बुधवार, 21 जनवरी 2026

सड़क दुर्घटना में खोई सुनने की क्षमता लौटी, एसजीपीजीआई ने कॉक्लियर इम्प्लांट से रचा चिकित्सा चमत्कार

 






सड़क दुर्घटना में खोई सुनने की क्षमता लौटी, एसजीपीजीआई ने कॉक्लियर इम्प्लांट से रचा चिकित्सा चमत्कार


भीषण हादसे में दोनों कान क्षतिग्रस्त हुए थे, अत्याधुनिक तकनीक से  ज़िंदगी का तोहफा

पीजीआई चंडीगढ़ और एसजीपीजीआई ने मिलकर किया इलाज


लखनऊ। सड़क दुर्घटना में पूरी तरह सुनने की क्षमता खो चुके मऊ निवासी धनंजय 23 वर्षीय युवक के लिए संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई), लखनऊ ने उम्मीद की नई राह खोल दी है। अत्याधुनिक कॉक्लियर इम्प्लांट तकनीक के सफल प्रयोग से युवक की श्रवण क्षमता बहाल करने की दिशा में ऐतिहासिक सफलता हासिल हुई है। चिकित्सकों के अनुसार यह उपलब्धि किसी “लॉटरी” से कम नहीं, जिसने अंधेरे में डूब चुके जीवन को फिर से आवाज़ दी है।

युवक को एक भीषण सड़क दुर्घटना में गंभीर सिर की चोट लगी थी, जिससे दोनों कानों में गहरी श्रवण हानि हो गई। बायां भीतरी कान पूरी तरह नष्ट हो चुका था, जबकि दायां कान फ्रैक्चर के कारण अत्यंत जटिल स्थिति में था। ऐसे में चिकित्सकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि क्या दाहिने कान की श्रवण तंत्रिका कॉक्लियर इम्प्लांट के लिए पर्याप्त रूप से सुरक्षित है या नहीं।

इस जटिल निर्णय में पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के प्रोफेसर रमनदीप के विशेषज्ञ परामर्श ने अहम भूमिका निभाई। एक विशेष नैदानिक परीक्षण के जरिए दाहिने कान की तंत्रिका कार्यप्रणाली की पुष्टि हुई, जिसके बाद सर्जरी का मार्ग प्रशस्त हुआ।

एसजीपीजीआई की न्यूरोऑटोलॉजी टीम ने डॉ. एम. रवि शंकर के नेतृत्व में जनवरी के दूसरे सप्ताह में यह जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की। इसमें अत्याधुनिक इम्प्लांट प्रोसेसर का उपयोग किया गया, जो लगभग सामान्य वाक् कोडिंग प्रदान करता है। उत्तर प्रदेश में इस तकनीक का यह पहला प्रयोग बताया जा रहा है।

डिवाइस को गुरुवार को सक्रिय किया गया, जिसके बाद युवक ने तुरंत ध्वनि के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। ऑडियोलॉजी प्रक्रिया में पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ की  पारुल , एसजीपीजीआई की  आद्या,  कीर्ति,  मंगल सहित विशेषज्ञ  माथुर और  शिवांगी का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

विशेषज्ञों के अनुसार यह सफलता न केवल तकनीकी प्रगति बल्कि संस्थानों के बीच समन्वय और टीमवर्क का जीवंत उदाहरण है। अब युवक गहन श्रवण पुनर्वास से गुजरेगा, जिससे वह दोबारा प्रभावी संवाद कर सकेगा और जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आएगा।




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