शोध में सामने आया कि युवा मरीजों में सुनने और भावनाओं से जुड़े मस्तिष्क क्षेत्र अधिक सक्रिय रहते हैं, जबकि दिमाग का नियंत्रण तंत्र कमजोर हो जाता है। इसका मतलब यह है कि युवा मरीज दिमाग में पैदा हो रही आवाज को नजरअंदाज नहीं कर पाते, इसलिए उन्हें परेशानी अधिक महसूस होती है। वहीं अधिक उम्र के मरीजों में दिमाग के फ्रंटल और सेरिबेलम हिस्से ज्यादा सक्रिय पाए गए, जो यह दिखाता है कि दिमाग इस समस्या से सामंजस्य बैठाने की कोशिश करता है। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ ध्यान और याददाश्त से जुड़े नेटवर्क कमजोर होने लगते हैं, जिससे परेशानी जटिल हो जाती है। शोध में यह भी पाया गया कि टिनिटस की गंभीरता और मरीज की चिंता या तनाव के स्तर के अनुसार दिमाग के नेटवर्क में बदलाव अलग-अलग होते हैं। यही कारण है कि एक ही इलाज सभी मरीजों पर समान रूप से असरदार नहीं होता। हेड नेक सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. अमित केशरी ने कहा कि यह अध्ययन टिनिटस उपचार के क्षेत्र में नई दिशा देता है। अब इलाज तय करते समय मरीज की उम्र, मानसिक स्थिति और दिमागी नेटवर्क के बदलावों को ध्यान में रखना होगा, जिससे उपचार अधिक प्रभावी बनाया जा सके। यह शोध सेंटर फॉर बायोमेडिकल रिसर्च के डॉ. हिमांशु आर. पांडेय, डॉ. नीरज सिन्हा, डॉ. उत्तम कुमार तथा प्रो. अमित केशरी ने संयुक्त रूप से किया है। “ऑडिटरी नेटवर्क प्लास्टिसिटी इन टिनिटस अक्रॉस द अडल्ट लाइफस्पैन: इनसाइट्स फ्रॉम एफ-एम-आर-आई एंड स्ट्रक्चरल कनेक्टिविटी” विषयक यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल हियरिंग रिसर्च ने स्वीकार किया है।

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