गुरुवार, 2 अप्रैल 2026

एनेस्थेसिया की नई तकनीक से हाई रिस्क के मरीजों में नहीं टलेगी सर्जरी



एनेस्थेसिया की नई तकनीक से हाई रिस्क के मरीजों में नहीं टलेगी सर्जरी



पीजीआई देश का चौथा संस्थान है जहां  स्थापित हुई नई तकनीक


 सौ से अधिक मरीजों में सेगमेंटल स्पाइनल एनेस्थेसिया तकनीक से सफल सर्जरी


 




 


 अब हाई रिस्क वाले ऐसे मरीज, जिनमें पहले से हृदय, फेफड़े की परेशानी है, उनमें भी सुरक्षित सर्जरी संभव हो सकेगी। इनमें एनेस्थीसिया के कारण होने वाले कुप्रभाव के कारण सर्जरी नहीं टलेगी। मरीजों को एनेस्थीसिया के सामान्य होने तक के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। ऐसे गंभीर मरीजों के लिए संजय गांधी पीजीआई ने सेगमेंटल स्पाइनल एनेस्थेसिया तकनीक स्थापित कर ली है। विभाग के एनेस्थीसिया विशेषज्ञ प्रो. संदीप खूबा, प्रो. चेतना शमशेरी, विभाग के प्रमुख प्रो. संजय धीराज, प्रो. सुजीत गौतम, प्रो. रूचि वर्मा और प्रो. तपस सेन ने इस तकनीक के बारे में बताया कि पहले भी पूर्ण बेहोशी न देकर स्पाइनल एनेस्थीसिया दिया जाता था, जिसमें कमर के नीचे का पूरा हिस्सा सुन्न हो जाता था। इसके कारण चलने में परेशानी के साथ ही ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट पर कुप्रभाव की आशंका रहती थी।


विशेषज्ञों ने बताया कि स्पाइन हड्डी, पेट, चेस्ट, किडनी ट्रांसप्लांट सहित बड़ी सर्जरी में पूर्ण बेहोशी दी जाती है, जिसमें दवा अधिक लगती है और रिकवरी में समय लगता है। कई बार सर्जरी के बाद वेंटिलेटर पर रखना होता है। अब नई तकनीक से इनमें भी सर्जरी हो रही है। किडनी ट्रांसप्लांट में नई तकनीक से हाल में ही ट्रांसप्लांट किया गया है। विशेषज्ञों ने बताया कि अब तक लगभग सौ मरीजों में इस तकनीक से सर्जरी की जा चुकी है, जिसमें कोई जटिलता (कंप्लीकेशन) नहीं हुई।


 


क्या है नई तकनीक


सेगमेंटल स्पाइनल एनेस्थेसिया में जिस अंग में सर्जरी करनी होती है, केवल उसी अंग को सुन्न किया जाता है।  सर्जरी का समय बढ़ने के साथ बेहोशी का समय भी बढ़ाते रहते हैं। सर्जरी के दौरान मरीज बात करता रहता है, जिससे सर्जरी और सुरक्षित हो जाती है।


 


तकनीक का होगा विस्तार


तकनीक के विस्तार के लिए 4 और 5 अप्रैल को दो दिवसीय वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें नई तकनीक के बारे में पूरे देश से आ रहे विशेषज्ञों को प्रशिक्षित किया जाएगा।

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