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साल दर साल बढ़ता साइबर फ्रॉड: मामलों की रफ्तार भी तेज, नुकसान की रकम ने तोड़े सारे रिकॉर्ड
ऐसे ही करें बचाव
देश में साइबर और बैंकिंग फ्रॉड लगातार बढ़ते जा रहे हैं और उपलब्ध आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को साफ तौर पर उजागर करते हैं। बीते पांच वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि जैसे-जैसे समय बीतता गया, वैसे-वैसे न सिर्फ फ्रॉड के मामलों की संख्या बढ़ी, बल्कि धोखाधड़ी से होने वाला आर्थिक नुकसान भी कई गुना हो गया।
वर्ष 2019-20 को आधार वर्ष माना जाए तो उस समय देश में 73,386 साइबर/बैंकिंग फ्रॉड के मामले दर्ज किए गए थे। इन मामलों में कुल 244.01 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। यह वह दौर था जब डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग का विस्तार तो हो रहा था, लेकिन साइबर अपराध अभी सीमित दायरे में थे।
2020-21 में मामलों की संख्या लगभग स्थिर रही, लेकिन कुल नुकसान 228.65 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। यानी मामलों में बड़ा बदलाव नहीं हुआ, पर फ्रॉड की प्रकृति अधिक संगठित होने लगी।
वर्ष 2021-22 में फ्रॉड के मामलों की संख्या घटकर 65,893 रह गई, लेकिन इसके बावजूद आर्थिक नुकसान बढ़कर 258.61 करोड़ रुपये हो गया। यह संकेत था कि अपराधी कम मामलों में ज्यादा रकम की ठगी करने लगे थे।
2022-23 में हालात तेजी से बिगड़े। इस साल फ्रॉड के मामले बढ़कर 75,800 हो गए और इससे होने वाला नुकसान सीधे 421.4 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह पहला मौका था जब नुकसान की रकम 400 करोड़ रुपये के पार गई।
सबसे गंभीर स्थिति 2023-24 में देखने को मिली। इस साल साइबर फ्रॉड के मामलों में अचानक विस्फोटक वृद्धि दर्ज की गई और मामलों की संख्या बढ़कर 2,92,800 तक पहुंच गई। इसी अवधि में धोखाधड़ी से होने वाला कुल नुकसान 2,054.6 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो पिछले साल की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग, फर्जी कॉल, ओटीपी और केवाईसी ठगी, सोशल मीडिया लिंक और ऑनलाइन निवेश फ्रॉड इसके प्रमुख कारण हैं। आंकड़े साफ बताते हैं कि जैसे-जैसे डिजिटल लेन-देन बढ़ा, वैसे-वैसे साइबर अपराधियों की सक्रियता भी कई गुना बढ़ती गई।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते साइबर सुरक्षा, बैंकिंग निगरानी और जन-जागरूकता को मजबूत नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में यह नुकसान और भी भयावह रूप ले सकता है। यह केवल आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
[16/01, 9:55 pm] Kumar Sanjay: साइबर फ्रॉड से बचने के 10 ज़रूरी उपाय
1. ओटीपी और पिन कभी साझा न करें
बैंक, पुलिस या कोई भी सरकारी संस्था कभी भी ओटीपी, एटीएम पिन या यूपीआई पिन फोन पर नहीं मांगती। ऐसा कोई कॉल आए तो तुरंत काट दें।
2. फर्जी कॉल और मैसेज से सावधान रहें
अगर कोई खुद को बैंक अधिकारी, केवाईसी टीम, कूरियर कंपनी या सरकारी अफसर बताकर कॉल करे, तो उसकी बातों पर भरोसा न करें।
👉 अचानक डर या लालच दिखाने वाले कॉल सबसे खतरनाक होते हैं।
3. अनजान लिंक पर क्लिक न करें
एसएमएस, व्हाट्सऐप या ई-मेल में आए इनाम, रिफंड, केवाईसी अपडेट या अकाउंट ब्लॉक जैसे मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक न करें।
4. यूपीआई में “कलेक्ट रिक्वेस्ट” समझकर ही स्वीकार करें
ध्यान रखें—
✔️ पैसा भेजने के लिए पिन डालते हैं
❌ पैसा पाने के लिए पिन नहीं लगता
अगर कोई पैसा भेजने के बहाने पिन डालने को कहे, तो वह फ्रॉड है।
5. मोबाइल में केवल भरोसेमंद ऐप ही डाउनलोड करें
थर्ड पार्टी वेबसाइट या फर्जी लिंक से ऐप डाउनलोड न करें। केवल गूगल प्ले स्टोर या ऐप स्टोर का ही इस्तेमाल करें।
6. सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा न करें
जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, बैंक डिटेल, लोकेशन या परिवार से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर सार्वजनिक न करें।
7. फोन में स्क्रीन लॉक और ऐप लॉक रखें
मोबाइल खो जाने या चोरी होने की स्थिति में आपका डेटा सुरक्षित रहेगा।
8. अकाउंट स्टेटमेंट और अलर्ट नियमित जांचें
बैंक एसएमएस और ई-मेल अलर्ट चालू रखें।
कोई संदिग्ध लेन-देन दिखे तो तुरंत बैंक को सूचना दें।
9. फ्रॉड होते ही तुरंत शिकायत करें
जितनी जल्दी शिकायत, उतनी ज़्यादा रकम बचने की संभावना।
✔️ हेल्पलाइन: 1930
✔️ वेबसाइट: cybercrime.gov.in
10. परिवार को भी जागरूक करें
खासतौर पर बुज़ुर्गों, बच्चों और नए स्मार्टफोन यूज़र्स को साइबर ठगी के तरीकों के बारे में जरूर बताएं।
याद रखें
डर, लालच और जल्दबाज़ी — साइबर ठगों के सबसे बड़े हथियार हैं।
सोच-समझकर कदम उठाएं, तभी आप और आपकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रहेगी।

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