सोमवार, 12 जनवरी 2026

हर चौथा वयस्क कब्ज से परेशान, बच्चों में भी 29.6 फीसदी मामले

 







कॉन्स्टिपेशन

हर चौथा वयस्क  कब्ज से परेशान, बच्चों में भी 29.6 फीसदी मामले

फास्ट फूड और बिगड़ी जीवनशैली बनी बड़ी वजह


कुमार संजय

देश में कब्ज (कॉन्स्टिपेशन) अब केवल व्यक्तिगत परेशानी नहीं रह गई है, बल्कि यह एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में उभर रही है। संजय गांधी पीजीआई के पेट रोग विभाग में  आने वाले मरीजों में देखा गया है कि 22 फीसदी यानी लगभग हर चौथा वयस्क कब्ज की समस्या से जूझ रहा है। चिंताजनक तथ्य यह है कि बच्चों में भी कब्ज के मामले तेजी से बढ़े हैं। अध्ययनों में बच्चों में 29.6 फीसदी तक कब्ज की समस्या पाई गई है, यानी लगभग हर तीन में एक बच्चा इससे प्रभावित है।

 संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के प्रोफेसर अशोक कुमार ने बताया कि बच्चों में बढ़ता फास्ट फूड कल्चर कब्ज का सबसे बड़ा कारण बनता जा रहा है। तली-भुनी चीजें, चिप्स, पिज़्ज़ा, बर्गर और नूडल्स जैसे भोजन फाइबर की कमी पैदा करते हैं, जिससे पाचन तंत्र प्रभावित होता है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली, कम पानी पीने की आदत, मोबाइल और स्क्रीन टाइम बढ़ने से शारीरिक गतिविधि में कमी आई है। सुबह स्कूल जाने की जल्दी में बच्चे अक्सर मल त्याग की इच्छा को रोक लेते हैं, जिससे धीरे-धीरे कब्ज की आदत विकसित हो जाती है।



बवासीर और फिशर की जड़ है कब्ज


प्रो. अशोक कुमार के मुताबिक 40 से 60 फीसदी बवासीर के मामलों के पीछे कब्ज प्रमुख कारण होता है। वहीं, कब्ज से बनने वाले एनल फिशर के 10 से 15 फीसदी पुराने मामलों में संक्रमण बढ़कर फिस्टुला का रूप ले सकता है। फिस्टुला का इलाज केवल सर्जरी से ही संभव है, जबकि बवासीर में दवाओं, लेज़र और न्यूनतम इनवेसिव तकनीकों से राहत मिल जाती है।

इसके अलावा लंबे समय तक कब्ज रहने से पेल्विक फ्लोर को नुकसान, मल असंयम, यूरिन रिटेंशन, स्टरकोरल परफोरेशन (आंत में छेद), रेक्टल प्रोलैप्स और वॉल्वुलस (आंत का मुड़ना) जैसी गंभीर जटिलताएं भी हो सकती हैं।


उम्र के साथ बढ़ती है परेशानी


गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर अंशुमन एल्हेस ने बताया कि कब्ज की समस्या महिलाओं और बुजुर्गों में अधिक देखी जाती है। विशेष रूप से वृद्ध महिलाओं में यह समस्या पुरुषों की तुलना में 2 से 3 गुना तक अधिक पाई जाती है। लंबे समय तक कब्ज बना रहने पर यह केवल असुविधा नहीं, बल्कि कई गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है।


ऐसे करें कब्ज से बचाव


विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ सरल आदतें अपनाकर कब्ज से काफी हद तक बचा जा सकता है—

रोज़ाना 2–3 लीटर पानी पिएं

भोजन में फाइबर युक्त चीजें शामिल करें

मल त्याग की इच्छा को न रोकें

नियमित व्यायाम और शारीरिक गतिविधि करें

तनाव से बचें और तनाव प्रबंधन पर ध्यान दें

शराब और अत्यधिक कैफीन के सेवन से बचें

रोज़ाना तय समय पर शौचालय जाने की आदत डालें

रात का खाना सोने से 2–3 घंटे पहले करें

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