शनिवार, 29 अगस्त 2026

न्यूरोइंटरवेंशन तकनीक से बच्चों के दिमाग की नसों की बनावट में खराबी का इलाज संभव

 



न्यूरोइंटरवेंशन  तकनीक  से बच्चों के दिमाग की नसों की बनावट में खराबी का इलाज संभव


  संस्थान में 24 घंटे स्ट्रोक यूनिट है संचालित 


 जन्मजात खराबी से हो सकता है स्ट्रोक



लखनऊ


 बच्चों में दिमाग की नसों की जन्मजात खराबी यानी चाइल्डहुड सेरेब्रोवैस्कुलर मालफॉर्मेशन गंभीर बीमारी हो सकती है। इसमें दिमाग की रक्त वाहिकाएं सामान्य तरीके से विकसित नहीं होतीं और नसों के बीच असामान्य जुड़ाव बन जाता है। इससे दिमाग में रक्तस्राव, दौरे और स्ट्रोक तक का खतरा हो सकता है। समय पर पहचान और आधुनिक इलाज से बच्चे को गंभीर जटिलताओं से बचाया जा सकता है। यह जानकारी संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआइ) के न्यूरोइंटरवेंशन रेडियोलॉजिस्ट प्रो. विवेक सिंह ने संस्थान में आयोजित  इंडियन सोसाइटी ऑफ न्यूरोरेडियोलॉजी (आईएसएनआर) मिड-टर्म सीएमई-2026 में दी।

प्रो. विवेक सिंह ने बताया कि बच्चों में दिमाग की रक्त वाहिकाओं की कई तरह की जन्मजात विकृतियां देखी जाती हैं। इनमें सेरेब्रल एवीएम, वेन ऑफ गैलेन मालफॉर्मेशन, पियल आर्टिरियोवेनस फिस्टुला और स्यूडोएन्यूरिज्म प्रमुख हैं। इनकी वजह से दिमाग में खून का प्रवाह असामान्य हो जाता है। कई बार बीमारी का पता तब चलता है जब बच्चे को अचानक दौरा पड़ता है, तेज सिरदर्द होता है, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी आती है या ब्रेन हेमरेज हो जाता है।

उन्होंने बताया कि इलाज बीमारी के आकार, स्थान और उसकी गंभीरता पर निर्भर करता है। न्यूरोइंटरवेंशन आधुनिक इलाज की ऐसी तकनीक है, जिसमें बिना बड़ी सर्जरी के शरीर की नस के रास्ते कैथेटर को दिमाग की प्रभावित नस तक पहुंचाया जाता है। इसके जरिए असामान्य रक्त वाहिकाओं में विशेष पदार्थ डालकर उनके रक्त प्रवाह को बंद किया जा सकता है। कुछ बच्चों में सर्जरी या रेडियोसर्जरी की भी जरूरत पड़ सकती है। सही मरीज का सही समय पर इलाज बेहद महत्वपूर्ण है।

एसजीपीजीआई के रेडियोडायग्नोसिस विभाग की प्रमुख प्रो. अर्चना गुप्ता ने बताया कि संस्थान बच्चों और वयस्कों में जटिल न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के लिए आधुनिक इमेजिंग और कम चीरा लगाने वाली उपचार सुविधाओं को लगातार मजबूत कर रहा है। संस्थान में 24 घंटे स्ट्रोक यूनिट भी संचालित है।

प्रो. विवेक सिंह ने बताया कि बच्चों में स्ट्रोक और रक्त वाहिकाओं की जन्मजात विकृतियों के इलाज के लिए रेडियोलॉजी, न्यूरोइंटरवेंशन, न्यूरोलॉजी और बाल चिकित्सा विशेषज्ञों की संयुक्त टीम की जरूरत होती है। प्रस्तावित एडवांस्ड पीडियाट्रिक सेंटर में बच्चों को जांच से लेकर उपचार तक की सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।

 सीएमई में  देशभर के विशेषज्ञ बच्चों में स्ट्रोक, ब्रेन वैस्कुलर मालफॉर्मेशन और आधुनिक न्यूरोइंटरवेंशन , मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी, कैरोटिड इंटरवेंशन और इंट्राक्रेनियल  प्रशिक्षण दिया जाएगा।

गोलियां पेट को चीरकर आर-पार हुईं, पीजीआइ की टीम ने बचाई युवक की जान

 

गोलियां पेट को चीरकर आर-पार हुईं, पीजीआइ की टीम ने बचाई युवक की जान



लखनऊ


 भूमि विवाद में गोली लगने से गंभीर रूप से घायल गोंडा के अभय पांडेय की जान पीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने बचा ली। गोलियां उनके पेट, छोटी आंत के शुरुआती हिस्से (डुओडेनम) और बड़ी आंत के एक हिस्से (सीकम) को चीरते हुए लगी थीं। पेट में करीब एक लीटर खून जमा हो गया था। डाक्टरों ने समय पर ऑपरेशन कर उनकी हालत संभाली। करीब दो सप्ताह के इलाज के बाद अभय को 25 अगस्त को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

गोंडा निवासी अभय पांडेय, पुत्र राज कुमार पांडेय, को नौ अगस्त को नवाबगंज के पास खरगूपुर गांव में कथित तौर पर भूमि विवाद के चलते गोली मार दी गई थी। हालत गंभीर होने पर उन्हें पीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर लाया गया।

 जांच के बाद 11 अगस्त को उनकी सर्जरी की। ऑपरेशन के दौरान पेट में करीब एक लीटर खून मिला। गोलियों से पेट के अंदर कई जगह गंभीर चोटें आई थीं। ट्रॉमा टीम ने क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत कर रक्तस्राव को नियंत्रित किया।

ऑपरेशन के बाद अभय को गहन निगरानी में रखा गया। ट्रॉमा सर्जरी, एनेस्थीसिया और आईसीयू की टीम ने मिलकर उनकी देखभाल की। धीरे-धीरे उनकी हालत में सुधार हुआ और 25 अगस्त को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

ऑपरेशन करने वाली टीम में 

एडिशनल चीफ एवं ट्रॉमा सर्जन प्रो. अमित कुमार सिंह, , डा. वरुण गुप्ता और डा. आदित्य सिंह शामिल रहे। एनेस्थीसिया टीम में डा. गणपत प्रसाद, डा. प्रतीक सिंह बैस, डा. दीक्षा, डा. निखिल और डा. नबील रहे। ओटी टेक्नीशियन अमित यादव और आईसीयू टीम के ओम प्रकाश, मयंक बंसल, राहुल कुमार, दिव्यांशी और पायल नेगी ने भी इलाज में सहयोग किया।

निदेशक प्रोफेसर आरके धीमान ने पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने गंभीर पेट की चोट के इस मामले में ट्रॉमा सर्जरी, एनेस्थीसिया, ओटी और आईसीयू टीम के बेहतर तालमेल की सराहना की।

गुरुवार, 27 अगस्त 2026

राखी के धागे से बंधा रिश्ता, जरूरत पड़ने पर जिंदगी की डोर भी थाम सकता है

 





राखी के धागे से बंधा रिश्ता, जरूरत पड़ने पर जिंदगी की डोर भी थाम सकता है


बहन ने छोटे भाई को किडनी देकर बचाई जिंदगी


 वाराणसी के कौशिक और गाजीपुर के अरविंद का संजय गांधी पीजीआई में हुआ किडनी ट्रांसप्लांट




किसी परिवार को जब पता चलता है कि उसके अपने की किडनी खराब हो गई है और जिंदगी बचाने के लिए किडनी ट्रांसप्लांट कराना पड़ेगा, तो वह पल परिवार के लिए बेहद कठिन होता है। बीमारी के सदमे के साथ सबसे बड़ा सवाल सामने आता है कि किडनी कौन देगा। ऐसे समय में परिवार का कोई अपना आगे बढ़कर किडनी दान करने का फैसला करता है तो निराशा के बीच उम्मीद की नई किरण दिखाई देती है। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में ऐसे ही दो मामलों में बहनों ने अपने भाइयों को किडनी देकर नई जिंदगी दी।



भाई की जिंदगी के लिए बहन बनीं किडनी डोनर



वाराणसी के सिंधोरा थाना क्षेत्र के ग्राम बुंची, पोस्ट राजपुर (मंगारी), तहसील पिंडरा निवासी कौशिक कुमार मिश्रा पुत्र लालचंद्र मिश्रा की किडनी खराब हो गई थी। परिवार के सामने ट्रांसप्लांट ही जिंदगी बचाने का रास्ता था। ऐसे मुश्किल समय में उनकी बहन अनीता मिश्रा आगे आईं और उन्होंने अपनी किडनी भाई को दान करने का फैसला किया। कौशिक मिश्रा का किडनी ट्रांसप्लांट मार्च 2026 में संजय गांधी पीजीआई, लखनऊ में हुआ।

अनीता मिश्रा ने कहा, “भाई को बीमारी की हालत में देखकर मन बहुत परेशान था। मेरे मन में एक ही बात थी कि अगर मेरी किडनी से उसकी जिंदगी बच सकती है तो इससे बड़ा मेरे लिए कुछ नहीं है।  आज उसके लिए कुछ करने का मौका मिला तो मैंने अपना फर्ज निभाया। सबसे बड़ी खुशी इस बात की है कि आज मेरा भाई हमारे बीच स्वस्थ जिंदगी की ओर बढ़ रहा है।”



अरविंद के लिए ज्ञानती ने किया अंगदान



इसी तरह गाजीपुर की रहने वाली ज्ञानती ने अपने छोटे भाई अरविंद कुमार को किडनी देकर उसकी जिंदगी बचाने का फैसला किया। अरविंद की किडनी खराब होने की जानकारी मिलने के बाद परिवार गहरे तनाव में था। बीमारी के साथ यह चिंता भी थी कि ट्रांसप्लांट के लिए किडनी कौन देगा। ऐसे समय में बड़ी बहन ज्ञानती आगे आईं और अपनी किडनी देने का फैसला किया। अरविंद का किडनी ट्रांसप्लांट अक्तूबर 2025 में संजय गांधी पीजीआई, लखनऊ में हुआ।

परिवार के लिए यह पल बेहद भावुक था। एक तरफ भाई की बीमारी ने सभी को चिंता में डाल दिया था, वहीं बहन के इस फैसले ने परिवार में उम्मीद और खुशी लौटा दी। बहन के त्याग ने भाई को नई जिंदगी मिलने का रास्ता साफ किया।



राखी के धागे से कहीं मजबूत निकला रिश्ता



रक्षाबंधन पर बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है और बदले में अपनी रक्षा का वचन लेती है। लेकिन इन दोनों बहनों ने इस रिश्ते को एक अलग ही अर्थ दे दिया। जिस भाई से बहन अपनी रक्षा का वचन लेती है, उसकी जिंदगी की रक्षा के लिए खुद आगे आ गई। किडनी खराब होने की खबर से जिस परिवार में डर, बेचैनी और अनिश्चितता छा गई थी, बहन के अंगदान के फैसले ने वहां उम्मीद और खुशी लौटा दी।



 बहनों की संख्या कम



प्रो. नारायण प्रसाद और किडनी ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर विजय प्रताप सोनकर के अनुसार, किडनी दान करने वालों में मां और पत्नी की संख्या सबसे अधिक रहती है। पिछले पांच वर्षों में बहनों द्वारा किडनी दान करने के मामले करीब नौ से अधिक नहीं रहे हैं। इसके पीछे सामाजिक सोच, शादी के बाद ससुराल पक्ष की सहमति और अंगदान को लेकर बनी गलत धारणाएं बड़ी वजह हैं।

सोनकर ने कहा, “अंगदान को लेकर समाज में अभी भी कई भ्रांतियां हैं। सही चिकित्सकीय जांच में स्वस्थ पाए जाने के बाद किडनी दान करने वाला व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है। किसी अपने को जीवन देने का फैसला समाज के लिए भी सकारात्मक संदेश है।”



किडनी दान सिर्फ चिकित्सा नहीं, रिश्ते की भी परीक्षा



ट्रांसप्लांट टीम के हिमांशु ने कहा, “किडनी ट्रांसप्लांट सिर्फ एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि भावनाओं और रिश्तों से जुड़ा फैसला भी है। जब कोई बहन अपने भाई की जिंदगी बचाने के लिए आगे आती है तो वह पूरे परिवार के लिए बेहद भावुक और खुशी का क्षण होता है।”



प्रो. नारायण प्रसाद के मुताबिक, उचित चिकित्सकीय जांच के बाद किडनी दान करने वाला व्यक्ति सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकता है। इसलिए अंगदान को लेकर डर और भ्रम के बजाय वैज्ञानिक जानकारी को महत्व देना जरूरी है।



बीमारी की खबर से छाई मायूसी, बहन के फैसले से लौटी मुस्कान



किडनी खराब होने की जानकारी मिलते ही परिवार के सामने सिर्फ बीमारी नहीं होती, बल्कि इलाज, ट्रांसप्लांट, खर्च और भविष्य की कई चिंताएं एक साथ खड़ी हो जाती हैं। ऐसे में जब बहन अपनी किडनी देने के लिए आगे आती है तो परिवार को लगता है कि मुश्किल वक्त में भी कोई उनके साथ मजबूती से खड़ा है।

अनीता और ज्ञानती ने सिर्फ अपनी किडनी दान नहीं की, बल्कि अपने भाइयों और पूरे परिवार को दोबारा मुस्कुराने की वजह दी। इन दोनों बहनों ने साबित किया कि भाई-बहन का रिश्ता सिर्फ राखी के धागे तक सीमित नहीं है। जरूरत पड़ने पर बहन अपने शरीर का एक हिस्सा देकर भी भाई की जिंदगी की रक्षा कर सकती है।


1 कौशिक और किडनी देने वाली बहन अनीता 

2 अरविंद को किडनी देने वाली बहन ज्ञानती

एसजीपीजीआई में स्वदेशी एसएमए दवा की शुरुआत, 15 बच्चों को मुफ्त मिला इलाज

 



एसजीपीजीआई में स्वदेशी एसएमए दवा की शुरुआत, 15 बच्चों को मुफ्त मिली पहली खेप

विदेशी दवा के मुकाबले करीब 50 गुना कम लागत में इलाज

100 से अधिक बच्चे पंजीकृत, 50 से ज्यादा दवा के इंतजार में


स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (एसएमए) से पीड़ित बच्चों के लिए संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में बड़ी पहल हुई है। राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति (एनपीआरडी) के तहत संस्थान में भारत में निर्मित आरएनए स्प्लाइसिंग मॉडिफायर रिसडिप्लाम (नैटस्मार्ट) उपलब्ध कराया गया। गुरुवार को चिकित्सा आनुवंशिकी विभाग में 15 बच्चों को दवा  निशुल्क वितरित की गई।

रिसडिप्लाम मुंह से दी जाने वाली दवा है, जो शरीर में एसएमएन प्रोटीन के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करती है। यह प्रोटीन मोटर न्यूरॉन कोशिकाओं के लिए जरूरी होता है। इससे मांसपेशियों की ताकत और मोटर क्षमता को बनाए रखने में मदद मिलती है और बीमारी की प्रगति धीमी हो सकती है। एसएमए में मोटर न्यूरॉन कोशिकाएं प्रभावित होने से बच्चों में मांसपेशियों की कमजोरी, शरीर में ढीलापन, चलने-फिरने में देरी और बाद में सांस लेने में परेशानी हो सकती है, जबकि उनकी बुद्धि सामान्य रहती है।

विदेशी कंपनियों की दवाओं की कीमत बहुत अधिक होने के कारण एसएमए का इलाज परिवारों पर भारी पड़ता है। विशेषज्ञों के मुताबिक 20 किलो वजन वाले बच्चे के लिए विदेशी ओरल दवा की कीमत करीब एक से दो करोड़ रुपये सालाना तक थी, जबकि भारत में निर्मित दवा करीब 3.5 लाख रुपये सालाना में उपलब्ध है। यानी लागत लगभग 50 गुना कम हो गई है।

एसजीपीजीआई में 100 से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं और 50 से ज्यादा दवा की प्रतीक्षा में हैं। कार्यक्रम में निदेशक पद्मश्री प्रो. आरके धीमान ने विभाग को बधाई दी और बच्चों को दवा वितरित की। बच्चों ने उन्हें राखी बांधी। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. देवेंद्र गुप्ता, संयुक्त निदेशक सामग्री प्रबंधन प्रकाश सिंह और खरीद अधिकारी गंगा विष्णु मौजूद रहे। दवा की खरीद में संयुक्त निदेशक सामग्री प्रबंधन कार्यालय का विशेष योगदान रहा।

विभागाध्यक्ष डॉ. कौशिक मंडल के नेतृत्व में टीम ने दवा उपलब्ध कराने के प्रयास किए। टीम में डॉ. दीप्ति सक्सेना, डॉ. अमिता एम., डॉ. हसीना ए. सैत, डॉ. अंशिका श्रीवास्तव, डॉ. प्रज्ञा काफ्ले, डॉ. पूजा मोटवानी और डॉ. आदर्श शामिल हैं। छह रेजिडेंट डॉक्टरों, वार्ड स्टाफ और अंजू लता गुप्ता का भी योगदान रहा। डॉ. प्रज्ञा काफ्ले, डॉ. पूजा मोटवानी, डॉ. हसीना और डॉ. आदर्श की विशेष भूमिका रही।


मंगलवार, 25 अगस्त 2026

Bicycle Fall Leaves 10-Year-Old with Severe Pancreas Injury, SGPGIMS Surgery Saves His Life

 

Bicycle Fall Leaves 10-Year-Old with Severe Pancreas Injury, SGPGIMS Surgery Saves His Life

Grade-IV pancreatic injury treated with complex surgery; child spent 24 hours on ventilator and was discharged healthy

Lucknow, August 25: A 10-year-old boy with a severe pancreatic injury after falling from a bicycle has been successfully treated at the Apex Trauma Centre of Sanjay Gandhi Postgraduate Institute of Medical Sciences (SGPGIMS). The child, Mohammad Nadeem, from Jangipur Khurd village in Jaunpur, was discharged in a stable and healthy condition on Monday.

Nadeem suffered a serious abdominal injury after falling from his bicycle on August 6. He was treated at a hospital in Jaunpur for four days and was referred to the SGPGIMS Trauma Centre on August 10. Investigations revealed a Grade-IV pancreatic injury, with nearly one litre of pancreatic fluid collected inside the abdomen.

Considering the seriousness of the injury, the trauma surgery team performed a complex distal pancreaticosplenectomy on August 11. The surgery was performed by Prof. Amit Kumar Singh, Additional Chief and Trauma Surgeon, along with Dr Aditya Singh, Senior Resident, Trauma Surgery.

After the operation, the child required mechanical ventilation for nearly 24 hours. He responded well to treatment and was successfully taken off the ventilator. A multidisciplinary team from Trauma Surgery, Anaesthesia and Critical Care closely monitored his recovery.

The anaesthesia team included Dr Rafat Shamim, Dr Ganpat Prasad and Dr Diksha. With continuous treatment and monitoring, the child made a good recovery and was discharged on August 25.

The SGPGIMS Director congratulated Prof. Amit Kumar Singh and the entire teams of Trauma Surgery, Anaesthesia and Critical Care for the successful treatment. He appreciated the team's expertise and coordination in managing such a complex paediatric trauma case.

The case also highlights the importance of timely referral of patients with serious injuries to a specialised trauma centre where trauma surgery, anaesthesia and critical care services are available under one roof.

पीजीआई साइकिल से गिरने पर अग्न्याशय में गंभीर चोट, 10 वर्षीय बच्चे को बचाया

 


पीजीआई - साइकिल से गिरने पर अग्न्याशय में गंभीर चोट, 10 वर्षीय बच्चे को बचाया

ग्रेड-चार की चोट के बाद जटिल सर्जरी, 24 घंटे वेंटिलेटर पर रहा बच्चा; 19 दिन बाद स्वस्थ होकर घर लौटा

लखनऊ, 25 अगस्त। साइकिल से गिरने के बाद अग्न्याशय में गंभीर चोट से जूझ रहे 10 वर्षीय बच्चे की एसजीपीजीआईएमएस के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में सफल सर्जरी की गई। जौनपुर के ग्राम जंगीपुर खुर्द निवासी मोहम्मद नदीम छह अगस्त को साइकिल से गिर गया था। हादसे में उसके पेट में गंभीर चोट आई। स्थानीय अस्पताल में चार दिन उपचार के बाद उसे 10 अगस्त को एसजीपीजीआईएमएस ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया।

जांच में बच्चे के अग्न्याशय में ग्रेड-चार की गंभीर चोट पाई गई। पेट में करीब एक लीटर अग्न्याशयी द्रव जमा था। स्थिति को देखते हुए 11 अगस्त को डिस्टल पैंक्रियाटिको-स्प्लेनेक्टॉमी की गई। ट्रॉमा सर्जरी के प्रो. अमित कुमार सिंह, एडिशनल चीफ एवं ट्रॉमा सर्जन और डा. आदित्य सिंह, सीनियर रेजिडेंट ने यह जटिल सर्जरी की।

ऑपरेशन के बाद बच्चे को करीब 24 घंटे मैकेनिकल वेंटिलेशन पर रखा गया। इसके बाद उसकी स्थिति में लगातार सुधार हुआ और उसे सफलतापूर्वक वेंटिलेटर से हटा लिया गया। ट्रॉमा सर्जरी, एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर की बहु-विषयक टीम ने बच्चे की निगरानी और उपचार किया। एनेस्थीसिया टीम में डा. रफत शमीम, डा. गणपत प्रसाद और डा. दीक्षा शामिल रहीं।

लगातार उपचार और निगरानी के बाद बच्चे की हालत पूरी तरह स्थिर हो गई। उसे 25 अगस्त को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

एसजीपीजीआईएमएस निदेशक ने प्रो. अमित कुमार सिंह सहित ट्रॉमा सर्जरी, एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह जटिल बाल ट्रॉमा के उपचार में विशेषज्ञता और बेहतर आपसी समन्वय का उदाहरण है। उन्होंने गंभीर चोटों में समय पर विशेषज्ञ ट्रॉमा सेंटर पहुंचाने को बेहद महत्वपूर्ण बताया।

सोमवार, 24 अगस्त 2026

पीजीआई के सहयोग से एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा में पहली बार किडनी ट्रांसप्लांट,

 





पीजीआई के सहयोग से एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा में पहली बार किडनी ट्रांसप्लांट, पत्नी ने पति को दी नई जिंदगी

। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई), लखनऊ के नेफ्रोलॉजी और यूरोलॉजी विभाग के लगातार प्रयासों से प्रदेश के दूसरे मेडिकल कॉलेजों में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू करने की पहल रंग लाई है। इसी क्रम में एसजीपीजीआई के सहयोग और विशेषज्ञ मार्गदर्शन में सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएनएमसी), आगरा में पहली बार सफल किडनी प्रत्यारोपण किया गया। क्रॉनिक किडनी डिजीज से पीड़ित 32 वर्षीय मरीज को उसकी पत्नी ने अपनी किडनी दान कर नई जिंदगी दी।

लंबे समय से डायलिसिस पर चल रहे मरीज का प्रत्यारोपण 22 अगस्त को एसजीपीजीआई लखनऊ और एसएनएमसी आगरा की संयुक्त टीम ने किया। ऑपरेशन सुबह 9:30 बजे शुरू हुआ और दोपहर तीन बजे तक चला। मुख्यमंत्री असाध्य रोग उपचार योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता से यह जटिल और जीवनरक्षक प्रत्यारोपण संभव हो सका।

प्रत्यारोपण के बाद मरीज और उसकी पत्नी, जो किडनी दानकर्ता हैं, दोनों की स्थिति स्थिर है। प्रत्यारोपित किडनी ने काम करना शुरू कर दिया है और दोनों तेजी से रिकवर कर रहे हैं।

एसजीपीजीआई के नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर नारायण प्रसाद प्रदेश के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा विकसित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में एसएनएमसी आगरा में ट्रांसप्लांट की आवश्यक तैयारियां कराई गईं। इसके बाद एसजीपीजीआई की विशेषज्ञ टीम ने स्थानीय चिकित्सकों के साथ मिलकर पहला प्रत्यारोपण सफल कराया।

एसएनएमसी के प्रधानाचार्य एवं डीन डा. प्रशांत गुप्ता और नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डा. अपूर्व जैन ने बताया कि प्रत्यारोपण के बाद मरीज और उसकी पत्नी दोनों की हालत स्थिर है। प्रत्यारोपित किडनी ने अच्छी तरह काम करना शुरू कर दिया है।

एसजीपीजीआई लखनऊ की टीम

किडनी ट्रांसप्लांट एवं यूरोलॉजी: प्रो. एमएस अंसारी, प्रो. संजय कुमार सुरेका, डा. आशीष रंजन

नेफ्रोलॉजी: डा. मानस रंजन बेहरा

एनेस्थीसिया: डा. तपस कुमार सिंह, डा. बोनचनपल्ली मोहन कुमार

नर्सिंग: सोसाकुट्टी विल्सन, विजय कुमार, आकांक्षा गौतम

एसएनएमसी आगरा की टीम

नेफ्रोलॉजी: प्रोफेसर डा. अपूर्व जैन, डा. मुदित खुराना, डा. कैरवी भारद्वाज

यूरोलॉजी: डा. प्रशांत लवानिया, डा. अंकुश गुप्ता, डा. विजय त्यागी, डा. प्रदीप देब, डा. अभिषेक पाठक

एनेस्थीसिया: डा. योगिता द्विवेदी, डा. अर्चना अग्रवाल, डा. राजीव पुरी, डा. अतिहर्ष मोहन, डा. प्रवीण पांडेय

एसएनएमसी में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होने से आगरा और आसपास के जिलों के मरीजों को प्रत्यारोपण के लिए दिल्ली, लखनऊ या जयपुर जैसे बड़े शहरों की ओर जाने की जरूरत कम होगी। स्थानीय स्तर पर सुविधा मिलने से मरीजों का समय और आर्थिक बोझ कम होगा तथा जरूरतमंद मरीजों को समय पर उच्चस्तरीय उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।

रविवार, 23 अगस्त 2026

सवर्ण मोर्चा ने निकाली शव यात्रा, केंद्र सरकार के खिलाफ जताया विरोध

 




सवर्ण मोर्चा ने निकाली प्रतीकात्मक शव यात्रा, अध्यक्ष संदीप सिंह समेत पदाधिकारियों ने की अगुवाई
लखनऊ। सवर्ण मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप सिंह, दुर्गेश पांडे और बसंत सिंह बघेल की अगुवाई में शनिवार को लखनऊ में प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाली गई। यात्रा 1090 चौराहे से शुरू होकर भैंसाकुंड श्मशान घाट तक पहुंची। इसमें सैकड़ों की संख्या में सवर्ण समाज के लोग शामिल हुए।
सवर्ण मोर्चा के राष्ट्रीय प्रवक्ता पंडित अभिनव नाथ त्रिपाठी ने बताया कि यात्रा का उद्देश्य सवर्ण समाज के लोगों को अपने अधिकारों और समाज से जुड़े मुद्दों के प्रति जागरूक करना है। मोर्चा ने आरोप लगाया कि सवर्ण समाज से जुड़े कई सांसद, विधायक और मंत्री जातिगत कानून, आरक्षण तथा एससी-एसटी एक्ट जैसे मुद्दों पर खामोश हैं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप सिंह के नेतृत्व में निकली यात्रा के दौरान केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध जताया गया। पदाधिकारियों ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार सवर्ण समाज के समर्थन से सत्ता में पहुंची, लेकिन अब समाज की समस्याओं और मांगों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
दुर्गेश पांडे और बसंत सिंह बघेल ने कहा कि सवर्ण समाज लंबे समय से विभिन्न मुद्दों को लेकर अपनी आवाज उठाता रहा है। सरकार को समाज की मांगों को गंभीरता से लेते हुए उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि मोर्चा आगे भी समाज को जागरूक करने के लिए अभियान जारी रखेगा।
यात्रा में राकेश सिंह रघुवंशी, अशोक सिंह, अरविंद पाठक, ईशांत सेंगर, ठाकुर हर्ष सिंह, भानु पांडे, अवधेश शुक्ला, सौर्य सिंह राजपूत, अनिशा द्विवेदी, माधुरी सिंह और अभिषेक अग्निहोत्री समेत बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे।
मोर्चा के अनुसार, 1090 चौराहे से शुरू हुई यात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए भैंसाकुंड श्मशान घाट पहुंची, जहां प्रतीकात्मक शव यात्रा का समापन किया गया। बाद में पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार कर इको गार्डन लेकर आई जहां पर 5:00 बजे के बाद इन्हें रिया किया गया।

 

शनिवार, 22 अगस्त 2026

पहले ऑपरेशन में नहीं निकली 6.5 किलो की गांठ पीजीआई में सफल सर्जरी





पहले ऑपरेशन में नहीं निकली 6.5 किलो की गांठ, एसजीपीजीआई में सफल सर्जरी

लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के विशेषज्ञों ने 48 वर्षीय पोस्टमेनोपॉज़ल महिला के पेट से 6.5 किलोग्राम का विशाल एब्डोमिनो-पेल्विक मास सफलतापूर्वक निकाल लिया। एक माह के भीतर संस्थान में इस तरह की यह लगातार तीसरी सफल सर्जरी है। करीब दो वर्ष पहले दूसरे केंद्र पर महिला की सर्जरी का एक बार प्रयास किया गया था, लेकिन पेट खोलने के बाद भी मास को निकालना संभव नहीं हो सका था।

विशाल मास के कारण महिला को चलने, बैठने और सांस लेने में गंभीर कठिनाई हो रही थी। इसके दबाव से उनकी दाहिनी किडनी भी प्रभावित हो रही थी। विस्तृत जांच और सावधानीपूर्वक सर्जिकल प्लानिंग के बाद एसजीपीजीआई में ऑपरेशन किया गया। सर्जरी के दौरान ठोस और सिस्टिक दोनों हिस्सों से बना 6.5 किलोग्राम का विशाल मास मिला। यह गर्भाशय और दोनों अंडाशयों को व्यापक रूप से घेरे हुए था। इन संरचनाओं की पहचान कर उन्हें सुरक्षित रखना बेहद चुनौतीपूर्ण था।

विशेषज्ञ टीम ने अत्यंत सावधानी और सूक्ष्म डिसेक्शन के जरिए गर्भाशय और दोनों अंडाशयों की पहचान की और उन्हें सुरक्षित रखते हुए मास को सफलतापूर्वक निकाल दिया। मरीज ने ऑपरेशन को अच्छी तरह सहन किया और उनका स्वास्थ्य लाभ संतोषजनक रहा।

सर्जरी का नेतृत्व डॉ. अंजू रानी ने किया। सर्जिकल टीम में डॉ. निधि सिंह, डॉ. सरिता, डॉ. शिखा, डॉ. शिवानी, डॉ. रितेश एवं डॉ. निर्मायंक शामिल रहे। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. अरुणा भारती एवं डॉ. निधि रहीं। नर्सिंग एवं सपोर्ट स्टाफ में सिस्टर ज्योति, दिव्या, मोनिका, वंदना एवं वीरभान शामिल रहे।

यह सफलता जटिल एवं विशाल एब्डोमिनो-पेल्विक मास के उपचार में एसजीपीजीआई की विशेषज्ञता और टीमवर्क को दर्शाती है।

शुक्रवार, 21 अगस्त 2026

हीमोडायनेमिक मॉनिटरिंग से गंभीर मरीज की हालत का तुरंत पता लगाना संभव


हीमोडायनेमिक मॉनिटरिंग से गंभीर मरीज की हालत का तुरंत पता लगाना संभव
लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रोफेसर आरके धीमान के मार्गदर्शन में आयोजित ईएमपीएआरवी इंटरनेशनल 2026  के तहत हीमोडायनेमिक असेसमेंट कार्यशाला में गंभीर मरीजों की निगरानी की आधुनिक तकनीक पर विशेषज्ञों ने जानकारी दी। कार्यक्रम का आयोजन एसोसिएशन ऑफ इमरजेंसी मेडिसिन एजुकेटर्स (एईएमई) और संस्थान के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है।
डॉ. उत्सव ने बताया कि गंभीर मरीजों में केवल ब्लड प्रेशर और पल्स देखकर शरीर के महत्वपूर्ण अंगों तक रक्त और ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति का सही आकलन हमेशा संभव नहीं होता। हीमोडायनेमिक मॉनिटरिंग से हृदय की पंपिंग क्षमता, रक्त प्रवाह और शरीर में रक्त की स्थिति का आकलन कर इलाज को मरीज की जरूरत के अनुसार तुरंत बदला जा सकता है।
उन्होंने बताया कि क्रिटिकल केयर में मरीज की स्थिति तेजी से बदल सकती है। हीमोडायनेमिक पैरामीटर से यह तय करने में मदद मिलती है कि मरीज को फ्लूड देने की जरूरत है या नहीं, हृदय कितनी प्रभावी ढंग से रक्त पंप कर रहा है और अंगों तक पर्याप्त रक्त पहुंच रहा है या नहीं। इससे फ्लूड थेरेपी और रक्तचाप बढ़ाने वाली दवाओं के इस्तेमाल में बेहतर निर्णय लिया जा सकता है। शॉक और सेप्सिस जैसे गंभीर मरीजों में इसका विशेष महत्व है।
कार्यशाला में केस आधारित चर्चा, बेडसाइड अल्ट्रासाउंड और व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को तकनीक के इस्तेमाल की जानकारी दी गई।बताया कि
20 से 23 अगस्त तक चल रहे ईएमपीएआरवी इंटरनेशनल 2026 में 21 से अधिक कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। प्रसूति आपात स्थिति, ईसीजी, ब्लड-गैस, न्यूरोक्रिटिकल केयर, मैकेनिकल वेंटिलेशन, ट्रॉमा और मरीजों की सुरक्षा जैसे विषयों पर भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

बुधवार, 19 अगस्त 2026

Six-Year-Old With Life-Threatening Grade IV Liver Injury Saved at SGPGI

 



Six-Year-Old With Life-Threatening Grade IV Liver Injury Saved at SGPGI

Lucknow: A six-year-old boy with a life-threatening liver injury sustained in a road accident was successfully treated at the Apex Trauma Centre of Sanjay Gandhi Postgraduate Institute of Medical Sciences (SGPGI), Lucknow, through emergency surgery and multidisciplinary trauma care.

Krishna Kumar, son of Vikram and a resident of Nawade Parsoni village in Gopalganj district of Bihar, suffered serious injuries after being hit by an e-rickshaw on July 29, 2026. He was referred to the Apex Trauma Centre for specialised trauma management and admitted on August 1.

Investigations revealed a Grade IV liver injury, with nearly two litres of blood accumulated inside the abdomen (hemoperitoneum) and ongoing bleeding from the injured liver. Considering the severity of the injury and continued internal bleeding, an emergency surgery was performed on the same day. The primary objective was to control the bleeding and stabilise the severely injured liver.

The surgery was performed by the trauma surgery team, while the anaesthesia and critical care teams provided intensive perioperative support. Following surgery, the child required mechanical ventilation for around 48 hours. He was subsequently weaned off ventilator support as his condition improved.

The child remained under close observation for recurrent bleeding, infection, respiratory complications and other possible consequences of severe abdominal trauma. With coordinated surgical, anaesthesia and critical care management, his condition steadily improved.

Krishna was discharged from the Apex Trauma Centre on August 19, 2026, in satisfactory condition.

According to the treating team, Grade IV liver injuries can cause life-threatening blood loss, particularly in young children. Rapid assessment, timely referral, emergency control of bleeding, specialised trauma surgery, advanced anaesthesia support and postoperative critical care are crucial for successful outcomes in such cases.

Surgical and Anaesthesia Team

Trauma Surgery: Prof. Amit Kumar Singh, Additional Chief, Apex Trauma Centre; Dr Aditya Singh, Senior Resident, Trauma Surgery.

Anaesthesia: Dr Ganpat Prasad, Additional Professor; Dr Rafat Shamim, Additional Professor; Dr Vansh Priya, Additional Professor.

पीजीआई - गंभीर लिवर चोट से जूझ रहे छह साल के बच्चे की सफल इमरजेंसी सर्जरी





चौथी श्रेणी की गंभीर लिवर चोट से जूझ रहे छह साल के बच्चे की एसजीपीजीआई में सफल इमरजेंसी सर्जरी 


 सड़क दुर्घटना में लिवर की गंभीर और जानलेवा चोट से जूझ रहे छह वर्षीय बच्चे की जान संजय गांधी पीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में समय पर इमरजेंसी सर्जरी और मल्टीडिसिप्लिनरी ट्रॉमा केयर से बचाई गई। बिहार के गोपालगंज जिले के नवाडे पारसोनी गांव निवासी विक्रम के छह वर्षीय बेटे कृष्णा कुमार को 29 जुलाई 2026 को ई-रिक्शा की टक्कर से गंभीर चोट लगी थी। बेहतर ट्रॉमा प्रबंधन के लिए उसे 1 अगस्त को एपेक्स ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया।

जांच में बच्चे के लिवर में चौथी श्रेणी की गंभीर चोट पाई गई। पेट के अंदर करीब दो लीटर खून जमा था और घायल लिवर से लगातार रक्तस्राव हो रहा था। स्थिति को देखते हुए उसी दिन इमरजेंसी सर्जरी की गई। सर्जरी का मुख्य उद्देश्य सक्रिय रक्तस्राव को नियंत्रित करना और गंभीर रूप से घायल लिवर को स्थिर करना था।

सर्जरी के बाद बच्चे को करीब 48 घंटे तक मैकेनिकल वेंटिलेशन पर रखा गया। इसके बाद हालत में सुधार होने पर उसे वेंटिलेटर से हटा दिया गया। अस्पताल में लगातार निगरानी के दौरान दोबारा रक्तस्राव, संक्रमण, सांस संबंधी परेशानी और अन्य संभावित जटिलताओं पर नजर रखी गई। मल्टीडिसिप्लिनरी सर्जिकल और क्रिटिकल केयर प्रबंधन से कृष्णा की हालत में लगातार सुधार हुआ और 19 अगस्त को उसे संतोषजनक स्थिति में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में लिवर की चौथी श्रेणी की चोट गंभीर रक्तस्राव के कारण जानलेवा हो सकती है। ऐसे मामलों में समय पर पहचान, त्वरित रेफरल, रक्तस्राव पर नियंत्रण, विशेषज्ञ ट्रॉमा सर्जरी, बेहतर एनेस्थीसिया और ऑपरेशन के बाद गहन देखभाल मरीज की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यह मामला गंभीर चोट के मरीजों को समय पर विशेषज्ञ ट्रॉमा सेंटर पहुंचाने के महत्व को भी रेखांकित करता है।

सर्जरी एवं एनेस्थीसिया टीम

ट्रॉमा सर्जरी

प्रो. अमित कुमार सिंह, एडिशनल चीफ, एपेक्स ट्रॉमा सेंटर

डा. आदित्य सिंह, सीनियर रेजिडेंट, ट्रॉमा सर्जरी

एनेस्थीसिया

डा. गणपत प्रसाद, एडिशनल प्रोफेसर

डा. रफत शमीम, एडिशनल प्रोफेसर

डा. वंश प्रिया, एडिशनल प्रोफेसर

रविवार, 16 अगस्त 2026

पीजीआई 39 कर्मियों को उत्कृष्ट कार्य के लिए किया सम्मानित



संजय गांधी पीजीआई में उत्साह से मनाया गया 80वां स्वतंत्रता दिवस

निदेशक ने ध्वजारोहण कर संस्थान की उपलब्धियां गिनाईं, 39 कर्मियों को उत्कृष्ट कार्य के लिए किया सम्मानित

लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में 15 अगस्त को 80वां स्वतंत्रता दिवस उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रो. राधा कृष्ण धीमन ने ध्वजारोहण किया। राष्ट्रगान के बाद उन्होंने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस देश की आजादी के लिए किए गए बलिदानों को याद करने और राष्ट्र की प्रगति पर चिंतन करने का अवसर है।

निदेशक ने संस्थान की उपलब्धियां गिनाते हुए बताया कि संस्थान को एनएएसी से ए++ ग्रेड और एनआईआरएफ में देश में पांचवां स्थान मिला है। छह नियुक्ति चक्रों में 213 नियुक्ति पत्र जारी किए गए हैं और अब 450 से अधिक फैकल्टी कार्यरत हैं। उन्होंने पैरामेडिकल व अन्य कैडर में भर्ती, सलोनी हार्ट फाउंडेशन, एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर और गामा नाइफ की तैयारियों की जानकारी दी। संस्थान में डिजिटल और एआई आधारित पेपरलेस हेल्थकेयर सिस्टम विकसित किया जा रहा है।

कार्यक्रम में कॉलेज ऑफ नर्सिंग और कॉलेज ऑफ मेडिकल टेक्नोलॉजी के विद्यार्थियों ने देशभक्ति गीत और नृत्य प्रस्तुत किए। उत्कृष्ट कार्य के लिए 39 कर्मियों को निदेशक ने सम्मानित किया।

सम्मानित कर्मियों की पूरी सूची

सीसीएम — हाउसकीपिंग/स्वच्छता (आउटसोर्स) — रानी

गैस्ट्रो मेडिसिन (ओपीडी) — पेशेंट हेल्पर (आउटसोर्स) — राजेश यादव

न्यूक्लियर मेडिसिन — अस्पताल परिचर ग्रेड-I — हरिश चंद्र उप्रेती

सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी ओटी — अस्पताल परिचर ग्रेड-I — अवध राम

एंडो सर्जरी ओपीडी — परिचर ग्रेड-I — राकेश यादव

अपर निदेशक — परिचर ग्रेड-I — राम फेर

केंद्रीय पुस्तकालय — परिचर ग्रेड-I — मुन्ना लाल

जेडी (एम.एम.) कार्यालय — परिचर ग्रेड-II — अर्चना विजय जोशी

एनेस्थीसियोलॉजी — डाटा एंट्री ऑपरेटर (आउटसोर्स) — मीनू सिंह

सीवीटीएस कार्यालय — डाटा एंट्री ऑपरेटर (आउटसोर्स) — जितेंद्र सिंह

कॉलेज ऑफ मेडिकल टेक्नोलॉजी — डाटा एंट्री ऑपरेटर (आउटसोर्स) — राजनीश मिश्रा

व्हीकल सेल जेडी (ए) — डाटा एंट्री ऑपरेटर (आउटसोर्स) — शैलेश

एंडोक्राइनोलॉजी ओपीडी — डाटा एंट्री ऑपरेटर (आउटसोर्स) — जूही भटनागर

सीएसएसडी — ओटी असिस्टेंट — आशीष कुमार गौतम

पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटरोलॉजी — एमएसडब्ल्यू (आउटसोर्स) — गरिमा मिश्रा

रेडियो डायग्नोसिस — टेक्नीशियन (आउटसोर्स) — कपिल मोहन गुप्ता

वित्त कार्यालय — अकाउंट ऑफिसर — आदर्श श्रीवास्तव

बायोमेडिकल इंजीनियरिंग — तकनीकी अधिकारी — मनीष गोपाल सक्सेना

इंजीनियरिंग (इलेक्ट्रिकल) — तकनीकी अधिकारी (सीडब्ल्यूएस) — विजय शंकर यादव

इमरजेंसी मेडिसिन — एसएनओ — प्रवीण एन.पी.

इन्फेक्शन डिजीज — वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी — विनीता सिंह

नियोनेटोलॉजी — एसएनओ — रंजीता मसीह

ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन — वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी — अंजू बाला

पल्मोनरी मेडिसिन आईसीयू — वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी — मेरून निशा

डे केयर न्यू ओपीडी — सहायक नर्सिंग अधीक्षक — संगीता नरहरी गनवीर

सीएमएस कार्यालय — सहायक प्रशासनिक अधिकारी — संजय सक्सेना

हेड एंड नेक सर्जरी (ओटी) — सहायक नर्सिंग अधीक्षक — नीलम सचान

मातृ एवं प्रजनन स्वास्थ्य — सहायक नर्सिंग अधीक्षक — मालिनी जी. सिंह

नेफ्रोलॉजी (वार्ड) — सहायक नर्सिंग अधीक्षक — अनिल कुमार मौर्य

रिसर्च सेल — सहायक प्रशासनिक अधिकारी — कमलेश कुमार

कार्डियोलॉजी — उप नर्सिंग अधीक्षक — सुजा कोशी

पीडियाट्रिक सर्जिकल सुपर स्पेशियलिटीज — डीएनएस — रीता आर्या

न्यूरोसर्जरी — उप नर्सिंग अधीक्षक — शोभना के. नायर

माइक्रोबायोलॉजी — मुख्य तकनीकी अधिकारी — दिनेश प्रसाद

रेडियोथेरेपी — मुख्य तकनीकी अधिकारी — हरिवीर सिंह

एग्जीक्यूटिव रजिस्ट्रार — वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी — प्रयाग नारायण श्रीवास्तव

मेडिकल जेनेटिक्स — वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी — बृजेश कुमार पटेल

एचआरएफ — वरिष्ठ प्रोग्रामर — उमेश दत्त शर्मा

चीफ आर्टिस्ट — एम.आई.यू. — अनिल कुमार

कार्यक्रम में कार्यकारी डीन प्रो. मनोज जैन, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. देवेंद्र गुप्ता, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. आर. हर्षवर्धन, संयुक्त निदेशक (प्रशासन) प्रकाश सिंह सहित संकाय सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

शुक्रवार, 14 अगस्त 2026

पीजीआई में निकली भव्य तिरंगा यात्रा, देशभक्ति के रंग में रंगा संस्थान

 



पीजीआई में निकली भव्य तिरंगा यात्रा, देशभक्ति के रंग में रंगा संस्थान

संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में कर्मचारी महासंघ एवं नर्सिंग स्टाफ एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आज भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया। यात्रा का शुभारंभ संस्थान के प्रशासनिक भवन से हुआ। हाथों में तिरंगा लेकर बड़ी संख्या में संस्थान के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं नर्सिंग स्टाफ ने पूरे उत्साह और उमंग के साथ यात्रा में सहभागिता की।

तिरंगा यात्रा प्रशासनिक भवन से प्रारंभ होकर पुरानी बिल्डिंग, नवीन ओपीडी, पीएमएसवाई बिल्डिंग एवं संस्थान के मुख्य प्रवेश द्वार से होते हुए पुनः प्रशासनिक भवन पहुंची। प्रशासनिक भवन में संस्थान के निदेशक प्रोफेसर आर.के. धीमान की उपस्थिति में तिरंगा यात्रा का भव्य समापन हुआ।

इस अवसर पर कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष धर्मेश कुमार, महामंत्री सीमा शुक्ला, नर्सिंग स्टाफ एसोसिएशन के महामंत्री विवेक शर्मा, मुख्य नर्सिंग अधिकारी मंजू सिंह, सीनियर नर्सिंग ऑफिसर मंजू लता राव, सेनेटरी ऑफिसर ओम प्रकाश, वरिष्ठ नर्सिंग ऑफिसर चन्द्रप्रभा सहित संस्थान के तमाम अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

यात्रा के दौरान पूरा संस्थान देशभक्ति के रंग में सराबोर नजर आया। संस्थान के कार्मिकों ने हाथों में तिरंगा लेकर “भारत माता की जय” एवं देशभक्ति के नारों से वातावरण को गुंजायमान कर दिया। देशभक्ति के गीतों के साथ कर्मचारियों में विशेष उत्साह एवं राष्ट्रप्रेम की भावना देखने को मिली।

इस अवसर पर कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष धर्मेश कुमार एवं महामंत्री सीमा शुक्ला ने कहा कि “संस्थान में आने वाले प्रत्येक मरीज की सेवा करना ही हमारा धर्म है और यही हमारी राष्ट्र सेवा भी है। संस्थान में प्रत्येक कार्मिक को जो भी जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसका निष्ठा, ईमानदारी, समर्पण एवं समयबद्धता के साथ निर्वहन करना ही मरीज हित में हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। अपने कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी से पालन करके हम देश और समाज की सच्ची सेवा कर सकते हैं।”

तिरंगा यात्रा ने न केवल संस्थान में देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया, बल्कि यह संकल्प भी दोहराया कि मरीजों की बेहतर सेवा, अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदारी और संस्थान के प्रति समर्पण ही सच्ची राष्ट्र सेवा है।

गुरुवार, 13 अगस्त 2026

हर घर तिरंगा प्रभात फेरी में गूंजे भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारे

 

हर घर तिरंगा प्रभात फेरी में गूंजे भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारे

 केंद्रीय विद्यालय एसजीपीजीआई, लखनऊ की ओर से गुरुवार को हर घर तिरंगा अभियान के तहत प्रभात फेरी निकाली गई। प्रातः 7:50 बजे विद्यालय के मुख्य द्वार से प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार पाठक ने भारत माता की जय और वंदे मातरम के जयघोष के साथ प्रभात फेरी को रवाना किया।

प्रभात फेरी में करीब 500 छात्र-छात्राओं के साथ विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रैली विद्यालय से निकलकर एसजीपीजीआई के मुख्य द्वार तक पहुंची। इसके बाद प्रशासनिक भवन होते हुए वापस विद्यालय परिसर में पहुंची।

पूरे मार्ग में विद्यार्थी हाथों में तिरंगा लेकर देशभक्ति के नारों के साथ आगे बढ़ते रहे। रैली के दौरान एसजीपीजीआई परिसर भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारों से गूंज उठा। मार्ग से गुजर रहे लोगों ने भी विद्यार्थियों के उत्साह में शामिल होकर देशभक्ति के नारे लगाए।

प्रभात फेरी का संचालन डॉ. कौशलेंद्र सिंह ने किया, जबकि संयोजन श्री शोएब इस्लाम ने किया। विद्यालय परिवार ने विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय एकता और देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से इस आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लिया।

पीजीआई, राज कुमार अध्यक्ष और सविता वर्मा महामंत्री निर्वाचित



राज कुमार अध्यक्ष और सविता वर्मा महामंत्री निर्वाचित

लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति कर्मचारी कल्याण समिति के वर्ष 2026-2029 के चुनाव में राज कुमार को अध्यक्ष और सविता वर्मा को महामंत्री निर्वाचित किया गया है। 

अध्यक्ष पद पर राज कुमार विजेता रहे, जबकि सुकलेश कुमारी उपविजेता रहीं। वहीं महामंत्री पद पर सविता वर्मा ने जीत दर्ज की और मंजुलता राव उपविजेता रहीं।

उपाध्यक्ष पद पर पवन कुमार विजयी रहे, जबकि सुरेंद्र वीर सिंह उपविजेता रहे। कोषाध्यक्ष पद पर वंदना भारती निर्विरोध निर्वाचित हुईं। संयुक्त मंत्री के दो पदों पर अरचना सिंह, अरविंद कुमार और कुमारी शिवानी रावत में से अरचना सिंह को उपविजेता तथा अरविंद कुमार और शिवानी रावत को विजेता घोषित किया गया।

इसके अलावा संगठन मंत्री पद पर सीमा और कार्यालय मंत्री पद पर एस. कन्या कुमारी निर्विरोध निर्वाचित हुईं। प्रचार मंत्री पद पर वीर बली तथा कार्यकारिणी सदस्य के पांच पदों पर जूली, कृष्णपाल, सुभाष कुमार और कुमारी ट्विंकल वर्मा समेत अन्य पदाधिकारियों का निर्वाचन हुआ।

नवनिर्वाचित अध्यक्ष राज कुमार और महामंत्री सविता वर्मा ने कर्मचारियों के हितों के लिए मिलकर काम करने और समिति को और अधिक प्रभावी बनाने की बात कही।

बुधवार, 12 अगस्त 2026

हरियाली तीज के अवसर पर इंदिरा नगर में भव्य कार्यक्रम का आयोजन*

 

*हरियाली तीज के अवसर पर इंदिरा नगर में भव्य कार्यक्रम का आयोजन*




हरियाली तीज के शुभ अवसर पर आज इंदिरा नगर में महिलाओं द्वारा एक विशेष एवं रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर महिलाओं ने सुंदर मेहंदी लगाई तथा पारंपरिक तीज गीतों और मनमोहक नृत्यों की प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।

कार्यक्रम के दौरान हरियाली तीज के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला गया। सभी महिलाओं ने रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधान पहनकर उत्सव की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम में विभिन्न मनोरंजक प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

कार्यक्रम का कुशल संचालन शिवाजीपुरम निवासी मीरा ने किया। तीज क्वीन प्रतियोगिता में नेहल ने बाजी मारी। ढोलक प्रतियोगिता में प्रमिला वर्मा एवं प्रतिभा तिवारी विजेता रहीं, जबकि सावन गीत प्रतियोगिता में मीरा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। भावना श्रीवास्तव ने सभी प्रतिभागियों एवं उपस्थित महिलाओं को उपहार वितरित किए।

कार्यक्रम में तनु, शालिनी, दीप्ति, यामिनी, अंजलि, अर्पिता, मंजू सहित अन्य महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पूरे आयोजन का भरपूर आनंद उठाया। हंसी-खुशी, गीत-संगीत और उल्लास से वातावरण पूरी तरह तीजमय हो गया।

अंत में सभी ने सामूहिक रूप से लंच का आनंद लिया। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का सफल एवं सुखद समापन हुआ। यह आयोजन महिलाओं के बीच आपसी प्रेम, सौहार्द और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का सुंदर प्रयास रहा।

मंगलवार, 11 अगस्त 2026

Sanjay Gandhi PGI removed the affected kidney and cancerous clot from the major vein

 


Kidney Cancer Reaches Major Vein, Complex Surgery Saves Life of Five-Year-Old

Child had an abdominal lump for a year; doctors at Sanjay Gandhi PGI removed the affected kidney and cancerous clot from the major vein

Lucknow: Doctors at Sanjay Gandhi Postgraduate Institute of Medical Sciences (Sanjay Gandhi PGI) successfully performed a complex surgery on a five-year-old boy suffering from an advanced kidney cancer, saving his life. The tumour had grown beyond the kidney and extended into the inferior vena cava (IVC), one of the body's major veins, where it had formed a cancerous clot.

The surgery was performed under the leadership of Prof. Basant Kumar, Head of the Department of Paediatric Surgery. The child is recovering well after the operation. He will undergo further chemotherapy and radiotherapy as part of his treatment.

Abdominal Lump for Nearly a Year

The child, a resident of Kanpur, had an abdominal lump for nearly a year. Investigations revealed a Wilms tumour, a type of kidney cancer that primarily affects children. The disease had progressed and the tumour had extended into the IVC. The child had already received five cycles of chemotherapy at a private hospital in Kanpur before being referred to Sanjay Gandhi PGI for specialised treatment.

Cancerous Clot Removed from Major Vein

Prof. Basant Kumar said the child underwent nephroureterectomy with IVC thrombectomy. The procedure involved removal of the affected right kidney and ureter, along with removal of the cancerous tumour clot from inside the IVC.

The surgery was particularly challenging as the tumour had extended behind the liver towards the major vein and was also close to the left renal vein. The surgical team carefully exposed the major blood vessels, separated the tumour clot and removed it while maintaining blood flow and protecting the surrounding structures.

In such advanced cases, removal of the tumour from a major vein is technically demanding because any injury to the vessel can result in significant blood loss and compromise circulation.

Do Not Ignore Abdominal Lump in Children

Prof. Basant Kumar advised parents not to ignore any unusual lump, swelling or increase in abdominal size in children. Early evaluation and timely treatment by a paediatric surgeon can help detect serious conditions at an earlier stage and improve treatment outcomes.

पीजीआई में गुर्दा निकालने के साथ मुख्य नस से निकाला कैंसर का थक्का

 





गुर्दे का कैंसर मुख्य नस तक पहुंचा, पांच साल के मासूम की जटिल सर्जरी कर बचाई जान

एक साल से पेट में थी गांठ, जांच में मिला विल्म्स ट्यूमर; 

 पीजीआई में गुर्दा निकालने के साथ मुख्य नस से निकाला कैंसर का थक्का

लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (संजय गांधी पीजीआई) के विशेषज्ञों ने पांच वर्षीय बच्चे के गुर्दे के गंभीर कैंसर का जटिल ऑपरेशन कर उसकी जान बचाई। कैंसर गुर्दे से बढ़कर शरीर की प्रमुख नस इन्फीरियर वेना कावा (आईवीसी) तक पहुंच गया था और नस के भीतर कैंसर का थक्का बन गया था। पीडियाट्रिक सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. बसंत कुमार के नेतृत्व में टीम ने करीब एक साल से पेट में गांठ की समस्या से जूझ रहे बच्चे की सफल सर्जरी की। ऑपरेशन के बाद बच्चे की हालत में तेजी से सुधार हो रहा है। आगे बीमारी को नियंत्रित करने के लिए कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी दी जाएगी।

एक साल से पेट में थी गांठ

कानपुर निवासी बच्चे के पेट में करीब एक साल से गांठ थी। जांच में विल्म्स ट्यूमर की पुष्टि हुई। यह बच्चों में होने वाला गुर्दे का एक प्रमुख कैंसर है। बीमारी बढ़ने के कारण ट्यूमर गुर्दे से निकलकर आईवीसी तक पहुंच गया था। कानपुर के एक निजी अस्पताल में बच्चे को पांच चरणों की कीमोथेरेपी दी गई। इसके बाद बेहतर उपचार के लिए उसे संजय गांधी पीजीआई भेजा गया।

मुख्य नस से निकाला कैंसर का थक्का

प्रो. बसंत कुमार ने बताया कि बच्चे की नेफ्रोयूरेटेरेक्टॉमी विद आईवीसी थ्रॉम्बेक्टॉमी की गई। इसमें प्रभावित दाहिना गुर्दा और मूत्रवाहिनी निकालने के साथ आईवीसी के भीतर मौजूद कैंसर के थक्के को भी बाहर निकाला गया। ट्यूमर लिवर के पीछे स्थित मुख्य नस और बाईं गुर्दे की नस के करीब तक पहुंच चुका था, जिससे सर्जरी बेहद जोखिम भरी थी।

तकनीकी रूप से इस तरह की सर्जरी में मुख्य चुनौती बड़ी नस में रक्त प्रवाह को सुरक्षित रखते हुए ट्यूमर को पूरी तरह निकालना होती है। टीम ने नस की सावधानीपूर्वक पहचान कर कैंसर के थक्के को अलग किया और रक्तसंचार को सुरक्षित रखते हुए ऑपरेशन पूरा किया।

पेट में गांठ दिखे तो तुरंत कराएं जांच

प्रो. बसंत कुमार ने अभिभावकों को सलाह दी कि बच्चे के पेट में किसी भी तरह की गांठ, असामान्य सूजन या पेट का आकार बढ़ा हुआ दिखे तो इसे नजरअंदाज न करें। शुरुआती चरण में पहचान होने पर उपचार अपेक्षाकृत आसान होता है और गंभीर जटिलताओं से बचने की संभावना बढ़ जाती है।

सोमवार, 10 अगस्त 2026

पीजीआई हड्डी के दुर्लभ ट्यूमर से बुजुर्ग का हाथ बचाया

 

पीजीआई हड्डी के दुर्लभ ट्यूमर से बुजुर्ग का हाथ बचाया


कलाई की हड्डी में था जायंट सेल ट्यूमर


ट्यूमर निकालकर टांग की हड्डी से बनाई नई कलाई


लखनऊ। कलाई की हड्डी में दुर्लभ और आक्रामक ट्यूमर होने के बाद भी देवरिया के रहने वाले 65 वर्षीय बुजुर्ग मरीज का हाथ काटने की नौबत नहीं आई। संजय गांधी पीजीआइ के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के हड्डी रोग विभाग के प्रोफेसर अमित कुमार रेजिडेंट डा उत्सव और डा अमित ने  पहले दवा से ट्यूमर को नियंत्रित किया, फिर उसे पूरी तरह निकालकर मरीज की अपनी टांग की हड्डी से कलाई की हड्डी का पुनर्निर्माण कर दिया। जटिल ऑपरेशन के बाद मरीज अब हाथ से रोजमर्रा के काम कर पा रहा है। खास बात यह है कि पूरा इलाज आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत हुआ।

मरीज की कलाई में लगातार दर्द और सूजन थी। जांच में डिस्टल रेडियस में जायंट सेल ट्यूमर मिला। समय पर इलाज नहीं होने पर ट्यूमर हड्डी को काफी नुकसान पहुंचाकर हाथ की कार्यक्षमता छीन सकता था।

सर्जरी से पहले मरीज को डेनोसुमैब दवा दी गई। इससे ट्यूमर की गतिविधि कम हुई और उसके आसपास नई हड्डी बनने लगी। इसके बाद डॉक्टरों ने ट्यूमर को स्वस्थ हड्डी की सुरक्षित सीमा के साथ पूरी तरह निकाल दिया।

ट्यूमर निकालने के बाद हड्डी में बनी कमी को मरीज की अपनी टांग से ली गई फाइबुला हड्डी के ग्राफ्ट से भरा गया। इससे कलाई को मजबूती और स्थिरता मिली। फॉलोअप में ग्राफ्ट अच्छी तरह जुड़ गया है और ट्यूमर दोबारा होने के संकेत नहीं मिले हैं। 

एनेस्थीसिया विभाग के डा. प्रतीक का विशेष सहयोग रहा।