कॉक्लियर इम्प्लांट के लिए पीजीआई मेडिकल कॉलेजों के चिकित्सकों को देगा प्रशिक्षण
कार्यशाला के ज़रिए श्रवण बाधितों को नई ज़िंदगी देने की तैयारी
लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) ने श्रवण हानि के उपचार और विशेषज्ञ चिकित्सकों के कौशल संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए प्रथम कॉक्लियर इम्प्लांट कार्यशाला का सफल आयोजन किया। हेड एंड नेक सर्जरी विभाग द्वारा विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अमित केशरी के नेतृत्व में 24 और 25 जनवरी को आयोजित इस दो दिवसीय कार्यशाला में देश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों से आए विशेषज्ञों एवं युवा सर्जनों ने भाग लिया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की सबसे जटिल प्रक्रिया माने जाने वाले टेम्पोरल बोन विच्छेदन का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना था। इस दौरान कुल 20 सर्जनों ने टेम्पोरल बोन का हैंड्स-ऑन डिसेक्शन किया, जिससे उनकी शल्य-तकनीकी दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रोबोटिक 3डी डिजिटल माइक्रोस्कोप के माध्यम से किया गया लाइव विच्छेदन प्रदर्शन रहा, जो भारत में इस तरह का पहला शैक्षणिक प्रयोग माना जा रहा है। इस उन्नत तकनीक से कान की सूक्ष्म संरचनाओं को अत्यंत स्पष्टता के साथ समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि निदेशक प्रोफेसर आर.के. धीमन ने अपने संबोधन में कहा कि श्रवण हानि आज भारत में एक गंभीर जन स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी ऐसे मरीजों के लिए जीवन बदलने वाली तकनीक है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में कॉक्लियर इम्प्लांट कार्यक्रम शुरू करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि एसजीपीजीआई इन संस्थानों को प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करेगा। साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सहयोग से नवजात शिशुओं की अनिवार्य श्रवण जांच, शीघ्र निदान और पुनर्वास को अत्यंत आवश्यक बताया।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर देवेंद्र गुप्ता ने विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए कॉक्लियर इम्प्लांट कार्यक्रम को और सशक्त बनाने के लिए संस्थान स्तर पर सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अमित केशरी ने बताया कि एसजीपीजीआई में बच्चों और वयस्कों दोनों में नियमित रूप से कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी इस अत्याधुनिक सर्जरी की नींव मजबूत होगी। कार्यक्रम में सर्जनों के साथ ऑडियोलॉजिस्ट और पुनर्वास विशेषज्ञों के व्याख्यान भी शामिल रहे, जिससे प्रतिभागियों को कॉक्लियर इम्प्लांट के हर पहलू की समग्र जानकारी मिली।
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भारत में श्रवण हानि की गंभीर स्थिति
लगभग 63 लाख लोग श्रवण हानि से प्रभावित
कॉक्लियर इम्प्लांट से बच्चों और वयस्कों को मिल सकती है सुनने की नई क्षमता
समय पर जांच और सर्जरी से बदली जा सकती है पूरी ज़िंदगी

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