बुधवार, 19 दिसंबर 2018

पीजीआई को एम्स के समान भत्ते पर शासन ने जतायी सहमति


पीजीआई को एम्स के समान भत्ते पर शासन ने जतायी सहमति


एक माह में मुख्य सचिव को दी जाएगी रिपोर्ट
पीजीआइ ने अपना पक्ष रखने के लिए कमेटी 



संजय गांधी पीजीआइ के कर्मचारियों के एम्स के समान भत्ते पर शासन ने सैद्धानतिक सहमति देते हुए संस्थान को एक्ट के अनुसार विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है। संस्थान प्रशासन ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रो. अमित अग्रवाल, सीवीटीएस विभाग के प्रो. एसके अग्रवाल, ट्रांस फ्यूजन मेडिसिन विभाग के प्रो. प्रशांत अग्रवाल, प्रशासनिक अधिकारी सुधीर सक्सेना एवं एसके जैन सहित अन्य की कमेटी बना दी है जो एक सप्ताह के अंदर शासन को रिपोर्ट देगी। संस्थान के एक्ट प्रस्तर 73 और 74 का हवाला देते हुए संस्थान प्रशासन का कहना है कि संकाय सदस्यों, कर्मचारियों और अधिकारियों के एम्स के समान वेतनमान, भत्ते देय होगा । इस आधार पर शासन के बैठक में शामिल अपर मुख्य सचिव वित्त संजीव मित्तल, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा डा. रजनीश दुबे, विशेष सचिव चिकित्सा शिक्षा जंयत नार्लिकर, विशेष सचिव वित्त शंकेश्वर त्रिपाठी ने एम्स के सामन भत्ते देने कहा कि एम्स के समान भत्ते और वेतन देना उचित प्रतीत होता है। इस बैठक में हाई पावर कमेटी से कहा गया है कि एक महीने में रिपोर्ट मुख्य सचिव को दें।  कर्मचारी नेताओं का कहना है कि शासन की मंशा जो भी हो इस पर निर्णय 15 दिन के अंदर लिया जाए। कर्मचारियों में आक्रोश है हड़ताल पर जाने की सहमति बन चुकी है। 26 दिसंबर के बाद किसी भी हड़ताल पर जा सकते हैं। 


शासन एम्स के समान भत्ते देने पर सहमति जतायी है। हर स्तर पर खुद पक्ष रख रहा हूं।  शासन ने एक माह का समय मांगा है। इस लिए कर्मचारी नेताअों से अपील है कि एक माह का समय दें। हड़ताल पर जाने से मरीजों का अहित होगा। कोई एेसा काम न करें जिससे संस्थान की छवि खराब हो.....निदेशक प्रो.राकेश कपूर 

शुक्रवार, 14 दिसंबर 2018

तीन महीने में शुरू हो जाएगा मेंदाता----पीएचसी पर इलाज ठीक हो तो 50 फीसदी को नही आना पडेगा बडे अस्पताल


पीएचसी पर इलाज ठीक हो तो 50 फीसदी को नही आना पडेगा बडे अस्पताल


सबको इलाज के लिए निजि और सरकारी को मिल कर करना होगा काम
समझे मरीजों का दर्द
जागरण संवाददाता। लखनऊ
पीएचसी, सीएचसी पर इलाज की व्यवस्था ठीक हो जाए तो पीजीआइ और मेदांता जैसे अस्पताल तक 50 फीसदी मरीजों को आने की जरूरत ही नहीं पडेगी। प्राइमरी केयर को सरकार को ठीक करना होगा। सेकेंड्री यानि जिला अस्पताल की स्थित भी बहुत अच्छी है इसमें सुधार के लिए पीपीपी माडल पर काम करना होगा इससे टर्सरी केयर अस्पताल ( पीजीआइ) में भीड़ कम होगी साथ ही इस तरह के अस्पताल की जरूरत भी होगी। यह बात मेंदांता चिकित्सा एंड रिसर्च सेंटर के अध्यक्ष डा. नरेश त्रेहन ने संजय गांधी पीजीआइ के 35 वें स्थापना दिवस समारोह पर कही। कहा कि 61.8 फीसदी लोग डायबटीज, हार्ट डिजीजी जैसी नान कम्युनिकेबिल डिजीज,  27.5 फीसदी लोग  संक्रामक रोग और 10.7 फीसदी लोग इंजरी के कारण बीमार होते है। इन सबको सही समय पर इलाज उपबल्ध काराने के लिए डाक्टर, पैरा मेडिकल स्टाफ सहित संसाधन की कमी है जिसे पूरा करने के लिए सरकार को काफी समय लगेगा इस लिए निजि और सरकारी क्षेत्र को मिल कर काम करना होगा। कहा कि जो डाक्टर मरीज का दर्द समझेगा वहीं मरीज को अपनी क्षमता सौ फीसदी दे पाएगा। प्रो. निदेशक कपूर ने संस्थान के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि नए विभाग स्थापित कर रहे हैं। डीन प्रो.एसके मिश्रा ने आभारा प्रकट किया।   

अमेरिका जहां ले जरूरत वहीं खुलता है अस्पताल
अमेरिका में जिस शहर या जगह पर पहले से अस्पताल वहां दूसरा अस्पताल खोलने की अनुमति नहीं देता है। इसी तरह कोई भी उपकरण खरीदना है तो कितनी उसकी उपयोगिता है पहले यह बतानी होती है तभी अनुमति मिलती है। इससे इलाज के सेंटर पूरे देश में फैले है इसी तरह की पालसी देखने की जरूरत है।

तीन महीने में शुरू हो जाएगा मेंदाता
डा. नरेश त्रेङन ने बताया कि तीन महीने में मेंदांता अस्पताल काम करना शुरू कर देगा। इसमें एक हाजर बेड के साथ 23 विशेषज्ञता का इलाज उपलब्ध होगा। लखनऊ के बाद वाराणसी , गोरखपुर, इलाहाबाद में मेंदाता अस्पताल खोलने की योजना पर काम हो रहा है। एक बेड पर एक करोड़ का खर्च आता है। लखनऊ में 12 सौ करोड़ रूपया लगा कर अस्पताल स्थापित किया गया है।
प्रदेश में जल्दी आ रहा है मेडिकल इनवेंस्टमेंट पालीसी
मुख्य सचिव एवं संस्थान के अध्यक्ष डा. अनूप चंद्र पाण्डेय ने कहा कि कारपोरेट अस्पताल स्थापित करने के लिए सरकार जल्दी मेडिकल इनवेंस्टमेंट पालसी ला रही है जिससे चिकित्सा के क्षेत्र में निजि अस्पतालों की संख्या बढेगी। कहा कि केवल अच्छे भवन और मशीन कोई अच्छा संस्थान नहीं बनता है वहां पर काम करने वाले लोगों के मेहनत और तपस्य़ा से अच्छा संस्थान बनता है जिसे पीजीआई के लोगों ने साबित किया है।

यह हुए सम्मानित
-    बेस्ट डीएम स्टूडेंट- डा. सुब्रत क्लीनिकल इण्यूनोलाजी
-    बेस्ट एमसीएच स्टूडेंट- डा. राहुल जीना यूरोलाजी
-    बेस्ट एमडी स्टूडेंट- डा. पुष्प किरन कौर एनेस्थेसिया
-    बेस्ट टेक्नोलाजिस्ट- राजीव सक्सेना एनेस्थेसिया
-    बेस्ट टेक्नोलाजिस्ट- दिनेश कुमार नेफ्रोलाजी
-    बेस्ट नर्स- अमरून निशा पल्मोनरी
-    बेस्ट नर्स- महेंद्र चंद्र गुप्ता  पिडियाट्रिक गैस्ट्रो मेडिसिन  

गुरुवार, 13 दिसंबर 2018

पीजीआइ में एम्स के भत्ते कटने के विरोध में चला जागरूकता अभियान


पीजीआइ में एम्स के भत्ते कटने के विरोध में चला जागरूकता अभियान



भत्ते कटने से कम हो जाए एक कर्मचारी का 10 से 15 हजार वेतन
कर्मचारी नेताअों ने दी हड़ताल पर जाने की नोटिस


संजय गांधी पीजीआई के कर्मचारी नेता गुरूवार को विभागों में जाकर एम्स के समान भत्ते के लिए जागरूकता अभियान चलाया। नेताअों ने बताया कि प्रदेश सरकार संस्थान के स्थापना से मिल रहे एम्स के समान भत्ते पर रोक लगा रही है जिसके विरोध में 18 दिसंबर को अाम सभा होगी । हड़ताल पर जाने के लिए  नोटिस दे दी गयी है। सरकार 15 दिन के अंदर एम्स के समान भत्ते देने का आदेश बहाल नहीं करती है तो पूरी तरह से हड़ताल होगी । संस्थान में भर्ती होने वाले 12 सौ मरीजों और अोपीडी में आने वाले रोज पांच हजार मरीजों का इलाज बाधित होगा । जिसके लिए  शासन -प्रशासन दोषी होगा। एम्स के समान भत्ते न मिलने से एक कर्मचारी के वेतन में 10 से 15 हजार तक की कमी होगी साथ तमाम सुविधाअों से वंचित होना पड़ेगा। एम्स के समान भत्ते के लिए संस्थान के सभी वर्ग के कर्मचारी नेता एक मंच पर आ गए है। जागरूकता अभियान में कई संवर्ग के कर्मचारी नेता वार्ड और विभागों में कर्मचारियों को रणनीति के बारे में जानकारी दिए।

पीजीआइ में होगी दो गुना अधिक दिल की सर्जरी - दिल की सर्जरी के लिए मिल रहा है 2026 का डेट

पीजीआइ में होगी दो गुना अधिक  दिल की सर्जरी 


दिल की सर्जरी के लिए मिल रहा है 2026 का डेट
किडनी ट्रासप्लांट  सप्ताह में 10 से 15 करने की योजना
 


सब कुछ प्लानिंग के अनुसार चलता रहा तो संजय गांधी पीजीआइ में दिल की सर्जरी के लिए दो से तीन साल का इंतजार नहीं करना पडेगा। हर साल संस्थान में 860 मरीजों में दिल की सर्जरी होती जिसे 2019 के अंत तक बढा 15 सौ करने की योजना पर तेजी से काम हो रहा है। इस समय संस्थान के सीवीटीएस विभाग की एक यूनिट में सर्जरी के 2026 की डेट मिल रही है एेसे में जो इंतजार नहीं कर सकते है वह कारपोरेट अस्पतालों में चार से पांच लाख खर्च कर सर्जरी कराते हैं। संस्थान में 1.5 लाख में सर्जरी का खर्च अाता है। मरीजों को तमाम परेशानी से बचाने के लिए सीवीटीएस आईसीयू की संख्या बढा कर 26 की जा रही है इस समय केवल 12 हैं।  एक अोटी भी बढायी जा रही है। संस्थान के 35 वें स्थापना दिवस समारोह (14 दिसंबर) के मौके पर निदेशक प्रो.राकेश कपूर, डीन प्रो.एसके मिश्रा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो.अमित अग्रवाल और कार्डियक सर्जन प्रो.एसके अग्रवाल ने अागे योजनाअों और बीते चार साल में उपलब्धियो का खाका रखते हुए बताया कि सर्जरी के तुरंत बाद आईसीयू की जरूरत होती है जहां वह स्वास्थ्य लाभ लेता है। सर्जरी की संख्या बढने के साथ दिल की सर्जरी की वेटिंग कम होगी। इसी तरह किडनी ट्रांसप्लांट के लिए 1.5 साल की वेटिंग है नए रीनल ट्रांसप्लांट सेंटर बनने के बाद वेटिंग कम होगी। अभी सप्ताह में तीन से चार किडनी ट्रांसप्लांट हो रहा है नया सेंटर बनने के बाद सप्ताह में 10 से 15 ट्रांसप्लांट होगा। ट्रामा सेंटर को 60 से 2 सौ बेड करने की योजना पर काम हो रहा है। समारोह में मेंदाता अस्पताल के अध्यक्ष पदम श्री डा. नरेश त्रेहन स्थापना दिवस व्य़ाख्यान देंगे।  

क्या है उपलब्धियां
-मेडिटल टेक्नोलाजी कालेज जो 15 साल से पेंडिग था
- 24 हावर लैब जहां इमरजेंसी में दो घंटे में जांच रिपोर्ट
-क्रिटिकल केयर मेडिसिन में 10 बेड बढा
- मरीजों को शुद्ध पानी के लिए सेंट्रल आरअो प्लांट
-नियोनेटोलाजी का विस्तार
-न्यू अोपीडी और न्यू लाइब्रेरी सात साल से पेंडिंग था 
-रिसर्च पेपर की गुणव्ता में देश में नंबर वन और देश टांप 10 मेडिकल संस्थान में स्थान
- लिवर ट्रांसप्लांट यूनिट क्रियाशील हुअा जो चार साल से बंद पडा था


फैक्ट फीगर...  
- साल में नए मरीज- 10919
-फालोअप मरीज- 459032
- भर्ती- 56509
- बडी सर्जरी- 13987
-संकाय सदस्यों की संख्या- 252
- पैरामेडिकल स्टाफ( नर्सेज और टेक्नोलाजिस्ट)- लगभग 2000
- सपोर्टिग स्टाफ- लगभग तीन हजार 

बुधवार, 12 दिसंबर 2018

पीजीआइ में मिलेगी नई दर पर दवा और सर्जिकल आइमटम

पीजीआइ में मिलेगी नई दर पर दवा और सर्जिकल आइमटम


मई 2019 तक लागू हो जाएगी नई दर

मरीजों को 40 से 80 फीसदी कम दर पर मिलेगी दवा और सर्जिकल आइटम


संजय गांधी पीजीआइ नई दर पर दवा और सर्जिकल आइमट( स्टंट, केथैटर सहित अन्य)  उपलब्ध कराएगा। हास्पिटल रिवालविंग फंड के चेयरमैन एवं नेफ्रोलाजी विभाग के प्रमुख प्रो. अमित गुप्ता एवं प्रभारी आरए यादव ने बताया कि दवा और सर्जिकल आइमटम मरीजों को कम कीमत पर उपलब्ध कराने के लिए कई कंपनियों से करार हुअा था जो अप्रैल 2019 में खत्म हो रहा है। इस बीच नई टेंडर प्रक्रिया चल रही है जो तय समय में पूरी कर मई से  लागू कर दी जाएगी। ऩए करार में कुछ की कीमत कम तो कुछ बढ़ सकती है। संस्थान तीन साल के लिए करार करता है। स्पष्ट किया जिस तरह पहले कीमत से 40 से 80 फीसदी कम कीमत पर दवा और सर्जिकल आइटम पर उपलब्ध कराया जाता है यह जारी रहेगा। एचआरएप की स्थापना का उद्देश्य ही यही है। बताया कि संस्थान में 10 हजार दवाएं और सर्जिकल आइटम की खरीद के लिए कंपनियों से सीधे करार होता है। क्या दवा और सर्जिकल आइमटम लेना है संबंधित विभाग के संकाय सदस्य फाइनल करते है जिसकी संस्तुति के बाद खरीद के लिए करार होता है

रविवार, 2 दिसंबर 2018

आईसीटीसी ने एड्स ग्रस्त लोगों के जिंदगी में भरी रोशनी...ए्डस के बाद भी जी रहे है अच्छी जिंदगी


घुप्प अंधेरे से आहिस्ता-आहिस्ता रोशनी में आई जिंदगी
 हंसी-खुशी सामान्य जीवन जी रहा था तो किसी ने शादी के बाद के कई ख्वाब संजोकर रखे थे। अचानक उनकी जिंदगी में एचआईवी संक्रमण यानी एड्स ने दस्तक दे दी। एड्स की जानकारी मिलते ही मानो जिंदगी में बिल्कुल अंधेरा हो गया। अब जिंदगी चार दिन की बची है, ऐसी सोच में दिन कटने लगे। जिन अपनों के साथ सुनहरे जीवन को जीने का ख्वाब संजोया था, वह सब बिखरता हुआ दिखने लगा। ख्वाब के समंदर में आंसू, घुटन और तमाम ख्वाहिशों का गला घुटता दिख रहा था। कई लोगों ने जिंदगी समाप्त करने की कोशिश की तो कई ने इसे संवारने की। ऐसे एचआईवी संक्रमित लोगों ने जब एआरटी और आईसीटीसी सेंटर की ओर रुख किया तो उनमें जीवन जीने की तमन्ना जाग उठी और आज वह हंसी-खुशी जीवन जी रहे हैं।
केस दो- राजधानी की ही एक 23 वर्ष की शादीशुदा लड़की को गर्भावस्था के दौरान जांच होने पर पता चला कि वह एचआईवी संक्रमित है। इस बात का पता चलते ही लड़की ने जीवन को समाप्त करने की ठानी। पर, घर पहुंची और दो-तीन दिन तक गर्भ में बढ़ रहे बच्चे के बारे में सोचा। एआरटी सेंटर व निजी संस्था के पास पहुंची। काउंसलिंग की गई। लड़की की सार्थकता को देखते हुए उसने जल्द ही ठान लिया कि वह बच्चा जनेगी और उसे मुकाम दिलाएगी। इसके लिए वह जीवन में जो भी संघर्ष होंगे उसे करेगी। आखिरकार उसने बेटी को जन्म दिया। हालांकि बच्ची भी एचआईवी संक्रमित ही है। लड़की ने निजी संस्था में काम शुरू किया और आज वह बेटी संग बेहतर जिंदगी जी रही है। .
केस एक- करीब तीन वर्ष पूर्व ऑपरेशन के दौरान लखनऊ की एक शादीशुदा युवती (26) को पता चला कि उसे एड्स है। पहले तो उसे विश्वास नहीं हुआ। ऐसे में उसने दो-तीन और जगह पर जांच कराई। सभी जगह एचआईवी पॉजिटिव रिपोर्ट मिलने पर वह सहम गई। आखिरकार समाज से लड़ने की हिम्मत खो चुकी इस युवती ने छत से कूदकर खुदकुशी की कोशिश की। पैर टूटा, शरीर में कई जगह चोट लगी। यही नहीं कुछ दिन बाद फिर से खुद को धारदार हथियार से चोटिल कर लिया। पर, इस बार भी जान बच गई। आखिरकार पति को पूरा मामला पता चला। उसने युवती को धिक्कारने या छोड़ने के बजाए उसका साथ दिया। वह पत्नी को लेकर अस्पताल पहुंचा और काउंसलिंग के बाद आज युवती खुलेमन से जीवन जी रही है। .


यह मत सोचें कि अब जीवन नहीं बचा : एचआईवी संक्रमण के बारे में जानकारी होने पर लोग यह कतई न सोंचें की अब आगे जीवन नहीं बचा है और जीने से कुछ नहीं होगा। ऐसा सोचने के बजाय लोग यह ठान लें कि वह अब जीवन को और बेहतर तरीके से सबके साथ जिएंगे। तभी से उनके जीवन में आने वाली सारी कठिनाइयां दूर हो जाएंगी। बस हिम्मत मत हारिए और जिंदगी का डटकर सामना करिए। नियमित दवाओं का इस्तेमाल करें तो आप सेहतमंद जीवन जी सकते हैं।.
हारे नहीं, एड्स से करें सामना : ज्यादातर लोगों को लक्षण के आधार पर लंबे समय बाद ही पता चला पाता है कि उन्हें एड्स है। कई लोगों को किसी प्रकार के ऑपरेशन या गर्भवती महिलाओं को प्रसव से पहले होने वाली जांचों से पता चलता है कि वह एचआईवी संक्रमित हैं। उससे पहले वह बेहतर तरीके से जीवन जी रहे होते हैं। ऐसे लोगों को चाहिए कि वह ऐसा कतई न सोंचे कि उनकी जिंदगी समाप्त हो गई है। उन्हें आगे बढ़कर एचआईवी का सामना और इलाज करना चाहिए, जो कि पूरी तरह से नि:शुल्क है।
कैसे फैलता है एचआईवी
' एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध स्थापित करने पर .
' एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने से .
' संक्रमित सुई के प्रयोग से .
' एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिला
फैक्ट ....
. 'यूपी के एआरटी सेंटरों में 1,38,786 लोग एचआईवी पंजीकृत हैं।
' यूपी में एआरटी के 38 सेंटर संचालित हैं। .


स्मार्ट फोन बना सकता है दिल का मरीज

स्मार्ट फोन बना सकता है दिल का मरीज
देर तक जागने से डायबिटीज और दिल की बीमारी का खतरा
अगर आप भी देर रात अपने स्मार्टफोन लैपटॉप या टीवी से चिपके रहते हैं, तो सावधान हो जाएं। एक नए अध्ययन में पता चला है कि रात में उल्लू' की तरह जागने वालों में दिल की बीमारी और डायबिटीज का खतरा ज्यादा होता है। .
शोधकर्ताओं ने पाया कि देर तक जागने वाले लोगों का खानपान ज्यादा खराब रहता है। इंसानी शरीर 24 घंटे के चक्र पर चलता है, जो जैविक घड़ी से नियंत्रित होता है। यह आतंरिक घड़ी हमारे शरीर के कई कामों को नियमित करती है। मसलन यह बताती है कि आपको कब खाना है, कब सोना और कब जागना है। यह आंतरिक घड़ी प्राकृतिक प्राथमिकता के आधार पर यह जल्दी उठने और जल्दी सोने की दिशा में काम करती है। .
शोधकर्ताओं ने अध्ययनों की समीक्षा के बाद पाया कि देर रात तक जगने वाले लोगों में दिल की बीमारी और टाइप 2 डायबिटीज की समस्या ज्यादा थी। जो लोग रात में देर से सोते हैं, उनके गैर पौष्टिक डाइट के अपनाने की आशंका ज्यादा होती है। ये लोग शराब, चीनी, चाय-कॉफी और फास्ट फूड ज्यादा खाते हैं। जबकि जल्दी उठने वाले लोगों में ऐसा कम देखने को मिलता है। दिन में देर से खाने का संबंध टाइप-2 डायबिटिज के जोखिम से भी पाया गया क्योंकि शरीर के अंदर की घड़ी शरीर को ऊर्जा देने के लिए ग्लूकोज को रास्ता देती है। ग्लूकोज का स्तर प्राकृतिक तरीके से दिनभर नीचे गिरता है और रात में वह बिल्कुल निचले स्तर पर पहुंच जाता है। .
रात में जगने वाले लोग अक्सर बिस्तर पर जाने से पहले तक खाते हैं, इसलिए उनके ग्लूकोज का स्तर उस समय भी बढ़ा रहता है, जब वे सोने जाते हैं। इससे मेटाबॉलिज्म पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और शरीर सामान्य जैविक चक्र प्रक्रिया का पालन नहीं कर पाता है। ऐसे लोग दिन में कम बार खाना खाते हैं, लेकिन मात्रा ज्यादा लेते हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि क्यों देर तक जगने वालों की सेहत को खतरा रहता है। .
 देर रात तक जगने वाले लोगों का खानपान भी गड़बड़ाया रहता है.
शोध के मुताबिक देर से सोने वाले लोगों के खानपान का समय भी गड़बड़ा जाता है। देर से सोने की वजह से वे उठते भी देर से हैं, जिससे सुबह के नाश्ते का समय निकल जाता है और वे दिन में देर से खाना खाते हैं। उनके खानपान में अनाज, सब्जी और फलों की मात्रा भी कम होती है। .
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86.5 फीसदी मानसिक रोगी नहीं पा रहे है इलाज- मेडिकल विवि के मानसिक रोग विशेषज्ञों ने 3508 लोगो पर किया शोध


 86.5 फीसदी मानसिक रोगी नहीं पा रहे है इलाज
       मेडिकल विवि के मानसिक रोग विशेषज्ञों ने 3508 लोगो पर किया शोध
         6.08 फीसदी मानसिक रोग से ग्रस्त
महिलाओं के मुकाबले पुरूष अधिक है मानसिक रोग के शिकार
        कुमार संजय। लखनऊ
        मानसिक ( साइकेट्रिक) बीमारी से ग्रस्त केवल 13.5 फीसदी लोग ही इलाज पा रहे हैं।  86.5 फीसदी मानसिक रोगी इलाज नहीं पा रहे हैं। प्रदेश में 6.08 फीसदी लोग मानसिक बीमारी के चपेट में है। इस तथ्य का खुलासा किंग जार्ज मेडिकल विवि के मानसिक रोग विशेषज्ञों ने 3508 लोगों पर शोध के बाद किया है।  मानसिक रोग विशेषज्ञ डा. एसके कार की अगुवाई में शामिल डा. ईशा शर्मा, डा.विवेक अग्रवाल, डा. शिवेंद्र कुमार सिंह , डा. प्रोनोब कुमार दलाल, डा. अमित सिंह, डा. जी गोपीकृष्ना, डा. गिरीश एन राव ने प्रिवलेंश एंड पैटर्न अफ मेंटल इलनेस इन उत्तर प्रदेश पर शोध किया जिसे एसियन जर्नल आफ साइकेट्रिक ने स्वीकार किया है। शोध पत्र में कहा गया है कि मानसिक बीमारी के इलाज के लिए नई सिरे से योजना बना कर काम करना होगा। मानसिक बीमारी से ग्रस्त लोगों में से 0.93 फीसदी में आत्महत्या की प्रकृति देखी गयी है। सही समय पर इलाज दे कर इन्हें बचाया जा सकता है। मानसिक रोगों में मुख्य रूप से टुबैको और एल्कोहल यूज डिसआर्डर, स्क्रिजिफ्रेनिया, मूड डिसआर्डर, बायोपोलर , डिप्रेशन, फोबिक एनेक्जाइटी, पैनिक डिसआर्डर, सोशन फोबिया, आब्सेसिव कपलसिव डिसअर्डर, मिर्गी, स्ट्रेस एंड एडजेस्टमेंट सहित कई है। रिपोर्ट के मुताबिक पुरूषों में मानसिक रोग की परेशानी महिलाओं के मुकाबले थोडा अधिक है देखा गया है कि 6.51 फीसदी पुरूष एवं 5.63 फीसदी महिलाएं मानिसक रोग की शिकार है। ग्रामीण क्षेत्र के 5.17, शहरी 5.30 जबकि मेंट्रो अर्बन( महानागर) में रहने वाले 13.72 फीसदी किसी न किसी मानसिक रोग के चपेट में है।

वैवाहिक स्थित                 मानिसक रोग प्रतिशत
कुंवारे
4.36
विवाहित
6.57
विधवा, तलाक शुदा, अलग रह रहे
11.50


उम्र            मानसिक रोग प्रतिशत
18–29
3.83
30–39
6.89
40–49
9.30
50–59
8.02
60 से अधिक
7.06