सोमवार, 21 सितंबर 2015

बच्चों को मोटापे से बचाने में प्रोटीन युक्त आहार देने से उनमें मोटापे को रोका जा सकता है

कुमार संजय, लखनऊ1जवानी की दहलीज पर कदम रखने वाले आठ से दस फीसद शहरी मोटापे के शिकार है खास तौर पर वह बच्चे जो शारीरिक रूप से एक्टिव नहीं है। यह मोटापा उनमें जवानी में तमाम तरह की परेशानी खड़ी कर सकता है। संजय गांधी पीजीआइ की पोषण विशेषज्ञ निरूपमा सिंह कहती है स्वस्थ रहना अच्छी बात है, लेकिन मोटापा ठीक नहीं है। बच्चों को मोटापे से बचाने में प्रोटीन युक्त आहार देने से उनमें मोटापे को रोका जा सकता है। देखा गया है कि छोटे बच्चे या टीनेजर्स हमेशा डेरी उत्पाद जैसे दूध, दही, मीट या अंडा खाने से दूर भागते हैं।1नाश्ते में इस प्रोटीन निर्मित आहार को लेने से अधिक वजनदार टीनेजर्स अपना वजन कम कर सकते हैं। इंटरनेशनल जरनल ऑफ ओबेसिटी के एक शोध का हवाला देते हुए कहती है कि टीनेजर्स के साधारण प्रोटीन वाले नाश्ते और ज्यादा प्रोटीन वाले नाश्ते के फायदों की तुलना की जो नाश्ता नहीं करते हैं उनमें भी शोध हुआ। शोध रिपोर्ट के मुताबिक अध्ययन से यह जानने की कोशिश की गई कि जो लोग सुबह नाश्ता करने से चूकते हैं, उन्हें अगर नाश्ता करने को दिया जाए, तो क्या उनके वजन पर प्रभाव पड़ेगा या नहीं। इस अध्ययन से पता चला कि नाश्ते में 35 ग्राम प्रोटीन लेने से भूख लगना, खाना खाने की इच्छा और शरीर में उत्पन्न हो रहे फैट को रोका जा सकता है। साथ ही ग्लूकोज लेवल पर नियंत्रण रखा जा सकता है। 35 ग्राम प्रोटीन की मात्र लेने का मतलब, दूध, दही, अंडा और मीट को मिलाकर उच्च क्वालिटी की सामग्री को अपने आहार में शामिल करना है।
1अध्ययन करने के लिए शोधकर्ताओं ने वजनदार टीनेजर्स को दो ग्रुप में बांटा। एक जो टीनेजर्स अपना साधारण या •यादा प्रोटीन वाला नाश्ता हफ्ते में पांच बार खाने से चूकते हैं और दूसरा जो टीनेजर्स अपना नाश्ता हफ्ते में सात बार खाने से चूकते हैं। तीसरा ग्रुप जिसने अपना नाश्ता 12 हफ्तों तक नहीं खाया। साधारण प्रोटीन वाला नाश्ता, जिसमें दूध और अन्य शामिल हैं, उसमें 13 ग्राम प्रोटीन होता है। वहीं, ज्यादा प्रोटीन वाले नाश्ते में 35 ग्राम प्रोटीन होता है।1कुमार संजय, लखनऊ1जवानी की दहलीज पर कदम रखने वाले आठ से दस फीसद शहरी मोटापे के शिकार है खास तौर पर वह बच्चे जो शारीरिक रूप से एक्टिव नहीं है। यह मोटापा उनमें जवानी में तमाम तरह की परेशानी खड़ी कर सकता है। संजय गांधी पीजीआइ की पोषण विशेषज्ञ निरूपमा सिंह कहती है स्वस्थ रहना अच्छी बात है, लेकिन मोटापा ठीक नहीं है। बच्चों को मोटापे से बचाने में प्रोटीन युक्त आहार देने से उनमें मोटापे को रोका जा सकता है। देखा गया है कि छोटे बच्चे या टीनेजर्स हमेशा डेरी उत्पाद जैसे दूध, दही, मीट या अंडा खाने से दूर भागते हैं।1नाश्ते में इस प्रोटीन निर्मित आहार को लेने से अधिक वजनदार टीनेजर्स अपना वजन कम कर सकते हैं। इंटरनेशनल जरनल ऑफ ओबेसिटी के एक शोध का हवाला देते हुए कहती है कि टीनेजर्स के साधारण प्रोटीन वाले नाश्ते और ज्यादा प्रोटीन वाले नाश्ते के फायदों की तुलना की जो नाश्ता नहीं करते हैं उनमें भी शोध हुआ। शोध रिपोर्ट के मुताबिक अध्ययन से यह जानने की कोशिश की गई कि जो लोग सुबह नाश्ता करने से चूकते हैं, उन्हें अगर नाश्ता करने को दिया जाए, तो क्या उनके वजन पर प्रभाव पड़ेगा या नहीं। इस अध्ययन से पता चला कि नाश्ते में 35 ग्राम प्रोटीन लेने से भूख लगना, खाना खाने की इच्छा और शरीर में उत्पन्न हो रहे फैट को रोका जा सकता है। साथ ही ग्लूकोज लेवल पर नियंत्रण रखा जा सकता है। 35 ग्राम प्रोटीन की मात्र लेने का मतलब, दूध, दही, अंडा और मीट को मिलाकर उच्च क्वालिटी की सामग्री को अपने आहार में शामिल करना है।
1अध्ययन करने के लिए शोधकर्ताओं ने वजनदार टीनेजर्स को दो ग्रुप में बांटा। एक जो टीनेजर्स अपना साधारण या •यादा प्रोटीन वाला नाश्ता हफ्ते में पांच बार खाने से चूकते हैं और दूसरा जो टीनेजर्स अपना नाश्ता हफ्ते में सात बार खाने से चूकते हैं। तीसरा ग्रुप जिसने अपना नाश्ता 12 हफ्तों तक नहीं खाया। साधारण प्रोटीन वाला नाश्ता, जिसमें दूध और अन्य शामिल हैं, उसमें 13 ग्राम प्रोटीन होता है। वहीं, ज्यादा प्रोटीन वाले नाश्ते में 35 ग्राम प्रोटीन होता है।1

20 फीसद मार्ग दुर्घटना का कारण खर्राटा



20 फीसद मार्ग दुर्घटना का कारण खर्राटा
सोते समय खर्राटा भरना आपको उच्च रक्तचाप, डायबटीज और श्वास रोग का शिकार बना सकता है। संजय गांधी पीजीआइ के पल्मोनरी मेडिसिन के प्रोफेसर जिया हुसैन ने पत्रकार वार्ता में बताया कि बीस फीसदी रोड एक्सीडेंट का कारण रात में खर्राटे के कारण नींद पूरी न होना है। बताया कि इसकी वजह से सोते समय व्यक्ति की सांस कुछ सेकेंड के लिए सैकड़ों बार रुक जाती हैं। पुन: जब सांस आती है, तो आवाज काफी जोरदार होती है। सांस रुकने की यह अवधि एक सेकेंड से एक मिनट तक हो सकती है। श्वसन क्रिया में आने वाले इस अंतर यानी सांस के इस तरह रुकने और फिर वापस आने को एप्निया कहा जाता है। इससे रात को सोते वक्त शरीर में ऑक्सीजन की कमी और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्र बढ़ जाती है। किसी व्यक्ति की सांस नींद में एक घंटे में 15 बार से अधिक रुकती है, तो इसे गंभीर ओएसए की श्रेणी में गिना जाता है। संस्थान में 82 लोगों में स्लीप स्टडी किया तो देखा कि 50 लोगों में गंभीर स्लीप एप्निया की परेशानी थी। 1गर्दन की गोलाई अधिक तो ओएसए1मोटापे के कारण गर्दन मोटी होने से सांस मार्ग छोटा हो जाता है। पुरुषों के लिए गर्दन की माप 17 इंच और महिलाओं के लिए 16 इंच से अधिक नहीं होनी चाहिए। इससे अधिक होने पर ओएसए का खतरा बढ़ जाता है। ओएसए होने की संभावना उन लोगों में दोगुनी हो जाती है, जिन्हें रात में अक्सर नाक बंद होने की समस्या रहती है। 1क्या है स्लीप स्टडी1ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया (ओएसए) की जांच स्लीप स्टडी या पॉलीसोम्नोग्राफी द्वारा की जाती है। सोते समय रोगी के सर, छाती, दोनों हाथ व पैर समेत शरीर के विभिन्न हिस्सों में सेंसर लगा दिये जाते हैं, जो नींद की स्थिति में रोगी की सांस, पल्स ऑक्सीमेट्री (ऑक्सीजन), खर्राटों की आवाज व उसकी तीव्रता, हृदय की धड़कन (ईकेजी), मस्तिष्क की तरंगों (ईईजी), शरीर की करवट की स्थिति, सीने और आंखों की स्थिति से जुड़ी गतिविधियों का पता लगाते हैं। संस्थान में यह जांच 800 रुपये में होती है।1बेहतर उपचार है सीपीएपी1ओएसए का सबसे बेहतर उपचार है-कंटिन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर (सीपीएपी) यानी सतत एयर प्रेशर थेरैपी. यह एक छोटा पोर्टेबल मैकेनिकल डिवाइस है। शरीर में पर्याप्त मात्र में ऑक्सिजन की आपूर्ति हो पाती है। संस्थान यह मशीन ट्रायल के लिए भी उपलब्ध कराता है। किस्त पर कंपनी से दिलवाने की कोशिश करता है।6खर्राटे के कारण हो सकती है ब्लड प्रेशर और डायबटीज की परेशानी

मच्छर ढा रहे इंसेफ्लाइटिस का कहर

मच्छर ढा रहे इंसेफ्लाइटिस का कहर
बरसात के मौसम में दिमागी बुखार यानी इंसेफ्लाइटिस का कहर शुरू हो जाता है। इसमें जापानी इंसेफ्लाइटिस और एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम नामक दो बीमारियां होती हैं। दोनों को ही सामान्य भाषा में इंसेफ्लाइटिस कहा जाता है। इंसेफ्लाइटिस के सबसे अधिक शिकार तीन से 15 साल के बच्चे होते हैं। संजय गांधी पीजीआइ के तंत्रिका तंत्र विशेषज्ञ प्रो.संजीव झा कहते है कि यह बीमारी जुलाई से दिसंबर के बीच फैलती है। सितंबर-अक्टूबर में बीमारी का कहर सबसे ज्यादा होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जितने लोग इंसेफ्लाइटिस से ग्रसित होते हैं, उनमें से केवल 10 प्रतिशत में ही दिमागी बुखार के लक्षण जैसे झटके आना, बेहोशी और कोमा की स्थिति आती है। इनमें 50 से 60 प्रतिशत मरीजों की मौत हो जाती है। बचे हुए मरीजों में से लगभग आधे लकवाग्रस्त हो जाते हैं। उनकी आंख और कान ठीक से काम नहीं करते हैं। जिंदगी भर दौरे आते रहते हैं। मानसिक अपंगता होती है।
पंद्रह साल तक के बच्चों में अधिक है खतरा
टीके से रखे अपने बच्चों को सुरक्षित
घर को साफ सुथरा रखें। इसके अलावा मच्छरों से बचाव के लिए कीटनाशक का प्रयोग करें। रात में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। इंसेफ्लाइटिस देने वाले मच्छर शाम को ही काटते हैं, इसलिए शाम को बाहर निकलते समय शरीर को ढककर रहें। बच्चों को इंसेफ्लाइटिस का टीका जरूर लगवाएं, इसे जेई वैक्सीन के टीके लगवाने होते हैं। यह शून्य से 15 साल तक के बच्चों को लगाया जाता है।

डेंगू में प्लेटलेट्स काउंट 10,000 से कम तो है प्लेटलेट्स की जरूरत

जय गांधी पीजीआई के क्लीनिकल इम्यूनोलाजी विभाग के प्रो.विकास अग्रवाल, हिमैटोलाजी विभाग की प्रमुख प्रो.सोनिया नित्यानंद, सामान्य अस्पताल की की डॉ. प्रेरणा कपूर और माइक्रोबायलोजी विभाग की डॉ. रिचा मिश्र आदि ने पत्रकारवार्ता में कहा कि
जागरण संवाददाता, लखनऊ : डेंगू के उन मरीजों में अधिक खतरा है, जिन्हे दोबारा डेंगू हुआ है। इन लोगों में डेंगू शॉक सिंड्रोम का अधिक खतरा रहता है। डेंगू के एक फीसद मरीज ही गंभीर होते हैं। इन मरीजों को भर्ती की जरूरत होती है। जिस मरीज का प्लेटलेट्स काउंट 10,000 से कम है, उसे प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूजन की जरूरत नहीं होती।1यह धारणा गलत है कि डेंगू में मौत प्लेटलेट्स के कारण होती है। अनुचित प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूजन से नुकसान हो सकता है। डेंगू में मौत का कारण असल में कैपिलरी लीकेज है। लीकेज की हालत में इंट्रावैस्कुलर कंपार्टमेंट में खून की कमी हो जाती है और कई सारे अंग काम करना बंद कर देते हैं। इस तरह की लीकेज होने तुरंत सलाह लेने की जरूर है। संजय गंधी पीजीआई के शरीर प्रतिरक्षा विशेषज्ञ प्रो.विकास अग्रवाल कहते है कि नब्ज में 20 की बढ़ोतरी, रक्तचाप में 20 की कमी, उच्च और निम्न बीपी में 20 से कम का अंतर हो और बाजू पर 20 से ज्यादा चकत्ते हों तो ये गंभीर खतरे के लक्षण होते हैं। इसलिए तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। डेंगू से पीड़ित लोगों को मेडिकल सलाह लेनी चाहिए, आराम करना चाहिए और तरल आहार लेते रहना चाहिए। संस्थान विभागों की रोस्टर वाइज ड्यूटी लगी है जो इमरजेंसी में मरीज के अटेंड करते है। दस बेड सुरक्षित रखा गया है।

बुधवार, 6 अगस्त 2014

brain tumer


baretic surgery


hepatities


docters



सोमवार, 12 मई 2014

पीलिया


रक्त में लाल कणों की निश्चित आयु होती है | यदि किसी कारण इनकी आयु कम हो जाए और ये जल्दी ही अधिक मात्रा में नष्ट होने लगें तो पीलिया होने लगता है | यदि जिगर का कार्य भी पूरी तरह न हो तो पीलिया हो जाता है | हमारे रक्त में बिलीरुबिन नामक पीले रंग का पदार्थ होता है | यह पदार्थ लाल कणों के नष्ट होने पर निकलता है इसलिए शरीर में पीलापन आने लगता है | त्वचा का पीलापन ही पीलिया कहलाता है | रोग बढ़ने पर सारा शरीर हल्दी की तरह पीला दिखाई देता है | इस रोग में जिगर, पित्ताशय , तिल्ली और आमाशय आदि खराब होने की संभावना रहती है | अत्यंत तीक्ष्ण पदार्थों का सेवन, अधिक खटाई , गर्म तथा चटपटे और पित्त को बढ़ने वाले पदार्थों का अधिक सेवन,शराब अधिक पीने आदि कारणों से वात , पित्त और कफ कुपित होकर पीलिया को जन्म देते हैं| कुछ प्रयोग निम्न प्रकार हैं -----
1- ५० ग्राम मूली के पत्ते का रस निचोड़कर १० ग्राम मिश्री मिला लें, और बासी मुहँ पियें |
2- पीलिया के रोगी को जौं ,गेंहू तथा चने की रोटी ,खिचड़ी ,हरी सब्ज़ियाँ,मूंग की दाल तथा नमक मिला हुआ मट्ठा आदि देना चाहिए |
3- तरल पदार्थों का सेवन अधिक करना चाहिए |
4- रोगी को भोजन बिना हल्दी का देना चाहिए तथा मैदे से बनी वस्तुएं ,खटाई ,उड़द ,सेम ,सरसों युक्त गरिष्ठ भोजन नहीं देना चाहिए |
5- कच्चे पपीते का खूब सेवन करें | पका हुआ पपीता भी पीलिया में बहुत लाभदायक होता है |
6- उबली हुई बिना मसाले व मिर्च की सब्ज़ी का सेवन करें |
7- मकोय के ४ चम्मच रस को हल्का गुनगुना करके सात दिन तक सेवन करें ,लाभ होगा |
8- पीलिया के रोगी को पूर्णतः विश्राम करना चाहिए तथा नमक का सेवन भी कम करना चाहिए |
9- अनार के रस के सेवन से रुक हुआ मल निकल जाता है और पीलिया में फायदा होता है |
10- आंवला रस पीने से भी पीलिया दूर होता है |

केला खाने से आप अपनी पूरी जिन्दगी स्वस्थ्य

भारत में केला हर जगह पाया जाता है और इसकी सबसे अच्छी किस्में भारत में ही होती हैं | भले ही रोज एक सेब खाने से आप डॉक्टर के पास जाने से बच सकते हैं, लेकिन केला खाने से आप अपनी पूरी जिन्दगी स्वस्थ्य रह सकते हैं। रिसर्च के मुताबिक केला आपको कई बीमारियों से बचा सकता है।
तो आइए जानते हैं केला खाने का स्वास्थ्यलाभ -

१ - केला खिलाड़ियों का प्रिय फल है क्योंकि यह तुरंत एनर्जी प्रदान करता है। सुबह नाश्ते में केला खाने से ऊर्जा बढती है और सूकरोज़, फ्रक्टोज़ और ग्लूकोज जैसे पोषक तत्व भी मिलते हैं। यदि आप दिन भर भूखे प्यासे रहते हैं, तो केवल केला ही खा लें देखिये अन्य फल के मुकाबले केले से तुरंत एनर्जी मिलेगी।

२- केले में प्रोटीन पाया जाता है, जो कि दिमाग को आराम देता है इसलिए डिप्रेशन दूर करने में सहायक है |

३- दूध के साथ केला और शहद मिला कर पीने से अनिद्रा की समस्या दूर हो जाती है।

४- केले में रेशा पाया जाता है, जिससे पाचन क्रिया मजबूत बनती है। गैस्ट्रिक व कब्ज़ की बीमारी वाले लोंगो के लिये केला बहुत प्रभावशाली उपचार है। अक्सर यात्रा के दौरान कब्ज की शिकायत हो जाती है। इसको दूर करने के लिये केला एक अच्छा विकल्प है |

५- केला शरीर के खून में हीमोग्लोबिन को बढाता है। जिससे एनीमिया की शिकायत दूर हो जाती है।वे लोग जो एनीमिया से प्रभावित हैं, उन्हें अपने भोजन में केला शामिल करना चाहिये।

६-केले में पोटैशियम पाया जाता है, जो उच्चरक्तचाप के रोगियों के लिए विशेष लाभकारी होता है| केला खाने से उच्चरक्तचाप सामान्य बना रहता है |

७- दो केले लगभग १०० ग्राम दही के साथ सेवन करने से दस्त व पेचिश में लाभ होता है |

८- केले पर चीनी और इलायची डालकर खाने से खट्टी डकारें आनी बंद हो जाती हैं |

पेट में कीड़े :छुटकारा पाने के कुछ सरल उपाय

पेट में कीड़े

कई बार किन्ही कारणों से पेट में कीड़े हो जाते हैं जिनसे काफी पीड़ा होती है | पेट में पाए जाने वाले कीड़ों के सामान्य लक्षण है --- सोते हुए दाँत पीसना ,शरीर का रंग पीला या काला होना , भोजन से अरुचि , होंठ सफ़ेद होना , शरीर में सूजन होना आदि | तो आइए जानते हैं इनसे छुटकारा पाने के कुछ सरल उपाय :-----

1-अनार के छिलकों को सुखाकर चूर्ण बना लें | यह चूर्ण दिन में तीन बार एक -एक चम्मच लें , इससे पेट के कीड़े नष्ट हो जाते हैं |

2 -टमाटर को काटकर ,उसमें सेंधा नमक और कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर सेवन करें | इस प्रयोग से पेट के कीड़े मर कर गुदामार्ग से बाहर निकल जाते हैं |

3-लहसुन की चटनी बनाकर उसमें थोड़ा-सा सेंधा नमक मिलाकर सुबह -शाम खाने से पेट के कीड़े नष्ट होते हैं |

4 -नीम के पत्तों का रस शहद में मिलकर पीने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं |

5 -कच्चे केले की सब्ज़ी 7 -8 दिन तक लगातार सेवन करने से पेट के कीड़े मर जाते हैं |

6 -तुलसी के पत्तों का एक चम्मच रस दिन में दो बार पीने से पेट के कीड़े मरकर मल के साथ बाहर निकल जाते हैं |

7 - अजवायन का 1-2 ग्राम चूर्ण छाछ के साथ पीने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं | यदि छोटे बच्चों के पेट में कीड़े हो गए हों तो आप उन्हें लगभग आधा ग्राम काला नमक व आधा ग्राम अजवायन का चूर्ण मिलकर सोते समय गुनगुने पानी से दें लाभ होगा |

मिर्गी रोग होने के और भी कई कारण हो सकते हैं

मिर्गी रोग होने के और भी कई कारण हो सकते हैं जैसे- बिजली का झटका लगना, नशीली दवाओं का अधिक सेवन करना, किसी प्रकार से सिर में तेज चोट लगना, तेज बुखार तथा एस्फीक्सिया जैसे रोग का होना आदि। इस रोग के होने का एक अन्य कारण स्नायु सम्बंधी रोग, ब्रेन ट्यूमर, संक्रमक ज्वर भी है। वैसे यह कारण बहुत कम ही देखने को मिलता है।
मिर्गी एक ऐसी बीमारी है जिसे लेकर लोग अक्सर बहुत ज्यादा चिंतित रहते हैं। हालांकि रोग चाहे जो भी हो, हमेशा परेशान करने वाली तथा घातक होती है। इसलिए हमें किसी भी मायने में किसी भी रोग के साथ कभी भी बेपरवाह नहीं होना चाहिए। खासतौर पर जब बात मिर्गी जैसे रोगों की हो तो हमें और भी सतर्क रहना चाहिए।
मिर्गी के रोगी अक्सर इस बात से परेशान रहते हैं कि वे आम लोगों की तरह जीवन जी नहीं सकते। उन्हें कई चीजों से परहेज करना चाहिए। खासतौर पर अपनी जीवनशैली में आमूलचूल परिवर्तन करना पड़ता है जिसमें बाहर अकेले जाना प्रमुख है।
यह रोग कई प्रकार के ग़लत तरह के खान-पान के कारण होता है। जिसके कारण रोगी के शरीर में विषैले पदार्थ जमा होने लगते हैं, मस्तिष्क के कोषों पर दबाब बनना शुरू हो जाता है और रोगी को मिर्गी का रोग हो जाता है।
दिमाग के अन्दर उपलब्ध स्नायु कोशिकाओं के बीच आपसी तालमेल न होना ही मिर्गी का कारण होता है। हलांकि रासायनिक असंतुलन भी एक कारण होता है।

-अंगूर का रस मिर्गी रोगी के लिये अत्यंत उपादेय उपचार माना गया है। आधा किलो अंगूर का रस निकालकर प्रात:काल खाली पेट लेना चाहिये। यह उपचार करीब ६ माह करने से आश्चर्यकारी सुखद परिणाम मिलते हैं।

-मिट्टी को पानी में गीली करके रोगी के पूरे शरीर पर प्रयुक्त करना अत्यंत लाभकारी उपचार है। एक घंटे बाद नहालें। इससे दौरों में कमी होकर रोगी स्वस्थ अनुभव करेगा।
-मानसिक तनाव और शारिरिक अति श्रम रोगी के लिये नुकसान देह है। इनसे बचना जरूरी है।
-मिर्गी रोगी को २५० ग्राम बकरी के दूध में ५० ग्राम मेंहदी के पत्तों का रस मिलाकर नित्य प्रात: दो सप्ताह तक पीने से दौरे बंद हो जाते हैं। जरूर आजमाएं।
-रोजाना तुलसी के २० पत्ते चबाकर खाने से रोग की गंभीरता में गिरावट देखी जाती है।
-पेठा मिर्गी की सर्वश्रेष्ठ घरेलू चिकित्सा में से एक है। इसमें पाये जाने वाले पौषक तत्वों से मस्तिष्क के नाडी-रसायन संतुलित हो जाते हैं जिससे मिर्गी रोग की गंभीरता में गिरावट आ जाती है। पेठे की सब्जी बनाई जाती है लेकिन इसका जूस नियमित पीने से ज्यादा लाभ मिलता है। स्वाद सुधारने के लिये रस में शकर और मुलहटी का पावडर भी मिलाया जा सकता है।
-गाय के दूध से बनाया हुआ मक्खन मिर्गी में फ़ायदा पहुंचाने वाला उपाय है। दस ग्राम नित्य खाएं।
गर्भवती महिला को पड़ने वाला मिर्गी का दौरा जच्चा और बच्चा दोनों के लिए तकलीफदायक हो सकता है। उचित देखभाल और योग्य उपचार से वह भी एक स्वस्थ शिशु को जन्म दे सकती है।
मिर्गी की स्थिति में गर्भ धारण करने में कोई परेशानी नहीं है। इस दौरान गर्भवती महिलाएं डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयां लें। मां के रोग से होने वाले बच्चे पर कोई असर नहीं पड़ता। गर्भवती महिला समय-समय पर डॉक्टर से जांच कराती रहें, पूरी नींद लें, तनाव में न रहें और नियमानुसार दवाइयां लेती रहें। इससे उन्हें मिर्गी की परेशानी नहीं होगी। गर्भवती महिला के साथ रहने वाले सदस्यों को भी इस रोग की थोड़ी जानकारी होना आवश्यक है।

शुक्रवार, 21 मार्च 2014

जीभ खोलती है आपकी सफाई की पोल!

फेमस अमेरिकी सिंगर ऐंड ऐक्ट्रेस केर को मशहूर युवा पॉप गायिका माइली सायरस से प्रस्तुति देते वक्त अपनी जीभ बाहर निकालने से मना किए अभी बहुत दिन नहीं बीते हैं, कि विशेषज्ञों ने जीभ को लेकर बहुत ही दिलचस्प तथ्य का खुलासा किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, जीभ को देखकर किसी व्यक्ति की स्वच्छता के प्रति उसके रुख एवं उस व्यक्ति के स्वास्थ्य के बारे में जाना जा सकता है। आप अपने किसी ऐसे मित्र या किसी ऐसी लोकप्रिय हस्ती के बारे में सोचिए जो अक्सर अपनी जीभ बाहर निकालता रहता है। अगर उसकी जीभ पर मोटी सफेद पर्त दिखाई दे निश्चित ही यह उसके लिए बहुत बड़ी परेशानी का सबब बन सकती है।

  दांतों में ब्रश करना जितना महत्वपूर्ण है, जीभ को स्वच्छ रखना भी उतना ही जरूरी है। जीभ साफ करने से पहले टंग क्लीनर को साफ कर लेना चाहिए। टंग क्लीनर से जीभ पर बहुत दबाव नहीं डालना चाहिए, और 2-3 बार हल्के हाथों से जीभ की सफाई करनी चाहिए। अपने मुंह में हानिकारक जीवाणुओं को पनपने से रोकने के लिए जीभी (टंग क्लीनर) का प्रयोग अवश्य करें।

वेबसाइट पैरेंट्यून डॉट कॉम ने मुंह से संबंधित बीमारियों की विशेषज्ञ सोनाली बस्सी के हवाले से कहा कि गाढ़े रंगों वाले खाद्य पदार्थ खाने से भी जीभ का रंग परिवर्तित हो जाता है। हल्दी, काले अंगूर, जामुन या इसी तरह के गहरे रंग वाले खाद्य पदार्थ खाने से आपकी जीभ का रंग बदल सकता है। लेकिन यह इतना हानिकारक नहीं होता, तथा टंग क्लीनर की सहायता से आसानी से साफ किया जा सकता है। धातु या प्लास्टिक से बने टंग क्लीनर का उपयोग किया जा सकता है। कई कंपनियां इस तरह का ब्रश भी बनाती हैं जिसके पिछले हिस्से का उपयोग जीभ को साफ करने के लिए किया जा सकता है।
दंत चिकित्सक अयान मजूमदार ने बताया कि जीभ साफ करने के लिए ब्रश के पिछले हिस्से का उपयोग सुरक्षित है, लेकिन ब्रश वाले हिस्से से ऐसा करना हानिकारक हो सकता है। अध्ययनों में यह साबित हो चुका है कि सामान्य ब्रश की अपेक्षा जीभ साफ करने की सुविधा से युक्त ब्रश कहीं प्रभावी होते हैं। मजूमदार ने हालांकि धातु की अपेक्षा प्लास्टिक की जीभी को अधिक सुरक्षित बताया, क्योंकि जंग लगने के कारण धातु का टंग क्लीनर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

जीभ को स्वच्छ रखने का दूसरा सबसे बेहतर उपाय है माउथवॉश का उपयोग करना। मजूमदार ने बताया कि सांसों की दुर्गंध का सबसे बड़ा कारण जीभ पर बैठी गंदगी ही होती है। हमारे पास कम से कम 70 फीसदी लोग इसी तरह की शिकायतें लेकर आते हैं। अपनी सांसों को तरोताजा बनाए रखने के लिए दिन में कम से कम एक बार माउथवॉश का उपयोग करें।

मुंह को नमक के पानी से धोकर भी स्वच्छ रखा जा सकता है। बस्सी ने बताया कि आधे ग्लास गुनगुने पानी में आधा चम्मच नमक डालें। इस पानी से अपने मुंह को दिन में 5-6 बार धोएं। जीभ पर खाने के बाद जमा गंदगी कई तरह के रोगों को जन्म दे सकती है। एकता सिंह ने बताया कि कई बार जीभ के गंदे होने के कारण डिहाइड्रेशन की शिकायत भी हो सकती है। इसलिए घर से निकलते हुए इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि चेहरे और दांतों के साथ-साथ आपकी जीभ का भी स्वच्छ रहना बेहद जरूरी है। 
 
 


drink two liter water and save kidney


kidney save


शहद ठीक करेगा सीनें मे जलन


मोटापा एवं अनेक रोगों से मुक्त होने का अचूक उपाय


मोटापा एवं अनेक रोगों से मुक्त होने का अचूक उपाय

मेथी दाना -250 ग्राम ,
अजवाइन-100 ग्राम ,
काली जीरी-50 ग्राम ।

उपरोक्त तीनो चीज़ों को साफ़ करके हल्का सा सेंक लें ,फिर तीनों को मिलाकर मिक्सर मेंइसका पॉवडरबना लें और कांच की किसी शीशी में भर कर रख लें । रात को सोते समय 1/2 चम्मच पॉवडर एक गिलास कुनकुने पानी के साथ नित्य लें ,इसके बाद कुछ भी खाना यापीना नहीं है ।इसे सभी उम्र के लोग ले सकते हैं

फायदा पूर्ण रूप से 80-90 दिन में हो जायेगा ।

लाभ :-
इस चूर्ण को नित्य लेने से शरीर के कोने -कोने में जमा पड़ी सभी गंदगी (कचरा )मल और पेशाब द्वारा निकलजाता है ,
फ़ालतू चर्बी गल जाती है ,
चमड़ी की झुर्रियां अपने आप दूर हो जाती है ,
और शरीर तेजस्वी और फुर्तीला होजाता है ।

अन्य लाभ इस प्रकार हैं ----------

1. गठिया जैसा ज़िद्दी रोग दूर हो जाताहै ।

2. शरीर की रोग प्रतिकारक शक्ति को बढ़ाता है ।

3. पुरानी कब्ज़ से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है ।

4. रक्त -संचार शरीर में ठीक से होने लगता है ,शरीर की रक्त -नलिकाएं शुद्ध हो जाती हैं ,रक्त में सफाई और शुद्धता की वृद्धि होती है ।

5. ह्रदय की कार्य क्षमता में वृद्धिहोती है ,कोलेस्ट्रोलकम होता है ,जिस से हार्ट अटैक का खतरा नहीं रहता |

6. हड्डियां मजबूत होती हैं ,कार्य करने की शक्तिबढ़ती हैं ,स्मरण शक्ति में भी वृद्धि होतीहै ।थकान नहीं होती है ।

7. आँखों का तेज़ बढ़ता है ,बहरापन दूर होता है ,बालों का भी विकास होता है,दांत मजबूत होते हैं ।

8. भूतकाल में सेवन की गयी एलोपैथिकदवाओं के साइड -इफेक्ट्स से मुक्ति मिलतीहै ।

9. खाना भारी मात्रा में या ज्यादाखाने के बाद भी पच जाता है (इसका मतलब येनहीं है कि आप जानबूझ कर ज्यादा खा ले) ।

10. स्त्रियों का शरीर शादी के बादबेडौल नहीं होता ,शेप में रहता है ,,शादी के बाद होने वालीतकलीफें दूर होती हैं ।

11. चमड़ी के रंग में निखार आता है ,चमड़ी सूख जाना ,झुर्रियां पड़ना आदि चमड़ी के रोगों से शरीर मुक्त रहता है ।

12. शरीर पानी ,हवा ,धूपऔर तापमान द्वारा होने वाले रोगों से मुक्त रहता है

13. डाइबिटीज़ काबू में रहती है ,चाहें तोइसकी दवा ज़ारी रख सकते हैं।

14. कफ से मुक्ति मिलती है ,नपुंसकता दूर होती है,,व्यक्ति का तेज़ इस से बढ़ता है ,जल्दी बुढ़ापा नहीं आता ,। उम्र बढ़ जाती है |

15. कोई भी व्यक्ति ,किसी भी उम्र का हो ,इस चूर्ण का सेवन कर सकता
है,मात्रा का ध्यान रखें ।