गुरुवार, 3 अप्रैल 2025

विवाह संस्कार है फंक्शन मत बनाए

 

विवाह संस्कार है फंक्शन मत   बनाए 


सनातन में मेहदी कोई संस्कार नहीं लेकिन हो रहा है





संस्कार केवल विवाह है लेकिन विवाह फंक्शन हो गया है। आज कल मेहदी पता नहीं कहा से आ गया है। सारे  विवाह का सत्यानाश फोटो  सेशन में हों रहा है। पंडित जी रहा देखते रहते है मंडप में पंडित जी से जल्दी करने को कहते है। संस्कार को फंक्शन मत बनाए। एल डी ए कॉलोनी सेक्टर एल में आयोजित भागवत कथा में श्री राम शरण शास्त्री ने कहा कि रामायण का ठेका हो रहा है। कोई खुद पढ़ने वाला नहीं है। बच्चों और खुद पांच दस दोहा पढ़वाए। संस्कार जिंदा रखिए। बहुत तेजी से संस्कार का हनन हो रहा है। सुंदरता के लिए महिलाएं मां गौरी और पुरुष अश्विनी कुमार की पूजा करे । नारद जी ने अश्वनी कुमार की पूजा किया कहा जेहि विधि नाथ होय हित मोरा करहूं वेगी दास में तोरा ,,,अश्वनी कुमार ने वही रूप दिया जिसमें नारद जी का हित था। शास्त्री जी ने कहा कि हम जहां रहे वही की बात करे। पुत्र के सामने दूसरे के पुत्र , पत्नी के सामने दूसरे स्त्री की बात न करे। कथा में मानवेंद्र सिंह, पीयूष श्रीवास्तव, सत्य प्रकाश गुप्ता, संजय गुप्ता, अमन मिश्रा , मनीषा मिश्रा, प्रीति चौरसिया,मधु सिंह, ईशान यादव,राकेश श्रीवास्तव सहित तमाम लोग के सहयोग से साहूहिक कथा हो रही है।

आज स्त्री उतनी आकर्षक नहीं है, जितनी सदा थी

 




इतनी मत मिल जाना किसी को कि अमोह पैदा हो जाए। बस, मिलना और न मिलना, इनके बीच सदा खेल को चलाते रहना। पास बुलाना किसी को और दूर हो जाना। कोई निकट आ पाए कि सरक जाना। बुलाना भर, मिल ही मत जाना, क्योंकि मिल ही गए कि मोह नष्ट हो जाता है। व


स्त्रियां थीं पृथ्वी की घूंघट में दबी, अंधेरे में छिपी। पति भी नहीं देख पाता था सूरज की रोशनी में। कभी खुले में बात भी नहीं कर पाता था। अपनी पत्नी से भी बात चोरी से ही होती थी, रात के अंधेरे में, वह भी खुसुर—फुसुर। क्योंकि सारा बड़ा परिवार होता था, कोई सुन न ले! आकर्षण गहरा था, मोह जिंदगीभर चलता था।


स्त्री उघड़ी, परदा गया—अच्छा हुआ, स्त्री के लिए बहुत अच्छा हुआ—सूरज की रोशनी आई। लेकिन साथ ही मोह क्षीण हुआ। स्त्री और पुरुष आज कम मोहग्रस्त हैं। आज स्त्री उतनी आकर्षक नहीं है, जितनी सदा थी। और यूरोप और अमेरिका में और भी अनाकर्षक हो गई है, क्योंकि चेहरा ही नहीं उघड़ा, पूरा शरीर भी उघड़ा। आज यूरोप और अमेरिका के समुद्र—तट पर स्त्री करीब—करीब नग्न है, पास से चलने वाला रुककर भी तो नहीं देखता, पास से गुजरने वाला ठहरकर भी तो नहीं देखता कि नग्न स्त्री है।


कभी आपने देखा, बुरके में ढकी औरत जाती हो, तो पूरी सड़क उत्सुक हो जाती है। ढके का आकर्षण है, क्योंकि ढके में बाधा है। जहां बाधा है, वहां मोह है। जहां बाधा नहीं है, वहां मोह नहीं है। स्त्री और पुरुष का आकर्षण जितना सेक्यूअल है, जितना कामुक है, उससे ज्यादा सोशल है, कल्वरल है। जितना ज्यादा काम से पैदा हुआ है, उतना काम में डाली गई सामाजिक बाधाओं से पैदा हुआ है।


अब मैं मानता हूं कि आज नहीं कल, पचास साल के भीतर, सारी दुनिया में घूंघट वापस लौट सकता है। आज कहना बहुत मुश्किल मालूम पड़ता है, यह भविष्यवाणी करता हूं पचास साल में घूंघट वापस लौट आएगा। क्योंकि स्त्री—पुरुष इतनी अनाकर्षक हालत में जी न सकेंगे। वे आकर्षण फिर पैदा करना चाहेंगे। आने वाले पचास वर्षों में स्त्रियों के वस्त्र फिर बड़े होंगे, फिर उनका शरीर ढकेगा।


बर्ट्रेड रसेल ने लिखा है कि जब वह बच्चा था, तो विक्टोरियन युग समाप्त हो रहा था। और स्त्रियों के पैर का अंगूठा भी देखना मुश्किल था। घाघरा ऐसा होता था, जो जमीन छूता था। तो बर्ट्रेंड रसेल ने लिखा है कि अगर किसी स्त्री के पैर का अंगूठा भी दिख जाता था, तो चित्त में बिजली कौंध जाती थी। और उसने लिखा है कि अब कल्पना करने को भी कुछ नहीं बचा है। स्त्री पूरी दिखाई पड़ जाती है और चित्त में कोई बिजली नहीं कौंधती।


नग्न स्त्री उतनी आकर्षक नहीं है, नग्न पुरुष उतना आकर्षक नहीं है। 

सोमवार, 31 मार्च 2025

शब्द ही ब्रह्म है इस पर नियंत्रण करिए

 

आदमी की कीमत शब्द तक है , शब्द ही ब्रह्म है हम लोग अपनी एनर्जी बेकार की बातों में करते है जीवन में जितने कम शब्दों का प्रयोग करना , क्या बोल रहे है पहले मनन करना चाहिए । पूरे ब्रह्माण्ड में कथा शब्द के रूप में है जो कल्याण करी है। श्री राम शरण शास्त्री ने बताया कि चार वेद, चार अवस्था , चार ऋतु सहित कई चार ही है। कथा ब्रह्मा जी सुनी और उसे नारद को दिया ब्रह्मा जी ने बताया कि कथा सुनकर सारा कष्ट दूर हो गया मेरा यह कथा कोई कहानी नहीं है यह कल्याण करता है। सबसे बड़ी भक्ति संकीर्तन है कोई एक नाम पकड़ लो नारद जी ने श्री मन नारायण पकड़ लिया वैसे ही आप भी एक नाम पकड़ ले। भगवान कहते है कि जो आप के पास है उस   का विस्तार करे । प्रेम बाटो जीवन में प्रेम बढ़ेगा। संसार की सत्ता साथ नहीं जाती है ।  मानवेंद्र सिंह, ए पी दीक्षित, त्रिभुवन  सिंह, सत्य प्रकाश गुप्ता, पीयूष श्रीवास्तव सहित अन्य लोगों ने आरती में भाग लिया। आज के मुख्य यजमान अमन मिश्रा रहे

रविवार, 30 मार्च 2025

कूल्हे के फ्रैक्चर का सीमेंट ऑग्मेंटेशन से सफल होगी सर्जरी

 

पीजीआई 


 कूल्हे के फ्रैक्चर का सीमेंट ऑग्मेंटेशन से सफल होगी सर्जरी


लखनऊ ऑर्थोपेडिक सोसाइटी की चौथी वार्षिक संगोष्ठी 


 


 


  कूल्हे के फ्रैक्चर का इलाज सीमेंट ऑग्मेंटेशन तकनीक से बेहतर इलाज  होगा। इस तकनीक में जहां पर फ्रैक्चर होता है वहां पर  रांड और प्लेट लगाने के साथ बोन सीमेंट को स्क्रू के साथ इंजेक्ट किया जाता है जिससे स्क्रू की पकड़  मजबूत हो जाती है। यह जानकारी लखनऊ ऑर्थोपेडिक सोसाइटी के चौथे  वार्षिक अधिवेशन में संजय गांधी पीजीआई एपेक्स ट्रामा सेंटर के  हड्डी रोग विशेषज्ञ डा.पुलक शर्मा ने दी। प्रो शर्मा ने बताया कि  बच्चों से लेकर वयस्कों तक सभी आयु समूहों के व्यक्तियों को प्रभावित करने वाली एक प्रचलित चोट है। हिप फ्रैक्चर एक बड़ी चुनौती है । ऑपरेशन के बाद की गतिविधि  सर्जरी के  परिणामों  बहुत अधिक निर्भर करता है। सीमेंट ऑग्मेंटेशन  तकनीक मरीजों के लिए लाभकारी साबित हो रही है। इससे अस्पताल में रहने की अवधि कम होती है। जल्दी से जल्दी मरीज चलने-फिरने लायक हो जाता है। संगोष्ठी में लखनऊ और आस-पास के जिलों से 200 से अधिक आर्थोपेडिक सर्जन शामिल हुए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि निदेशक डॉ. आर.के. धीमान ने ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रयासों की सराहना की । एशिया पेसिफ़िक ट्रामा सोसाइटी एवं भारतीय आर्थोपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अनूप अग्रवाल,  डा. पीआर मिश्रा व्याख्यान दिया,  जिसमें बुजुर्गों के लिए 360 डिग्री देखभाल पर बल दिया। 360 डिग्री देखभाल का मतलब है, किसी मरीज के बारे में पूरी जानकारी रखना और उसकी देखभाल के लिए सभी संबंधित लोगों को जोड़ना । एशिया पैसिफिक आर्थोपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. जमाल अशरफ एविडेंस बेस्ड मेडिसिन पर प्रकाश डाला। मुम्बई के डा. अमित अजगांवकर और एम्स दिल्ली के डॉ.समर्थ मित्तल, यूपी आर्थोपेडिक,एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. पीयूष कुमार मिश्रा ने हिप फ्रैक्चर पर व्याख्यान दिया। 


पैरा बैडमिंटन को बढावा देने के लिए हेल्प लाइन


 


कार्यक्रम के विशेष अतिथि पैरा बैडमिंटन कोच गौरव खन्ना जो सार्वजनिक स्वास्थ्य और गतिशीलता को बनाए रखने में डॉक्टरों के योगदान के लिए अपनी प्रशंसा की। पैरा बैडमिंटन एथलीट की पहचान करने और उन्हें इंटरनेशनल लेवल तक पहुंचाने के लिए पैरा बैडमिंटन गोल्ड  कार्यक्रम शुरू किया गया। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर जारी होगा ।  दिव्यांग व्यक्तियों हेल्पलाइन के जरिए संपर्क कर विशिष्ट इलाज के लिए अच्छे सेंटर पर जा सकेंगे। इलाज के बाद पैरा बैडमिंटन केल में आगे जा सकेंगे।

माता और पिता से बड़ा कोई भगवान नहीं

 




माता और पिता से बड़ा कोई भगवान नहीं



सेक्टर एलडीए कॉलोनी के प्रज्ञा पार्क में सात दिवसीय राम कथा शुरू आज शुरू हुआ।  कार्यक्रम में मानवेंद्र सिंह अजय लक्ष्मी प्रीति चौरसिया प्रीति मिश्रा पीयूष श्रीवास्तव रितु श्रीवास्तव मोहिनी सक्सेना का सहयोग रहा।  पंडित रामशरण शास्त्री मुख्य कथा वाचक ने कहा कि

 माता और पिता से बड़ा कोई भगवान नहीं है।  

जिस पर सरस्वती की कृपा होती है उसके पीछे लक्ष्मी और दुनिया चलती है। 

जीवन में भगत बने लेकिन कैसे बने इसके लिए भागवत के शरण में जाना पड़ेगा। यह भक्तों का आश्रय है।  भागवत आपको सीधे नहीं मिलेगी इसके लिए माध्यम की आवश्यकता होगी इसके लिए  संत का साथ करना होगा संत ही माध्यम है। 

भक्ति की सबसे पहली सीढ़ी है धैर्य और आजकल लोगों में धैर्य की बहुत करनी है। आज के मुख्य यजमान पीयूष श्रीवास्तव  रहे। इस मौके पर कलश यात्रा भी निकल गई।


गुरुवार, 27 मार्च 2025

सोटो ने नगर निगम डिग्री कालेज में अंगदान के लिए किया प्रेरित

 

सोटो ने नगर निगम डिग्री कालेज में अंगदान के लिए किया प्रेरित

 अंग दान पर जागरूकता सत्र एवं डिजिटल प्रतिज्ञा अभियान का आयोजन

एक व्यक्ति बचा सकता है कई का जीवन


 राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन, उत्तर प्रदेश (सोटो) की टीम ने संयुक्त प्रभारी एवं एसीजीपीजीआई के अस्पताल प्रशासन विभाग के प्रमुख  प्रो राजेश हर्षवर्धन के मार्गदर्शन में  आर्य वीर वीरांगना प्रशिक्षण शिविर, नगर निगम डिग्री कॉलेज, सुरेंद्र नगर, अंग दान पर एक जागरूकता सत्र  एवं प्रतिज्ञा अभियान का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में लखनऊ विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों के स्नातक छात्रों ने भाग लिया।कार्यक्रम का उद्घाटन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर एस.सी. पांडेय ने किया।  प्रोफेसर पांडेय ने छात्रों को अंग दान के महत्व को समझने और इस नेक कार्य के लिए आगे आने का आह्वान किया।

इस अवसर पर सोटो से  डॉ. क्रिस अग्रवाल ने छात्रों को अंग दान से जुड़े तथ्यों और भ्रांतियों के बारे में  बताया कि कैसे एक व्यक्ति के अंगदान से कई लोगों के जीवन बचाए जा सकते हैं और समाज में अंग दान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। मीडिया सलाहकार कस्तूरी सिंह ने छात्रों के साथ सक्रिय रूप से संवाद स्थापित किया और उन्हें अंग दान के लिए ऑनलाइन प्रतिज्ञा लेने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने अंग दान से संबंधित छात्रों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए उनकी शंकाओं का समाधान किया और अंग दान की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया। डॉ. अभिषेक , सामाजिक सोशल वेलफेयर आफीसर    भोलेश्वर, प्रत्यारोपण समन्वयक  नीलिमा दीक्षित दीक्षित छात्रों के साथ बातचीत की और उनके प्रश्नों का समाधान किया।

प्रकाश को ठोस मैं वैज्ञानिकों ने बदला



सुबह सूरज की रोशनी को देखकर दिन की शुरुआत करना लगभग हर व्यक्ति की चाहत होती है। इस रोशनी से ऊर्जा मिलती है, दिन अच्छा बीतेगा, ऐसा माना जाता है। लेकिन अगर यही रोशनी देखने के साथ छूने के लिए मिल जाए तो?


सोचने को तो कुछ भी सोचा जा सकता है। लेकिन अब धरातल पर भी साइंस फिक्शन की ये बात सच हो रही है। इटली के सीएनआर नैनोटेक (Consiglio Nazionale delle Ricerche) के एटोनियो गियानफेट (Antonio Gianfrate) और यूनिवर्सिटी ऑफ पाविया (University of Pavia) के डेविड निग्रो (Davide Nigro) की टीम ने रिसर्च कर ये दिखा दिया है कि प्रकाश भी ठोस हो सकता है।


17वीं सदी से अब तक शोध चालू

प्रकाश को लेकर 17वीं और 18वीं शताब्दी में शोध शुरू हुए। न्यूटन और हाइजेंस जब लाइट पर काम कर रहे थे, तब से ही यह बहस चल रही है कि प्रकाश असल में है क्या? कोई कण या तरंग? न्यूटन का मानना था कि प्रकाश कणों से बना है।


इसके बाद 20वीं सदी में एल्बर्ट आइंस्टीन ‘थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी’ लेकर आए और बताया कि प्रकाश दो तरह से काम कर सकता है। यानी लाइट का डुअल बिहेवियर होता है। इसमें कण भी हैं और तरंग भी। 1905 में आई इस थ्योरी में आइंस्टीन ने ये बताया कि पदार्थ के द्रव्यमान से ऊर्जा बनाई जा सकती है। वैसे ही ऊर्जा से पदार्थ बन सकता है। हालाँकि उन्होंने भी इसके ठोस में बदलने की संभावना से इनकार कर दिया था।



इसके बाद 1942 में एनरीको फर्मी ने संयुक्त राष्ट्र में ये दिखाया कि यूरेनियम जैसे पदार्थ से हम ऊर्जा उत्पन्न कर सकते हैं। हालाँकि ऊर्जा या फोटॉन से कोई ठोस पदार्थ बने, इस तरह के शोध में सफलता नहीं मिल पा रही थी। यही कारण है कि बाद में भी शोध जारी रहे।


प्रकाश को लेकर इतनी संभावनाओं के बावजूद अब तक सफलता क्यों नहीं मिली? इसका उत्तर है कि किसी भी ठोस पदार्थ का द्रव्यमान होता है। इसके उलट प्रकाश फोटॉन से बनता है, जिसका कोई द्रव्यमान या रेस्ट मास नहीं होता या कहा जाए शून्य होता है।


लाइट बन गई ‘सुपर सॉलिड’

नेचर पत्रिका में छपी इटली के वैज्ञानिकों की रिसर्च अब कौतूहल का विषय बनी हुई है। वैज्ञानिकों ने यह साबित किया है कि प्रकाश को एक ‘सुपर सॉलिड’ पदार्थ में बदला जा सकता है। इसे ‘सुपर सॉलिड लाइट’ नाम दिया गया है। असल में सुपर सॉलिड एक ऐसी अवस्था है, जिसमें किसी पदार्थ को इस तरह ठंडा किया जाता है कि उसके परमाणु एक ही क्वांटम अवस्था में पहुँच जाते है। इसमें पदार्थ होता तो ठोस है, लेकिन उसकी संरचना फ्लुइड की तरह होती है। यानी ये बिना रुकावट के बहता रहता है।


इस तरह के सुपर सॉलिड पदार्थ को अब तक सिर्फ बोस-आइंस्टीन कंडेंसेट्स (बीईसी) में ही देखा गया है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इस रिसर्च से भविष्य में क्वांटम कंप्यूटिंग और ऑप्टिकल टेक्नोलॉजी में बड़े बदलाव आ सकते हैं। इस रिसर्च को क्वांटम फिजिक्स के लिए एक अहम मील का पत्थर कहा जा सकता है।




कैसे जम गया प्रकाश?

वैज्ञानिकों ने प्रकाश को सामान्य रूप से तापमान कम करके नहीं जमाया, बल्कि इसके लिए खास तकनीक का उपयोग किया। उन्होंने क्वांटम तकनीक का उपयोग कर गैलियम आर्सेनाइड की संरचना में माइक्रोस्कोपिक रिज (सूक्ष्म लकीरें) के जरिए फोटॉन को नियंत्रित किया। इसके बाद प्रकाश को सुपर सॉलिड अवस्था में बदला गया।


इस रिसर्च से क्वांटम कंप्यूटिंग में नई टेक्नोलॉजी के नए आयाम सामने आ सकते हैं। क्वांटम कंप्यूटर एक तरह के सुपर कंप्यूटर होते हैं, जिनका उपयोग बड़े रिसर्च और जटिल गुणा-भाग करने के लिए किया जाता है। नया शोध इन सुपर कंप्यूटर की स्पीड और अधिक तेज कर सकता है। इससे सेमी कंडक्टर, स्पेस रिसर्च, टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा के साथ अन्य रिसर्च में मदद मिल सकती है।


आम इंसान को इस रिसर्च से क्या मिलेगा?

आम आदमी के लिए ये रिसर्च तुरंत तो नहीं पर भविष्य में कई तकनीकी बदलाव ला सकता है। इससे हमारे रोजमर्रा के जीवन में बेहतरी आ सकती है। भविष्य में आम इंसान भी बेहतर आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस (AI) और स्मार्ट तकनीक का उपयोग कर सकता है।


नए मोबाइल और गैजेट्स के लिहाज से देखा जाए तो नए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अत्याधुनिक ऑप्टिकल विकसित किए जा सकते हैं। अल्ट्रा थिन डिस्प्ले के मोबाइल और अत्यधिक शक्तिशाली प्रोसेसर तैयार हो सकते हैं। बैटरी लाइफ बढ़ जाएगी।



इसे ऐसे समझा जा सकता है कि आगे चलकर आपका मोबाइल चार्जर मिनटों में फोन की बैटरी फुल चार्ज कर देगा। आपके डेटा ट्रांसफर की गति कई गुना तेज हो सकती है। सुपरफास्ट इंटरनेट की सुविधा दूर-दराज के क्षेत्रों तक भी पहुँच सकती है।


क्वांटम इंटरनेट पद्धति विकसित की जाएगी, जिससे इंटरनेट अधिक सुरक्षित हो जाएगा और हैकिंग नहीं हो पाएगी। कैंसर जैसी बीमारी के लिए बेहतर शोध हो सकते हैं। क्वांटम सेंसर और इमेजिंग तकनीक पैथालॉजी और एमआरआई और अल्ट्रासाउंड जाँच सुविधाओं को सटीक बना सकता है।


पर्यावरण के लिहाज से भी ये शोध एक बेहतर विकल्प बन कर सामने आ सकते हैं। हरित ऊर्जा को भी बढ़ावा मिलेगा जो पर्यावरण के संरक्षण में सहायक होगा। इस खोज से ऊर्जा उत्पादन और भंडारण के लिए कई नए विकल्प मिल सकते हैं। अक्षय ऊर्जा, बैटरी और सुपर कंडक्टिविटी को बेहतर बना कर बिजली की खपत को कम किया जा सकता है। इससे उन जगहों तक बिजली पहुँचने के आसार होंगे जहाँ आज तक बिजली नहीं पहुँच पाई है।


फिक्शन से असल रिसर्च पर पहुँच गई साइंस

स्कूल में साइंस की पढ़ाई में बेंजीन और कार्बन के बारे में बच्चों को कई रिएक्शन समझाए जाते हैं। साइंस फिक्शन की ये बात सिर्फ याद करने तक ही सीमित रहती थी। वैज्ञानिकों के इस शोध ने फिक्शन को वास्तविक दुनिया के करीब ला दिया है। सूर्य के जिस प्रकाश को हमें सिर्फ देखने भर से ही गर्मी महसूस होने लगती है, जरा सोचिए कि अगर उसे ठोस में बदला जाएगा तो कितने नए शोध सामने आएँगे और कितने अविष्कारों से हम परिचित होंगे।

बुधवार, 26 मार्च 2025

पीजीआई के प्रो तन्मय और प्रो रुचिका, सुनील मिश्रा हुए सम्मानित

 


 


 संजय गांधी पीजीआई के इमरजेंसी विभाग के प्रोफेसर तन्मय घटक और न्यूरोलॉजी विभाग की प्रोफेसर प्रो रुचिका टंडन को पदम श्री डॉक्टर विद्या बिंदु सिंह ने स्त्री रत्न सम्मान से विभूषित किया गया।  यह सम्मान समारोह स्त्री वेलफेयर फाउंडेशन के द्वारा आयोजित किया गया था यह फाउंडेशन महिलाओं में होने वाले कैंसर से बचाव के लिए जागरूकता के साथ अन्य क्षेत्रों में काम करता है। इस मौके पर समाजसेवी दुर्गेश पांडे, महिला आयोग की सदस्य डॉक्टर प्रियंका मौर्या, एकता सिंह , वरिष्ठ अधिवक्ता और कैंसर संस्थान के गवर्निंग बॉडी के मेंबर सुनील मिश्रा , लखनऊ यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर निशि पांडे ने उत्साहवर्धन किया। फाउंडेशन की प्रमुख डॉ  सुमिधा त्रिवेदी, संगीता यादव, शशि पांडेय, सुनीता रॉय सहित अन्य लोगों ने अपना विचार रखा। 

सोमवार, 24 मार्च 2025

नर-नारी समानता के प्रबल पैरोकार



भारत माता हमें शिव का मस्तिष्क दो, कृष्ण का हृदय और राम का कर्म और वचन दो

लोहिया की दृष्टि में नारी

 डा० लोहिया नर-नारी समानता के प्रबल पैरोकार थे। वे अक्सर स्त्रियों को पुरुष की पराधीनता के खिलाफ आवाज बुलंद करने की हिम्मत देते थे। उनका स्पष्ट कहना था कि स्त्रियों को बराबरी का दर्जा देकर ही एक स्वस्थ और सुव्यवस्थित समाज का निर्माण किया जा सकता है। वे पुरुषों द्वारा लादी गयी नारी की पराधीनता और स्त्रियों द्वारा उसकी सहज स्वीकृति के सख्त विरुद्ध थे। उन्हें कतई पसंद नहीं था कि औरतें घूंघट और पर्दे में रहें और पुरुष समाज उनका शोषण और अनादर करता रहे। वे स्त्रियों को पुरुषों की तरह मुखर व निडर देखना चाहते थे। यही वजह है कि उन्हें ऐसी स्त्रियां पसंद थी जिनमें अपने स्वाभिमान की रक्षा और दमदारी से अपनी बात कहने की ताकत थी। उनका नारी आदर्श द्रौपदी थी जिसने अपने चीरहरण के समय पांडवों की चुप्पी पर सवाल दागा और कौरवों के अत्याचार के विरुद्ध तनकर खड़ी हुई। 'जाति और योनि के कटघरे' लेख में डा० लोहिया ने नर-नारी समानता के सवाल पर खुलकर अपने विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने तार्किकतापूर्वक स्त्री को पराधीन बनाने वाली वह हर संस्कृति, नैतिकता, परंपरा और मूल्यों पर चोट किया है जो नर-नारी समानता के विरुद्ध है। आजादी के बाद स्त्रियों के अधिकार और सम्मान को लेकर जमकर पैरोकारी की और नारी विरोधियों को आड़े हाथ लिया। नाइंसाफी और गैर बराबरी को खत्म करने के लिए उन्होंने देश के सामने सप्तक्रांति का दर्शन प्रस्तुत किया। नर-नारी समानता, रंगभेद पर आधारित विषमता की समाप्ति, जन्म तथा जाति पर आधारित असमानता का अंत, विदेशी जुल्म का खात्मा, विश्व सरकार का निर्माण, निजी संपत्ति से जुड़ी आर्थिक असमानता का अंत, संभव बराबरी की प्राप्ति, हथियारों के इस्तेमाल पर रोक, सिविल नाफरमानी के सिद्धांत की स्थापना तथा निजी स्वतंत्रताओं पर होने वाले अतिक्रमण का मुकाबला। गौर करें तो इस सप्तक्रांति में डा० लोहिया के वैचारिक व दार्शनिक दोनों पक्ष दिखते हैं जिसमें स्त्रियों के प्रति उनकी संवेदनशीलता स्पष्ट दृष्टिगोचर होती है। उन्होंने एक स्थान पर लिखा है कि 'धर्म, राजनीति, व्यापार और प्रचार सभी मिलकर उस कीचड़ को संजोकर रखने की कोशिश कर रहे हैं जिसे संस्कृति के नाम से पुकारा जाता है।' ऐसा नहीं है कि डा० लोहिया भारतीय संस्कृति और मूल्यों के विरुद्ध थे। वे नास्तिक भी नहीं थे। लेकिन ऐसे फूहड़पन के विरुद्ध थे जिन्हें नैतिकता का खोल पहनाया गया था। डा० लोहिया का भारतीय धर्म व संस्कृति में उनका अटूट विश्वास था। वे राम, कृष्ण और शिव को भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतिनिधि मानते थे। अपने जीवन काल में वे देश के उन तमाम मंदिरों में गये जिनकी स्थापत्य कला दर्शनीय और विलक्षण है। उन्होंने भारत माता से वरदान के रुप में इच्छा प्रकट की कि हे भारत माता हमें शिव का मस्तिष्क दो, कृष्ण का हृदय और राम का कर्म और वचन दो। लेकिन उन्हें धर्म व संस्कृति की आड़ में स्त्रियों पर किया जाने वाला अत्याचार बर्दाश्त नहीं था। नर-नारी समता पर उनका निबंध 'द्रौपदी या सावित्री' सबसे अधिक प्रसिद्ध रहा लेकिन उतना ही अधिक विवादित भी। इस निबंध में उन्होंने एक स्थान पर लिखा है कि' जब मैं कहा करता हूं कि द्रौपदी हिंदुस्तान की सच्चे माने में प्रतीक है, सावित्री उसके जितनी नहीं, तब इसी अंग को देखकर कहता हूं कि वह ज्ञानी, समझदार, बहादुर, हिम्मतवाली और हाजिरजवाब थी। न सिर्फ हिंदुस्तान में बल्कि दुनिया में मुझे द्रौपदी जैसी औरत नहीं मिली।' उन्होंने इस निबंध में एक स्थान पर सीता और सावित्री के पतिव्रत धर्म का महिमामंडन करने वालों से सवाल किया है कि क्यों हमारे समूचे इतिहास में पत्नीव्रत का उदाहरण नहीं मिलता? दरअसल वे यह कहना चाहते हैं कि जब एक स्त्री पतिव्रत धर्म का पालन कर सकती है तो एक पुरुष क्यों नहीं? उन्होंने 'जाति और योनि के कटघरे में एक स्थान पर समाज से सवाल पूछा है कि 'एक औरत जिसने तीन बार तलाक दिया और चौथी बार फिर शादी करती है और एक मर्द जो चौथी बार इसलिए शादी करता है कि उसकी एक के बाद एक पत्नियां मर गयी तो इन दोनों में कौन ज्यादा शिष्ट और नैतिक है? डा० लोहिया ने परंपरा और संस्कृति के नाम पर स्त्रियों पर होने वाले अत्याचार की

शनिवार, 22 मार्च 2025

Weak Immune System Can Trouble the Stomach

 


PGI Pediatric Department's Foundation Day and Clinic


A Weak Immune System Can Trouble the Stomach


Targeted Therapy Provides Relief


On the occasion of the Foundation Day and Clinic of the Pediatric Gastroenterology Department at Sanjay Gandhi PGI, Prof. Amita Agarwal, Head of the Clinical Immunology Department, discussed how Primary Immunodeficiency (PID) can cause stomach problems. She explained that when the immune system is weak, children may suffer from recurrent diarrhea, liver abscesses (pus formation), and mouth ulcers. If these issues persist, it’s essential to first identify the common causes and begin treatment. If treatment is not effective, doctors need to consider PID as a potential cause. Parents should consult specialists as well.


Prof. Amita further explained that the gut contains the most immune cells since infectious agents typically enter the body through food. These cells help fight bacteria and parasites that enter through the digestive system, thus preventing infections. However, when there is a genetic defect leading to a weakened immune system, these cells may be affected and fail to function properly, leading to recurrent infections in children. In severe cases, the condition can become critical. She suggested that if standard treatment does not provide relief, genetic testing should be done, which typically costs around seven to eight thousand rupees. Upon identifying PID, targeted therapy such as IVIG can provide relief to the children. PID occurs in one in a lakh children.


Jaundice with Fever Could Indicate Liver Problems


Prof. S.K. Yacha, the founder of the department, mentioned that the combination of jaundice (yellowing of the skin and eyes) and fever is a sign of serious liver issues. Jaundice occurs when the liver is not functioning properly, leading to the accumulation of bilirubin in the blood, which causes yellowing. Hepatitis, malaria, dengue, gallstones, or other issues can impair liver function, leading to jaundice and fever. Leptospirosis can also cause this combination of symptoms.


Frequent Vomiting in Children: A Cause for Concern


Prof. Moinak Sen Sharma explained that if a child experiences frequent vomiting, even up to six months, it could be due to blockages in the food pipe, small intestine, stomach, or inflammation in the stomach and intestines. Acid reflux, where stomach acid moves back into the intestines, could also be a cause. Stomach inflammation can occur if the stomach muscles are not working properly, leading to difficulty in digestion. Food allergies could also be a factor. Identifying the cause and starting timely treatment is essential. Prof. Sameer Mohindra also addressed that pancreatitis can cause pain, which can be treated effectively.


Checking Immunoglobulin Levels in Children


To diagnose PID in children, immunoglobulin levels should be monitored, which notrequires separate testing. Blood tests for proteins and albumin are necessary. By substraction these levels, the level of immunoglobulin can be assessed.



कमजोर इम्यून सिस्टम पेट को कर सकता है परेशान



 पीजीआई पीडियाट्रिक विभाग का स्थापना दिवस एवं क्लीनिक 


कमजोर इम्यून सिस्टम पेट को कर सकता है परेशान


टारगेट थिरेपी से मिलती है राहत


 


संजय गांधी पीजीआई के पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के स्थापना दिवस एवं क्लीनिक के मौके पर क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी विभाग की प्रमुख प्रो. अमिता अग्रवाल ने  प्राइमरी इम्यूनो डिफिशिएंसी(पीआईडी) के कारण पेट की बीमारी के बारे में बताया कि इम्यून सिस्टम के कमजोर होने पर बच्चों को बार डायरिया, लिवर में एब्सेस( मवाद), मुंह में छाले की परेशानी हो सकती है। यह परेशानी है तो पहले सामान्य कारण का पता कर इलाज करना चाहिए यदि इलाज से फायदा नहीं हो रहा है तो  पीआईडी के बारे में चिकित्सकों को सोचने की जरूरत है। परिजनों को भी विशेषज्ञ से मिलता चाहिए। प्रो. अमिता ने बताया कि आंत( गट) में सबसे अधिक इम्यून सेल होते है क्योंकि संक्रामक खाने के रास्ते शरीर में प्रवेश में करते है । यह खाने के जरिए पहुंचने के बैक्टीरिया, पैरासाइट को नष्ट कर संक्रमण से बचाते है। जीन में खराबी के कारण इम्यून सिस्टम कमजोर होने पर यह सेल भी प्रभावित होते है। सही तरीके से काम नहीं करते है जिसके कारण बच्चों को बार –बार संक्रमण होता है। कई बार बच्चे की स्थिति गंभीर हो जाती है। प्रो. अमिता ने कहा कि सामान्य इलाज से राहत न मिलने पर जीन की जांच करानी चाहिए जो सात से आठ हजार में हो जाती है। पीआईडी का पता लगने पर टारगेट थिरेपी, आईवी आईजीजी  जिससे बच्चों को राहत मिलता है। एक लाख में एक बच्चे में पीआईडी की आशंका रहती है।




पीलिया के साथ बुखार तो लिवर में हो सकती है परेशानी


 विभाग के संस्थापक प्रो,एसके याचा ने बताया कि पीलिया (जॉन्डिस) और बुखार एक साथ होने  गंभीर परेशानी का संकेत है।  पीलिया तब होता है जब लिवर (जिगर) सही से काम नहीं कर रहा होता और बिलीरुबिन  खून में जमा हो जाता है, जिससे त्वचा और आंखों की सफेदी पीली पड़ने लगती है। हेपेटाइटिस, मलेरिया, डेंगू पित्ताशय में पथरी या अन्य समस्याएं होने पर लिवर के काम में दिक्कत आ सकती है, जिससे पीलिया और बुखार हो सकता है। लेप्टोस्पायरोसिस भी पीलिया और बुखार के संयोजन को जन्म दे सकता है।


 


बार-बार उल्टी हो सकती है तो सावधान


   


प्रो. मोइनक सेन शर्मा ने बताया कि बच्चों में बार-बार या यहां तक कि  6 महीने से उल्टी  की परेशानी हो रही है तो  इसके पीछे खाने की नली में रूकावट, छोटी आंत में रुकावट , आमाशय में रूकावट , पेट और आंतों की सूजन है।  एसिड रिफ्लक्स जिसमें पेट का अम्ल (एसिड) आंतों में वापस आ जाता है।  पेट की सूजन इसमें पेट की मांसपेशियों का ठीक से काम नहीं होता और खाना सही से पचता नहीं है। फूड एलर्जी हो सकता है। कारण का पता लगा कर सही समय पर इलाज संभव है। प्रो. समीर मोहिंद्रा ने पैक्रिएटाइटिस के कारण होने दर्द का इलाज संभव है।


बच्चों में देखे ग्लोबुलीन


बच्चों में पीआईडी का पता लगाने के लिए ग्लोबुलीन देखना चाहिए इसके लिए अलग से जांच की जरूरत है। रक्त में प्रोटीन और एल्ब्यूमिन की जांच करना चाहिए। इनके स्तर  को घटाने से ग्लोबुलीन का के स्तर का पता लग जाता है।

डाउन सिंड्रोम से पीड़ित 30 से अधिक बच्चों

 


विश्व डाउन सिंड्रोम दिवस 


 संजय गाँधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के मेडिकल जेनेटिक्स विभाग द्वारा आज विश्व डाउन सिंड्रोम दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया गया, जिसमें डाउन सिंड्रोम से पीड़ित 30 से अधिक बच्चों और उनके परिवार इस कार्यक्रम मे शामिल हुए। इस कार्यक्रम में वॉकथॉन का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य डाउन सिंड्रोम के बारे में जागरूकता फैलाना था। 

संस्थान के निदेशक, पद्मश्री प्रोफेसर आर.के. धीमन ने वॉक में भाग लिया।उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होने डाउन सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्तियों के लिए शीघ्र निदान और सामाजिक स्वीकृति के महत्व पर जोर दिया।

कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों द्वारा संचालित सत्र शामिल थे।

डॉ. शुभा फड़के, विभागाध्यक्ष, मेडिकल जेनेटिक्स ने डाउन सिंड्रोम के आनुवंशिक पहलुओं पर बहुमूल्य जानकारी प्रदान की। सुश्री अंजलि, ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट ने डाउन सिंड्रोम वाले बच्चों के दैनिक जीवन के कार्यो को बेहतर बनाने में  ऑक्यूपेशनल थेरेपी की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। सुश्री नवनीत, फिजियोथेरेपिस्ट ने मोटर कौशल और शारीरिक विकास को बढ़ाने में फिजियोथेरेपी के महत्व पर चर्चा की।

स्पीच थेरेपिस्ट और मनोवैज्ञानिकों ने भी जानकारीपूर्ण सत्र आयोजित किए, जिसमें डाउन सिंड्रोम से युक्त बच्चो के संचार विकास और भावनात्मक विकास में उनकी भूमिका के बारे में बताया गया। उन्होंने अभिभावकों के प्रश्नों का उत्तर भी दिया और उन्हे मार्गदर्शन और सहायता प्रदान की। 

इस अवसर को और भी रोचक बनाने के लिए बच्चों ने विभिन्न खेलों, नृत्य कार्यक्रम में भाग लिया, जिससे यह कार्यक्रम जीवंत और संवादात्मक बन गया। इस कार्यक्रम ने माता-पिता, स्वास्थ्यकर्मियो और डाउन सिंड्रोम वाले बच्चों के बीच समुदाय की भावना को सफलतापूर्वक बढ़ावा दिया। 

ऐसी पहलों के साथ, संजय गाँधी पी जा आई विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए जागरूकता, प्रारंभिक हस्तक्षेप और समग्र विकास को बढ़ावा देने के ऐसे प्रयासों का नेतृत्व करना जारी रखेगा।

बुधवार, 19 मार्च 2025

परिस्थितियों ने इन्हें बना दिया लंबे समय तक अंतरिक्ष का निवासी


वेलकम विलियम्स ! 



 कुछ लोग इतिहास लिखते हैं, कुछ लोग इतिहास बनते हैं और कुछ विरली शख्सियत ऐसी होती है जिनके पीछे इतिहास चलता है। भारत की बेटी सुनीता विलियम्स ऐसा ही स्वर्णिम हस्ताक्षर हैं, जिसने अंतरिक्ष की पगडंडी पर ऐसे पदचिन्ह बना दिए है, जिन पर चलकर पूरी दुनिया महागाथा लिखेगी। 286 दिन अंतरिक्ष की महायात्रा यात्रा से लौटी सुनीता ने जब धरती पर पाव रखा तो हर भारतवासी का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। सुनीता ने साबित कर दिया कि आदमी मन से ठान ले तो कुछ भी असंभव नहीं। गोस्वामी तुलसीदास ने कोटि कोटि ब्रह्मांड की बात लिखी है और सनातन धर्म में ऐसे तमाम चरित्र है जो कि सम्पूर्ण ब्रह्मांड को अपनी इच्छा शक्ति के दम पर विजित कर लेते हैं। सनातन की इसी शक्ति के दम पर सुनीता विलियम्स ने भी नीले आकाश पर शौर्य की लाल रेखाएं खींच दीं। अंतरिक्ष का सफर रोमांचक तो होता है लेकिन कई बार यह चुनौतीपूर्ण और अनिश्चितताओं से भरा भी साबित होता है। ताजा उदाहरण सुनीता विलियम्स और बूच विलमोर का है, जो आठ दिन के लिए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन गए थे लेकिन वहां उन्हें पूरे 286 दिन बिताने पड़े। आखिरकार स्पेसएक्स के क्रू ड्रैगन अंतरिक्ष यान के जरिए वे सुरक्षित धरती पर लौट आए। हालांकि वे पहले अंतरिक्ष यात्री नहीं हैं जिनका मिशन अचानक लंबा हो गया हो। इतिहास के पन्नों में कई ऐसे अंतरिक्ष यात्रियों के नाम दर्ज हैं, जिन्होंने अनचाहे हालात में महीनों तक स्पेस स्टेशन में रहकर नया कीर्तिमान रचा। 1991 में सोवियत अंतरिक्ष यात्री सर्गेई क्रिकालेव को मिर स्पेस स्टेशन पर चार महीने के मिशन पर भेजा गया था। लेकिन उसी दौरान सोवियत संघ में राजनीतिक उथल-पुथल मच गई और देश ही टूट गया। हालात ऐसे हो गए कि सरकार के पास उन्हें वापस लाने के लिए फंड नहीं था। मजबूरन सर्गेई को अंतरिक्ष में रहना पड़ा और वे पूरे 313 दिन बाद 1992 में धरती पर लौटे। मजे की बात यह है कि जिस देश से वे गए थे वह उनकी वापसी तक अस्तित्व में ही नहीं था। इसीलिए उन्हें मजाक में सोवियत यूनियन का आखिरी नागरिक भी कहा जाता है। 2003 में नासा ने केन बोर्सेक्स, डोनाल्ड पेटिट और निकोलाई बुखारिन को तीन महीने के मिशन पर आईएसएस भेजा था। लेकिन तभी एक बड़ी दुर्घटना हुई। उस दौरान अंतरिक्ष यान 'कोलंबिया' पृथ्वी पर लौटते वक्त नष्ट हो गया, जिसमें भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला सहित सात लोगों की जान चली गई। इस हादसे के बाद नासा ने सभी उड़ानें रोक दीं, जिससे आईएसएस पर मौजूद तीनों अंतरिक्ष यात्रियों को भी मजबूरी में 5 महीने तक रुकना पड़ा। बाद में रूसी कैप्सूल के जरिए उन्हें वापस लाया गया। 2022 में नासा के फ्रैंक रुबियो और रूसी अंतरिक्ष यात्री सर्गेई प्रोकोपयेव व दिमित्रि पेतलिन आईएसएस पर छह महीने के मिशन के लिए गए थे। लेकिन जब उन्हें लाने के लिए भेजा गया सोयुज कैप्सूल अंतरिक्ष में तैरते मलबे से टकरा गया और क्षतिग्रस्त हो गया। इससे तीनों यात्री फंस गए और 371 दिन तक उन्हें स्पेस में ही रहना पड़ा जो किसी अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री का अब तक का सबसे लंबा मिशन बन गया। आखिरकार 2023 में नासा ने एक दूसरा कैप्सूल भेजकर उन्हें सुरक्षित वापस लाया।

मंगलवार, 18 मार्च 2025

युवा की भांति" जनता के बीच में अनवरत बने हुए अलगू जी


जब भी संत कबीर नगर के धनघटा विधानसभा का इतिहास लिखा जाएगा, इतिहास  अलगू चौहान साथ न्याय करेगा । बचपन से ही धनघटा विधानसभा और अन्य विधानसभाओं के भी बहुत से विधायकों को देखा हूं,पद से हटने के बाद और पूर्व होने के बाद अगले चुनाव का इंतजार करते हैं, टिकट मिलता है तो लड़ते हैं और नहीं मिलता है तो गुमनामी के अंधेरे में चलें जाते हैं। अलगू जी  एक "युवा की भांति" जनता के बीच में अनवरत बने हुए हैं, पुराने जमाने का होने के बाद भी और वर्तमान सोशल मीडिया के दौर से काफी हद तक अनभिज्ञ रहने के बाद भी  हमेशा अपने लोगों के लिए खड़े मिलते हैं,अपने लोगों के सुख-दु:ख में,अपने लोगों की लड़ाइयों में सदैव खड़े मिलते हैं। हां अगर आप इतने विनम्र और सादगी,शालीनता,विनम्रता और पार्टी के प्रति निस्वार्थ निष्ठा ही है जो किसी को भविष्य के किसी तात्कालिक,क्षणिक हानि-लाभ के लिए किसी दूसरे का समर्थक बेशक बना‌‌ सकती है।   विरोधी कभी नहीं।  विधानसभा के लगभग 90-95% कार्यकर्ताओं को आप अच्छे से पहचानते हैं। मिलने पर लगता ही नहीं है यह इतने बड़े नेता। आप स्वस्थ रहें और अनवरत ऐसे ही लोगों के सुख-दु:ख में शरीक होते रहें। कार्यकर्ता और जनता ही एक नेता का गहना होती हैं और आपने बेहतर इस गहने को धारण किया है। आपको पुन: जनता अवसर दे,ऐसी‌ ईश्वर से कामना करता हूं।

 

रविवार, 16 मार्च 2025

चुनौतीपूर्ण उपचार कर कटने से बचाए युवती के पैर


चुनौतीपूर्ण उपचार कर कटने से बचाए युवती के पैर


 : संजय गांधी परास्नातक आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआइएमएस) की इंटरवेंशनल रेडियोलाजिस्ट की टीम ने दोनों पैरों में एक्यूट लिम्ब इस्केमिया (एएलआइ) से पीड़ित युवती का सफलतापूर्वक इलाज कर उसके पैरों को काटने की नौबत से बचा लिया। प्रारंभिक प्रक्रिया के तुरंत बाद उसे एक बड़ा स्ट्रोक होने पर तत्काल मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी की गई। अब उसके स्वास्थ्य में सुधार है। यह रोग दुर्लभ और उपचार चुनौतीपूर्ण था। विभाग के डाक्टर ने बताया कि युवती रूमेटिक हृदय रोग (आरएचडी) से पीड़ित थी। एएलआइ के कारण उसे दोनों पैरों में गंभीर दर्द और ठंड लगने की परेशानी थी। यह एक जानलेवा स्थिति थी, जो हृदय में थक्कों के पलायन और पैर की धमनियों को अवरुद्ध करने के कारण होती है। अगर तुरंत इलाज न किया जाए तो पैर काटना पड़ सकता है। टीम ने गत शनिवार को उसके निचले अंगों में रक्त प्रवाह को बहाल करने के लिए आपातकालीन एंडोवैस्कुलर प्रक्रिया करने का फैसला किया। इंटरवेंशन रेडियोलाजिस्ट डा. तान्या यादव, डा. अविनाश डी. गौतम और विद्यार्थियों की टीम ने परक्यूटेनियस कैथेटर निर्देशित थ्रोम्बोलिसिस और थ्रोम्बेक्टोमी की। यह थक्का हटाने और रक्त प्रवाह को बहाल करने के लिए एक मिनिमल इनवेसिव तरीका है। समय पर रिपरफ्यूजन के बाद रोगी के पैरों को • दोनों पैरों में एक्यूट लिंब इस्केमिया से पीड़ित थी युवती • शरीर का दाहिना हिस्सा अचानक हो गया था लकवाग्रस्त कटने से बचा लिया गया। बाद में उसे अचानक न्यूरोलाजिकल समस्याएं होने लगीं। दाएं तरफ कमजोरी और बोलने में कठिनाई हो रही थी। यह स्ट्रोक का संकेत था। उसके हृदय से थक्के बाईं ओर की प्रमुख मस्तिष्क धमनियों में चले गए थे, जिससे उसके शरीर का दाहिना हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया और वह बोलने में असमर्थ हो गई। मस्तिष्क की एमआरआइ से पता चला कि बाई और मध्य मस्तिष्क धमनी (एमसीए) में तीव्र अवरोध है। स्ट्रोक प्रबंधन के समय-संवेदनशील प्रकृति को पहचानते हुए तुरंत मस्तिष्क से थक्का हटाने के लिए यांत्रिक श्रोम्बेक्टोमी की। कमर में एक छोटे से निशान के माध्यम से एक माइक्रोकैथेटर और माइक्रोवायर का उपयोग करके थक्के को पार किया गया और एस्पिरेशन थ्रोम्बेक्टोमी की गई, जिससे थक्के को पूरी तरह से हटाया गया। थ्रोम्बेक्टोमी के बाद रोगी में अगले कुछ घंटों में न्यूरोलाजिकल सुधार दिखाई देने लगे। फिर वह सामान्य बातचीत करने लगी। वरिष्ठ इंटरवेंशन रेडियोलाजिस्ट प्रोफेसर रजनीकांत आर यादव ने बताया कि यह उपलब्धि कार्डियोलाजी टीम (डा. अंकित साहू, डा. प्रांजल और टीम के अन्य सदस्य) और एनेस्थीसिया टीम (प्रो. देवेंद्र गुप्ता, डा. तपस कुमार सिंह और एनेस्थीसिया रेजिडेंट्स) के सहयोग के बिना हासिल नहीं की जा सकती थी। रेडियोडायग्नोसिस विभाग की प्रमुख प्रोफेसर अर्चना गुप्ता ने कहा कि यह असाधारण मामला था।

बुधवार, 12 मार्च 2025

प्रदूषण बन रहा है किडनी का दुश्मन

 

विश्व किडनी जागरूकता दिवस आज


प्रदूषण बन रहा है किडनी का दुश्मन


किडनी खराबी को कर सकते है धीमा


 


वायु प्रदूषण, भारी धातु, कीटनाशक किडनी का दुश्मन साबित हो सकता है। विश्व किडनी जागरूकता दिवस 13 मार्च के मौके पर संजय गांधी पीजीआई के नेफ्रोलाजी विभाग के प्रमुख प्रो, नारायण प्रसाद ने बताया कि   धुंआ, धूल और सॉट्स जैसी छोटी कण (जो 2.5 माइक्रोमीटर से छोटे होते हैं) हवा के रास्ते शरीर में घुसकर रक्त प्रवाह में मिल जाते हैं और फिर किडनी में पहुंचकर सूजन और फाइब्रोसिस (गंभीर अवस्था में किडनी के कार्य में कमी) का कारण बनते हैं। वर्तमान में वायु प्रदूषण, कैंसर के बाद, मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन चुका है। बताया कि


भारी धातुएं पारा, कैडमियम और आर्सेनिक,  किडनी को नुकसान पहुंचाते हैं। कीटनाशक, हर्बीसाइड और कीटनाशक के संपर्क में आना भी किडनी की परेशानी हो सकती है। प्रो. नारायण प्रसाद ने बताया कि  रेनिन एंजियोटेंसिन ब्लॉकर, एसजीएलटी-2 इनहैबिटर,सेमाग्लूटाइड. फिनरी नॉन दवाएं किडनी की बीमारी के कम करती है। डायलिसिस और प्रत्यारोपण की आवश्यकता को टाल सकती हैं। हर 10 में से 1 व्यक्ति दुनिया भर में किसी न किसी प्रकार की किडनी की समस्या से पीड़ित है, जिससे सीकेडी(क्रोनिक किडनी डिजीज)  स्वास्थ्य चुनौती बन गई है।


 


 


कराएं यह जांच


 


यूरीन में एल्ब्यूमिन और ब्लड में क्रिएटिनिन की जांच करवाकर सुनिश्चित करें कि आपकी किडनी स्वस्थ है।


 


मृत्यु का पांचवा कारण बन रहा है किडनी 


कैंसर, पल्मोनरी और कार्डियोवस्कुलर बीमारियों से होने वाली मृत्यु दर घट रही है, जबकि किडनी रोगों से होने वाली मौतें बढ़ रही हैं, और 2040 तक यह मृत्यु के प्रमुख कारणों में से पांचवां कारण बन सकता है। इसलिए, यह जरूरी है कि हम इस बड़ी समस्या से बचाव के उपायों को अपनाएं।




किडनी को बचाने के लिए करें यह उपाय


 


-कम नमक का सेवन - 1 चम्मच से कम प्रति दिन।


- शुगर है तो एचबीएवनसी 7% से कम रखें


-ब्लड प्रेशर  130/80 मिमीएचजी से कम रखें।


-आदर्श वजन बनाए रखें -बीएमआई 25 से कम।


-पानी पीने की आदत डालें और निर्जलीकरण से बचें।


-फ्रुक्टोज युक्त पेय पदार्थों से बचें और हाई यूरिक एसिड से बचें।


- - एलडीएल कोलेस्ट्रॉल 70 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से कम रखें।


-धुंआ, धूल और सॉट्स से भरे प्रदूषित वातावरण में जाने से बचें।


-धूम्रपान से बचें।


-बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयों का सेवन न करें।

शनिवार, 8 मार्च 2025

Dharmesh Kumar Becomes President, Seema Shukla Appointed General Secretary of PGI Employees Welfare Association


Dharmesh Kumar Becomes President, Seema Shukla Appointed General Secretary of PGI Employees Welfare Association


Association to Work for the Welfare of Current and Retired Employees


In order to address the issues and provide support to both serving and retired employees, the SGPGI All Employees Welfare Association has been formed. A meeting was held under the leadership of Chief Technical Officer D.K. Singh and former Assistant Administrative Officer C.L. Verma, attended by key leaders from various staff categories of the institution. The meeting focused on resolving issues faced by all regular employees and officers of the institution, ensuring the protection of their interests, and working for their overall welfare and development.


The SGPGI All Employees Welfare Association was established to address these concerns. In the meeting, a consensus was reached, and 28 office bearers were nominated from different staff categories of the institution. Dharmesh Kumar was appointed as the President, Seema Shukla as the General Secretary, and Ram Lakhan as the Treasurer of the Association. The executive committee includes D.K. Singh, Saroj Verma, C.L. Verma, K.K. Tiwari, Rajkumar, Virendra Yadav, Ajay Srivastava, Amar Singh, Madan Murari, Nirupama Singh, Archana Sinha, Himanshu Patel, R.K. Bajpai, Deepti Verma, Abid Ali, Biru Yadav, Rakesh Chand, and K.P. Singh, totaling 25 members.


The office bearers explained that the formation of this organization is the need of the hour, as employees had no platform to voice concerns regarding healthcare, medication, or administrative issues. This association has been created as a unified platform for all categories of employees to express and address their grievances collectively.


गुरुवार, 6 मार्च 2025

शिक्षामित्रों का मानदेय 25 हजार रुपये प्रतिमाह तथा अनुदेशकों को न्यूनतम 22 हजार

 



यूपी में संविदाकर्मियों के बाद शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को बढ़े वेतन का तोहफा मिलने जा रहा है।अब शिक्षामित्रों का मानदेय 25 हजार रुपये प्रतिमाह तथा अनुदेशकों को न्यूनतम 22 हजार



आउट सोर्स एवं संविदा कर्मियों के न्यूनतम वेतन में इजाफा करने के बाद सरकार जल्द ही शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों के मानदेय में सम्मानजनक बढ़ोत्तरी करने जा रही है। उच्च स्तर पर इसके लिए सहमति बनने के बाद प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिसे मंजूरी के लिए कैबिनेट में भेजा जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार शिक्षा मित्रों का मानदेय 25 हजार रुपये प्रतिमाह तथा अनुदेशकों को न्यूनतम 22 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिए जाने का प्रस्ताव है।


दोनों संवर्ग के शिक्षा कर्मियों को दूसरे राज्यों की भांति तीन वर्षों पर वेतन वृद्धि की सुविधा पर सरकार सहमत हो चुकी है। कैबिनेट की मुहर लगते ही शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों के मानदेय में न सिर्फ दोगुने से अधिक वृद्धि हो जाएगी बल्कि हर तीन वर्ष पर वेतन वृद्धि का भी लाभ मिलेगा। इस समय प्रदेश में शिक्षा मित्रों को प्रतिमाह 10 हजार रुपये तथा अनुदेशकों को नौ हजार रुपये मानदेय के रूप में दिया जा रहा है।


सरकार ने बीते 20 फरवरी को आउट सोर्स एवं सविदाकर्मियों के मानदेय अथवा वेतन को न्यूनतम 16 हजार से 20 हजार रुपये तक करने की घोषणा की थी। इसी कड़ी में अब शिक्षामित्र एवं अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि किए जाने की योजना है। बताया जाता है कि सरकार ने देश के कुछ अन्य राज्यों में वहां शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों को दिए जाने वाले अन्य सुविधाओं का अध्ययन भी कराया है। उसी आधार पर यहां के शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों को भी कुछ अतिरिक्त सुविधाएं प्रदान करने पर भी विचार किया जा रहा है जिस पर अन्तिम मुहर कैबिनेट की लगेगी तभी वह लागू किया जा सकेगा। वित्त विभाग के अधिकारी ने बताया कि दूसरे राज्यों के पैटर्न पर प्रदेश की आर्थिक एवं सामाजिक स्थितियों को देखते हुए अनुकूल निर्णय लिया जा रहा है। कई राज्यों में दो से तीन वर्षों के अन्तराल पर वेतन वृद्धि की सुविधा दी जा रही है।


 न्यूनतम मानदेय 20 हजार तक,और क्या

आउट सोर्स एवं संविदा कर्मियों के न्यूनतम वेतन में इजाफा करने के बाद सरकार जल्द ही शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों के मानदेय में सम्मानजनक बढ़ोत्तरी करने जा रही है। उच्च स्तर पर इसके लिए सहमति बनने के बाद प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिसे मंजूरी के लिए कैबिनेट में भेजा जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार शिक्षा मित्रों का मानदेय 25 हजार रुपये प्रतिमाह तथा अनुदेशकों को न्यूनतम 22 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिए जाने का प्रस्ताव है।


दोनों संवर्ग के शिक्षा कर्मियों को दूसरे राज्यों की भांति तीन वर्षों पर वेतन वृद्धि की सुविधा पर सरकार सहमत हो चुकी है। कैबिनेट की मुहर लगते ही शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों के मानदेय में न सिर्फ दोगुने से अधिक वृद्धि हो जाएगी बल्कि हर तीन वर्ष पर वेतन वृद्धि का भी लाभ मिलेगा। इस समय प्रदेश में शिक्षा मित्रों को प्रतिमाह 10 हजार रुपये तथा अनुदेशकों को नौ हजार रुपये मानदेय के रूप में दिया जा रहा है।


सरकार ने बीते 20 फरवरी को आउट सोर्स एवं सविदाकर्मियों के मानदेय अथवा वेतन को न्यूनतम 16 हजार से 20 हजार रुपये तक करने की घोषणा की थी। इसी कड़ी में अब शिक्षामित्र एवं अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि किए जाने की योजना है। बताया जाता है कि सरकार ने देश के कुछ अन्य राज्यों में वहां शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों को दिए जाने वाले अन्य सुविधाओं का अध्ययन भी कराया है। उसी आधार पर यहां के शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों को भी कुछ अतिरिक्त सुविधाएं प्रदान करने पर भी विचार किया जा रहा है जिस पर अन्तिम मुहर कैबिनेट की लगेगी तभी वह लागू किया जा सकेगा। वित्त विभाग के अधिकारी ने बताया कि दूसरे राज्यों के पैटर्न पर प्रदेश की आर्थिक एवं सामाजिक स्थितियों को देखते हुए अनुकूल निर्णय लिया जा रहा है। कई राज्यों में दो से तीन वर्षों के अन्तराल पर वेतन वृद्धि की सुविधा दी जा रही है।


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प्रदेश में शिक्षामित्रों की संख्या - 1,43, 450

अनुदेशकों की संख्या- 25,223 है


अन्य राज्यों में वहां के शिक्षा मित्रों को मिलने वाले मानदेय या वेतन की स्थिति-


चंडीगढ़- 34, 000 रुपये प्रतिमाह


राजस्थान- 51,600 रुपये प्रतिमाह


झारखण्ड- ज्यादातर को समायोजित कर दिया गया बचे हुए को 20 से 28,000 के बीच मानदेय प्रतिमाह


उत्तराखण्ड- टेट पास सहायक अध्यापक बनाये गए जो बचे उन्हें 20, 000 रुपये प्रतिमाह


बिहार-विधानसभा में नियमित किए जाने की घोषणा हो चुकी है। फिलहाल 20 वर्ष की नौकरी पूरी कर चुके को 26, 000 से 29,000 मानदेय दिया जा रहा है।

शादी का वादा तोड़ना रेप नहीं माना जा सकता

 



शादी का वादा तोड़ना रेप नहीं माना जा सकता


 सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में कहा कि 16 साल तक लिवइन


रिलेशनशिप में रहने के बाद कोई महिला रेप का आरोप नहीं लगा सकती। सिर्फ शादी करने का वादा तोड़ने से रेप का मामला नहीं बनता, जब तक यह साबित न हो जाए कि शुरुआत से ही शादी की कोई मंशा नहीं थी।



महिला ने 2022 में अपने पूर्व लिवइन पार्टनर पर रेप का केस दर्ज कराया था। उसका आरोप था कि 2006 में पार्टनर जबरदस्ती उसके घर में घुसा


और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। बाद में शादी का झांसा देकर 16 साल तक उसका शोषण किया। फिर किसी दूसरी महिला से शादी कर ली।


जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अगर कोई महिला इतने समय तक रिश्ते में रहती है, तो इसे धोखा या जबरदस्ती नहीं कहा जा सकता है। यह मामला लिवइन रिलेशनशिप के बिगड़ने का है, न कि रेप का। कोर्ट ने सवाल उठाया कि एक पढ़ी-लिखी और आत्मनिर्भर महिला इतने सालों तक किसी के धोखे में कैसे रह सकती है। ऐसा कैसे हो सकता है कि जब अचानक उसका पार्टनर किसी और से शादी कर


ले, तब केस दर्ज कराए। कोर्ट ने मामला खत्म करते हुए कहा कि केस जारी रखना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।


इसी तरह के एक अन्य मामले के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर, 2024 में कहा था कि ब्रेकअप या शादी का वादा तोड़ना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं हो सकता। हालांकि, ऐसे वादे टूटने पर शख्स इमोशनली परेशान हो सकता है। अगर वह सुसाइड कर सुना लेता है, तो इसके लिए किसी दूसरे व्यक्ति को अपराधी नहीं माना जा सकता। जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस उज्ज्ल भुइयां की बेंच ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को पटल दिया था।

बुधवार, 26 फ़रवरी 2025

जरूर करें रावण रचित शिव तांडव स्तोत्र एवं उसका हिंदी अर्थ

  



रावण रचित शिव तांडव स्तोत्र एवं उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत है-


जटा टवी गलज्जल

प्रवाह पावि तस्थले गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजंग तुंग मालिकाम्‌।

डमड्डमड्डमड्डमन्निनाद वड्डमर्वयं चकारचण्डताण्डवं तनोतु नः शिव: शिवम्‌ ॥१॥


उनके बालों से बहने वाले जल से उनका कंठ पवित्र है,

और उनके गले में सांप है जो हार की तरह लटका है,

और डमरू से डमट् डमट् डमट् की ध्वनि निकल रही है,

भगवान शिव शुभ तांडव नृत्य कर रहे हैं, वे हम सबको संपन्नता प्रदान करें।


 


जटाकटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी विलोलवीचिवल्लरी विराजमानमूर्धनि।

धगद्धगद्धगज्ज्वल ल्ललाटपट्टपावके किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम: ॥२॥


मेरी शिव में गहरी रुचि है,

जिनका सिर अलौकिक गंगा नदी की बहती लहरों की धाराओं से सुशोभित है,

जो उनकी बालों की उलझी जटाओं की गहराई में उमड़ रही हैं?

जिनके मस्तक की सतह पर चमकदार अग्नि प्रज्वलित है,

और जो अपने सिर पर अर्ध-चंद्र का आभूषण पहने हैं।


 


धराधरेंद्रनंदिनी विलासबन्धुबन्धुर स्फुरद्दिगंतसंतति प्रमोद मानमानसे।

कृपाकटाक्षधोरणी निरुद्धदुर्धरापदि क्वचिद्विगम्बरे मनोविनोदमेतु वस्तुनि ॥३॥


मेरा मन भगवान शिव में अपनी खुशी खोजे,

अद्भुत ब्रह्माण्ड के सारे प्राणी जिनके मन में मौजूद हैं,

जिनकी अर्धांगिनी पर्वतराज की पुत्री पार्वती हैं,

जो अपनी करुणा दृष्टि से असाधारण आपदा को नियंत्रित करते हैं, जो सर्वत्र व्याप्त है,

और जो दिव्य लोकों को अपनी पोशाक की तरह धारण करते हैं।


 


जटाभुजंगपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा कदंबकुंकुमद्रव प्रलिप्तदिग्व धूमुखे।

मदांधसिंधु रस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे मनोविनोदद्भुतं बिंभर्तुभूत भर्तरि ॥४॥


मुझे भगवान शिव में अनोखा सुख मिले, जो सारे जीवन के रक्षक हैं,

उनके रेंगते हुए सांप का फन लाल-भूरा है और मणि चमक रही है,

ये दिशाओं की देवियों के सुंदर चेहरों पर विभिन्न रंग बिखेर रहा है,

जो विशाल मदमस्त हाथी की खाल से बने जगमगाते दुशाले से ढंका है।


 


सहस्रलोचन प्रभृत्यशेषलेखशेखर प्रसूनधूलिधोरणी विधूसरां घ्रिपीठभूः।

भुजंगराजमालया निबद्धजाटजूटकः श्रियैचिरायजायतां चकोरबंधुशेखरः ॥५॥


भगवान शिव हमें संपन्नता दें,

जिनका मुकुट चंद्रमा है,

जिनके बाल लाल नाग के हार से बंधे हैं,

जिनका पायदान फूलों की धूल के बहने से गहरे रंग का हो गया है,

जो इंद्र, विष्णु और अन्य देवताओं के सिर से गिरती है।

 


ललाटचत्वरज्वल द्धनंजयस्फुलिंगभा निपीतपंच सायकंनम न्निलिंपनायकम्‌।

सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं महाकपालिसंपदे शिरोजटालमस्तुनः ॥६॥


शिव के बालों की उलझी जटाओं से हम सिद्धि की दौलत प्राप्त करें,

जिन्होंने कामदेव को अपने मस्तक पर जलने वाली अग्नि की चिनगारी से नष्ट किया था,

जो सारे देवलोकों के स्वामियों द्वारा आदरणीय हैं,

जो अर्ध-चंद्र से सुशोभित हैं।




करालभालपट्टिका धगद्धगद्धगज्ज्वल द्धनंजया धरीकृतप्रचंड पंचसायके।

धराधरेंद्रनंदिनी कुचाग्रचित्रपत्र कप्रकल्पनैकशिल्पिनी त्रिलोचनेरतिर्मम ॥७॥


मेरी रुचि भगवान शिव में है, जिनके तीन नेत्र हैं,

जिन्होंने शक्तिशाली कामदेव को अग्नि को अर्पित कर दिया,

उनके भीषण मस्तक की सतह डगद् डगद्... की घ्वनि से जलती है,

वे ही एकमात्र कलाकार है जो पर्वतराज की पुत्री पार्वती के स्तन की नोक पर,

सजावटी रेखाएं खींचने में निपुण हैं।


 


नवीनमेघमंडली निरुद्धदुर्धरस्फुर त्कुहुनिशीथनीतमः प्रबद्धबद्धकन्धरः।

निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिंधुरः कलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥८॥


भगवान शिव हमें संपन्नता दें,

वे ही पूरे संसार का भार उठाते हैं,

जिनकी शोभा चंद्रमा है,

जिनके पास अलौकिक गंगा नदी है,

जिनकी गर्दन गला बादलों की पर्तों से ढंकी अमावस्या की अर्धरात्रि की तरह काली है।


 


प्रफुल्लनीलपंकज प्रपंचकालिमप्रभा विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम्‌।

स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥९॥


मैं भगवान शिव की प्रार्थना करता हूं, जिनका कंठ मंदिरों की चमक से बंधा है,

पूरे खिले नीले कमल के फूलों की गरिमा से लटकता हुआ,

जो ब्रह्माण्ड की कालिमा सा दिखता है।

जो कामदेव को मारने वाले हैं, जिन्होंने त्रिपुर का अंत किया,

जिन्होंने सांसारिक जीवन के बंधनों को नष्ट किया, जिन्होंने बलि का अंत किया,

जिन्होंने अंधक दैत्य का विनाश किया, जो हाथियों को मारने वाले हैं,

और जिन्होंने मृत्यु के देवता यम को पराजित किया।


 


अखर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम्‌।

स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥१०॥


मैं भगवान शिव की प्रार्थना करता हूं, जिनके चारों ओर मधुमक्खियां उड़ती रहती हैं

शुभ कदंब के फूलों के सुंदर गुच्छे से आने वाली शहद की मधुर सुगंध के कारण,

जो कामदेव को मारने वाले हैं, जिन्होंने त्रिपुर का अंत किया,

जिन्होंने सांसारिक जीवन के बंधनों को नष्ट किया, जिन्होंने बलि का अंत किया,

जिन्होंने अंधक दैत्य का विनाश किया, जो हाथियों को मारने वाले हैं,

और जिन्होंने मृत्यु के देवता यम को पराजित किया।


 


जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुरद्ध गद्धगद्विनिर्गमत्कराल भाल हव्यवाट्।

धिमिद्धिमिद्धि मिध्वनन्मृदंग तुंगमंगलध्वनिक्रमप्रवर्तित: प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥११॥


शिव, जिनका तांडव नृत्य नगाड़े की ढिमिड ढिमिड

तेज आवाज श्रंखला के साथ लय में है,

जिनके महान मस्तक पर अग्नि है, वो अग्नि फैल रही है नाग की सांस के कारण,

गरिमामय आकाश में गोल-गोल घूमती हुई।


 


दृषद्विचित्रतल्पयो र्भुजंगमौक्तिकमस्र जोर्गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः।

तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥१२॥


मैं भगवान सदाशिव की पूजा कब कर सकूंगा, शाश्वत शुभ देवता,

जो रखते हैं सम्राटों और लोगों के प्रति समभाव दृष्टि,

घास के तिनके और कमल के प्रति, मित्रों और शत्रुओं के प्रति,

सर्वाधिक मूल्यवान रत्न और धूल के ढेर के प्रति,

सांप और हार के प्रति और विश्व में विभिन्न रूपों के प्रति?


 


कदा निलिंपनिर्झरी निकुंजकोटरे वसन्‌ विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्‌।

विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः शिवेति मंत्रमुच्चरन्‌ कदा सुखी भवाम्यहम्‌ ॥१३॥


मैं कब प्रसन्न हो सकता हूं, अलौकिक नदी गंगा के निकट गुफा में रहते हुए,

अपने हाथों को हर समय बांधकर अपने सिर पर रखे हुए,

अपने दूषित विचारों को धोकर दूर करके, शिव मंत्र को बोलते हुए,

महान मस्तक और जीवंत नेत्रों वाले भगवान को समर्पित?


 


इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं पठन्स्मरन्‌ ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्‌।

हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथागतिं विमोहनं हि देहिनां सुशंकरस्य चिंतनम् ॥१६॥


इस स्तोत्र को, जो भी पढ़ता है, याद करता है और सुनाता है,

वह सदैव के लिए पवित्र हो जाता है और महान गुरु शिव की भक्ति पाता है।

इस भक्ति के लिए कोई दूसरा मार्ग या उपाय नहीं है।

बस शिव का विचार ही भ्रम को दूर कर देता है।


सद्‌गुरु: रावण शिव का महान भक्त था, और उनके बारे में अनेक कहानियां प्रचलित हैं। एक भक्त को महान नहीं होना चाहिये लेकिन वह एक महान भक्त था। वह दक्षिण से इतनी लंबी दूरी तय कर के कैलाश आया- मैं चाहता हूँ कि आप बस कल्पना करें, इतनी लंबी दूरी चल के आना – और वो शिव की प्रशंसा में स्तुति गाने लगा। उसके पास एक ड्रम था, जिसकी ताल पर उसने तुरंत ही 1008 छंदों की रचना कर डाली, जिसे शिव तांडव स्तोत्र के नाम से जाना जाता है।


उसके संगीत को सुन कर शिव बहुत ही आनंदित व मोहित हो गये। रावण गाता जा रहा था, और गाने के साथ–साथ उसने दक्षिण की ओर से कैलाश पर चढ़ना शुरू कर दिया। जब रावण लगभग ऊपर तक आ गया, और शिव उसके संगीत में मंत्रमुग्ध थे, तो पार्वती ने देखा कि एक व्यक्ति ऊपर आ रहा था।



अब ऊपर, शिखर पर केवल दो लोगों के लिये ही जगह है। तो पार्वती ने शिव को उनके हर्षोन्माद से बाहर लाने की कोशिश की। वे बोलीं, "वो व्यक्ति बिल्कुल ऊपर ही आ गया है"।





अब ऊपर, शिखर पर केवल दो लोगों के लिये ही जगह है। तो पार्वती ने शिव को उनके हर्षोन्माद से बाहर लाने की कोशिश की। वे बोलीं, “वो व्यक्ति बिल्कुल ऊपर ही आ गया है”। लेकिन शिव अभी भी संगीत और काव्य की मस्ती में लीन थे। आखिरकार पार्वती उनको संगीत के रोमांच से बाहर लाने में सफल हुईं। और जब रावण शिखर तक पहुंच गया तो शिव ने उसे अपने पैर से धक्का मार कर नीचे गिरा दिया। रावण, कैलाश के दक्षिणी मुख से फिसलते हुए नीचे की ओर गिरा। ऐसा कहा जाता है कि उसका ड्रम उसके पीछे घिसट रहा था और जैसे-जैसे रावण नीचे जाता गया, उसका ड्रम पर्वत पर ऊपर से नीचे तक, एक लकीर खींचता हुआ गया।अगर आप कैलाश के दक्षिणी मुख को देखें तो आप बीच में से ऊपर से नीचे की तरफ आता एक निशान देख सकते हैं ।