गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025

ट्रांसप्लांट के बाद भी दौड़ती है जिंदगी

 





ट्रांसप्लांट के बाद भी दौड़ती है जिंदगी


किडनी ट्रांसप्लांट के बाद भी थमी नहीं जिंदगी, बाराबंकी के बलबीर सिंह ने ओलंपिक में जीते पदक


कुमार संजय

किडनी ट्रांसप्लांट के बाद जिंदगी थमती नहीं है, अगर हिम्मत और हौसला हो तो इंसान हर मुश्किल को मात दे सकता है। बाराबंकी के बलबीर सिंह इसका जीवंत उदाहरण हैं। 2011 में उनका किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था, लेकिन आज वह ऑर्गन ट्रांसप्लांट ओलंपिक में चार पदक जीतकर न सिर्फ देश का मान बढ़ा चुके हैं, बल्कि उन तमाम मरीजों को राह दिखा रहे हैं, जो ट्रांसप्लांट के बाद खुद को कमजोर समझते हैं।


बलबीर नियमित रूप से संजय गांधी पीजीआई के नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. नरायन प्रसाद से फॉलोअप कराते हैं और डॉक्टर की सलाह से दवाएं समय पर लेते हैं। वे बताते हैं कि अनुशासन और मेहनत से वह पूरी तरह फिट हैं। हाल ही में 21 अगस्त को जर्मनी में आयोजित ऑर्गन ट्रांसप्लांट ओलंपिक में बैडमिंटन में कांस्य पदक जीतकर लौटे हैं। इस दौरान उन्होंने हंगरी और ब्रिटेन के खिलाड़ियों को हराकर यह उपलब्धि हासिल की। इससे पहले वह अर्जेंटीना, स्पेन और ब्रिटेन में आयोजित प्रतियोगिताओं में गोल्ड और सिल्वर पदक जीत चुके हैं।


बलबीर रोजाना दो घंटे पसीना बहाकर अभ्यास करते हैं। उनका कहना है कि किडनी ट्रांसप्लांट के बाद फिट रहने के लिए नियमित व्यायाम और दवा बेहद जरूरी है। अंगदाता का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा— “अगर अंगदान न होता तो शायद यह जिंदगी और यह उपलब्धियां कभी संभव न होतीं।”


उन्होंने लोगों से अपील की कि अंगदान के लिए आगे आएं, खासकर ब्रेन डेड व्यक्ति के परिजन साहस दिखाकर अंगदान का निर्णय लें। यही कदम किसी और की जिंदगी को नई दिशा दे सकता है।


प्रो. नारायण प्रसाद, विभागाध्यक्ष, नेफ्रोलॉजी, एसजीपीजीआई ने कहा—

“बलबीर जैसे मरीज हमारी प्रेरणा हैं। किडनी ट्रांसप्लांट के बाद अगर मरीज अनुशासन से दवाएं लें, नियमित जांच कराएं और जीवनशैली पर नियंत्रण रखें तो वह सामान्य व्यक्ति की तरह जीवन जी सकते हैं। बलबीर का प्रदर्शन यह संदेश देता है कि ट्रांसप्लांट कोई बाधा नहीं बल्कि नई जिंदगी की शुरुआत है।”

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