शनिवार, 10 जनवरी 2026

पीजीआई परिसर में ईएसआई क्लीनिक स्थापित करने पर निदेशक ने दिया जोर

 

पीजीआई परिसर में ईएसआई क्लीनिक स्थापित करने पर जोर

ईएसआई जागरूकता सत्र में लाभों के कम उपयोग पर जताई गई चिंता

लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआईएमएस) में कर्मचारी राज्य बीमा योजना (ईएसआईएस) के लाभार्थियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। संस्थान के निदेशक डॉ. आर. के. धीमन ने पीजीआई परिसर के भीतर ईएसआई क्लीनिक/डिस्पेंसरी स्थापित करने पर जोर देते हुए कहा कि इससे ईएसआई कार्यकर्ताओं को समय पर उपचार, मानसिक स्वास्थ्य सहयोग और कार्यस्थल पर समग्र कल्याण सुनिश्चित होगा।

यह बात एसजीपीजीआई के अस्पताल प्रशासन विभाग और ईएसआईएस, लखनऊ जोन के मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सहयोग से केंद्रीय पुस्तकालय परिसर स्थित एच. जी. खुराना सभागार में आयोजित ईएसआईएस जागरूकता सत्र एवं स्वास्थ्य जांच शिविर के दौरान कही गई। कार्यक्रम का शुभारंभ पुष्पांजलि और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। आयोजन सचिव डॉ. गौरव कुमार झा ने स्वागत उद्बोधन दिया।

उद्घाटन सत्र में लखनऊ जोन के सीएमओ डॉ. राजेश कुमार ने निवारक स्वास्थ्य देखभाल में सामाजिक सुरक्षा की भूमिका पर प्रकाश डाला। एसजीपीजीआई के चिकित्सा अधीक्षक एवं आयोजन अध्यक्ष डॉ. आर. हर्षवर्धन ने ईएसआई कार्यकर्ताओं की दुर्दशा, जागरूकता की कमी और इसके कारण बढ़ते जेब खर्च पर चिंता जताई। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देवेंद्र गुप्ता ने ईएसआई सेवाओं के अधिकतम उपयोग पर बल दिया।

वैज्ञानिक सत्र में ईएसआईएस योजना के तहत चिकित्सा एवं नकद लाभ, ई-पहचान कार्ड, प्रतिपूर्ति प्रक्रिया और शिकायत निवारण की जानकारी दी गई। पिरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने कैशलेस उपचार, मातृत्व लाभ और आश्रित सहायता सहित ईएसआई के व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवरेज की जानकारी दी।

चर्चा में सामने आया कि नियमित वेतन कटौती के बावजूद ईएसआई लाभों का उपयोग सीमित है और लगभग 80 प्रतिशत पात्र कर्मियों के पास ईएसआई कार्ड नहीं हैं। अस्पताल संक्रमण समिति की ओर से डॉ. शालिनी त्रिवेदी द्वारा उठाए गए प्रश्नों पर स्पष्ट किया गया कि संविदा कर्मचारियों के लिए चिकित्सा लाभ पूरी तरह ईएसआईसी के अंतर्गत हैं। डॉ. अमित प्रकाश और डॉ. सलाम अहमद ने उपचार की प्रक्रिया स्पष्ट की।

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