“महत्वपूर्ण क्षणों के लिए तैयार रहें: हृदय सुरक्षा और सीपीआर प्रशिक्षण से सशक्त हुआ समाज”
भारत में हर वर्ष 6–7 लाख लोग अचानक हृदय गति रुकने से जान गंवाते हैं
लखनऊ। जीवनशैली जनित हृदय रोगों और अचानक हृदय गति रुकने जैसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए जन-तैयारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 27 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी, प्रज्ञा, गोमतीनगर में हृदय संबंधी जीवनशैली जागरूकता एवं सीपीआर प्रशिक्षण कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला एनएडीटी आरसी लखनऊ द्वारा आयोजित “अच्छे स्वास्थ्य” पर आधारित दो दिवसीय कार्यक्रम का हिस्सा थी। कार्यक्रम का नेतृत्व आईआरएस के अपर महानिदेशक डॉ. नील जैन ने किया, जबकि समन्वय की जिम्मेदारी संयुक्त निदेशक आईआरएस अन्विका शर्मा ने निभाई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संजय गांधी पीजीआई के निदेशक प्रो. आर.के. धीमन ने कहा कि हृदय रोग की रोकथाम में जीवनशैली में सुधार सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने वजन, रक्तचाप, मेटाबॉलिक सिंड्रोम और शारीरिक निष्क्रियता को नियंत्रित करने पर जोर देते हुए कहा कि समय रहते की गई रोकथाम जीवन भर सुरक्षा प्रदान कर सकती है।
एसजीपीजीआईएमएस के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. आदित्य कपूर ने सीपीआर को “चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि जीवन कौशल” बताते हुए आम नागरिकों को इसे सीखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत में हर वर्ष 6–7 लाख लोग अचानक हृदय गति रुकने से जान गंवाते हैं और पहले तीन मिनट में की गई कार्रवाई ही जीवन और मृत्यु के बीच अंतर तय करती है। उन्होंने धूम्रपान छोड़ने, रक्तचाप और लिपिड स्तर नियंत्रित रखने की अपील की।
कार्यशाला में अचानक हृदय गति रुकने की पहचान, सीपीआर की सही तकनीक और स्वचालित बाह्य डिफिब्रिलेटर (एईडी) के उपयोग पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण प्रो. आदित्य कपूर और एसजीपीजीआईएमएस के कैथ लैब प्रभारी नर्स श्री शिवदयाल द्वारा संचालित किया गया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि सीपीआर-प्रशिक्षित समाज का निर्माण अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें