शनिवार, 24 जनवरी 2026

एसजीपीजीआई में कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की बारीकियों पर हैंड्स-ऑन डिसेक्शन,

 




एसजीपीजीआई में कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की बारीकियों पर हैंड्स-ऑन डिसेक्शन,


 विशेषज्ञों ने साझा किया व्यावहारिक अनुभव



लखनऊ। कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी में सबसे अहम माने जाने वाले टेम्पोरल बोन डिसेक्शन और सटीक सर्जिकल तकनीक पर आज संजय गांधी पीजीआई में विशेष वैज्ञानिक सत्र आयोजित किया गया। यह सत्र हैंड्स-ऑन कॉक्लियर इम्प्लांट वर्कशॉप का प्रमुख हिस्सा रहा, जिसमें देशभर से आए ईएनटी सर्जनों ने प्रत्यक्ष अभ्यास के माध्यम से सर्जरी की जटिल संरचनाओं को समझा।

वर्कशॉप के मुख्य समन्वयक एवं हेड एंड नेक सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. अमित केशरी ने बताया कि कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी केवल मशीन लगाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह माइक्रो-एनाटॉमी और अत्यधिक सटीकता पर आधारित सर्जरी है। उन्होंने कहा कि टेम्पोरल बोन की संरचना को सही तरीके से समझना सर्जरी की सफलता और मरीज की सुनने की क्षमता लौटाने के लिए बेहद जरूरी है।

इस वैज्ञानिक कार्यशाला में सर्जरी से पहले की ऑडियोलॉजिकल जांच, सीटी और एमआरआई द्वारा कान की आंतरिक संरचना का मूल्यांकन, इम्प्लांट के इलेक्ट्रोड चयन और सर्जिकल अप्रोच पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही वेरिया तकनीक और पोस्टेरियर टायम्पैनोटॉमी जैसी उन्नत सर्जिकल तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया।

प्रो. केशरी के अनुसार, समय पर और सही तकनीक से किया गया कॉक्लियर इम्प्लांट बच्चों में सुनने और बोलने की क्षमता विकसित कर सकता है, जिससे वे सामान्य बच्चों की तरह जीवन जी सकते हैं। उन्होंने आम जनता से अपील की कि बधिरता को अभिशाप न मानें, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में इसके प्रभावी समाधान उपलब्ध हैं।

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