शनिवार, 17 जनवरी 2026

पेरीफेरल एंजियोप्लास्टी से अंग विच्छेदन के खतरे को किया जा सकता है कम

 

पेरीफेरल एंजियोप्लास्टी से अंग विच्छेदन के खतरे को किया जा सकता है कम

लखनऊ। हाथ, पैर या शरीर के अन्य अंगों में रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में रुकावट आने पर गंभीर घाव, संक्रमण और अंततः अंग विच्छेदन जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। लेकिन अब इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी के अंतर्गत की जाने वाली पेरीफेरल एंजियोप्लास्टी एवं अन्य एंडोवैस्कुलर इंटरवेंशन तकनीकों के माध्यम से बंद धमनियों को खोलकर रक्त संचार बहाल किया जा रहा है। इससे न केवल मरीजों की जान बच रही है, बल्कि बड़ी सर्जरी और अंग कटने के खतरे से भी राहत मिल रही है। यह उन्नत चिकित्सा सुविधा संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई), लोहिया संस्थान और केजीएमयू जैसी प्रमुख चिकित्सा संस्थाओं के रेडियोलॉजी विभागों में उपलब्ध है।

ग्लोबल इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी डे के अवसर पर आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम में इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट प्रो. विवेक सिंह ने बताया कि डायबिटीज, रक्त जमने की समस्या या लंबे समय से चली आ रही पेरीफेरल आर्टेरियल डिजीज के मामलों में यदि समय रहते रेडियोलॉजी विभाग से संपर्क किया जाए, तो अंग विच्छेदन से प्रभावी रूप से बचाव संभव है।

कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी की इमेज-गाइडेड एवं न्यूनतम इनवेसिव तकनीकों ने कई जटिल और जानलेवा रोगों के उपचार को सुरक्षित और प्रभावी बनाया है। एक्यूट स्ट्रोक के इलाज में मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी, ब्रेन एन्यूरिज्म में एंडोवैस्कुलर कॉइलिंग, अत्यधिक गर्भाशय रक्तस्राव में यूटेराइन आर्टरी एम्बोलाइजेशन तथा गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग में एम्बोलाइजेशन जैसी आधुनिक तकनीकों से मरीजों को तेज़ और बेहतर उपचार मिल रहा है।

विशेषज्ञों ने कहा कि ये आधुनिक उपचार पद्धतियां कम जोखिम, कम दर्द, कम अस्पताल प्रवास और तेज़ रिकवरी के साथ मरीजों को बेहतर जीवन गुणवत्ता प्रदान कर रही हैं। कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी भविष्य की सटीक, सुरक्षित और मरीज-केंद्रित चिकित्सा का मजबूत आधार बन चुकी है।

कार्यक्रम में एसजीपीजीआई से प्रो. अर्चना गुप्ता, प्रो. विवेक सिंह, प्रो. अनिल, प्रो. सूर्यकांत, प्रो. सत्यव्रत एवं डॉ. अनुराधा, केजीएमयू से प्रो. अनित परिहार, प्रो. मनोज, प्रो. सौरभ, प्रो. सिद्धार्थ एवं प्रो. नितिन, आरएमएलआईएमएस से प्रो. तुषांत तथा कमांड अस्पताल से प्रो. कविता ने अपने विचार साझा किए।

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